Uttarakhand News: उत्तराखंड में ट्रेकिंग होगी स्मार्ट और सुरक्षित, 100 रूट्स का वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू

Uttarakhand News: उत्तराखंड के 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की GPS/GIS मैपिंग होगी। CM धामी ने अभियान दल को फ्लैग ऑफ किया। ऑफलाइन-ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप भी बनेगा।

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Published on: 18 Sept 2026 12:11 PM IST (Updated on: 18 Sept 2026 12:11 PM IST)
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Uttarakhand News (Image Credit-Newstrack)

देहरादून। उत्तराखंड में ट्रेकिंग और साहसिक पर्यटन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से राज्य के 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की GPS/GIS मैपिंग और तकनीकी सर्वेक्षण के लिए जाने वाले अभियान दल को फ्लैग ऑफ किया।

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से गठित टीमें चयनित ट्रेकिंग रूट्स का स्थलीय सर्वेक्षण करेंगी। इसके साथ ही इन मार्गों की विस्तृत GPS/GIS मैपिंग की जाएगी। सरकार का उद्देश्य दूरस्थ और कम प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट्स को भी व्यवस्थित तरीके से पर्यटन मानचित्र पर लाना है।

ट्रेकिंग को सुरक्षित बनाने में मिलेगी मदद



मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में साहसिक और ट्रेकिंग पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रसिद्ध ट्रेकिंग क्षेत्रों के साथ दूरस्थ और कम चर्चित रूट्स को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है।

उन्होंने कहा कि GPS/GIS मैपिंग से ट्रेकिंग को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। पर्यटकों को रूट से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ऑफलाइन और ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप होगा विकसित

सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल ने बताया कि परियोजना के तहत 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की GPS/GIS मैपिंग और तकनीकी सर्वेक्षण किया जाएगा। मैपिंग के आधार पर ऑनलाइन और ऑफलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।



ऑफलाइन सुविधा के चलते नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होने पर भी ट्रेकर्स अपने मोबाइल फोन पर ट्रेल और रूट से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐप का इस्तेमाल आपातकालीन परिस्थितियों में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान भी किया जा सकेगा।

सचिव पर्यटन के अनुसार, परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद उत्तराखंड सभी 100 मैप किए गए ट्रेक मार्गों को कवर करने वाला ऑफलाइन एवं ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।

कैंप साइट, डस्टबिन और शौचालय के लिए भी चिन्हित होंगे स्थान

GPS/GIS मैपिंग के दौरान ट्रेकिंग रूट्स पर कैंप साइट, डस्टबिन और शौचालय के लिए उपयुक्त स्थानों की भी पहचान की जाएगी। इससे भविष्य में ट्रेकिंग मार्गों पर जरूरी सुविधाओं के विकास और कूड़ा प्रबंधन की योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

सरकार का कहना है कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। ट्रेक मार्गों पर सुरक्षा, संचार सुविधा, संकेतक और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाओं को भी बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकेगा।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर



मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परियोजना से राज्य के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइडिंग, होमस्टे और पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के क्रियान्वयन में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कम प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट्स को मिलेगी पहचान

परियोजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और कॉफी टेबल बुक भी तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य राज्य के कम प्रसिद्ध ट्रेकिंग क्षेत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करना है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, अपर सचिव पर्यटन एवं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद अभिषेक रुहेला, अपर निदेशक पर्यटन पूनम चंद समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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