E20 Petrol Update: चीनी के दाम बढ़ने से क्यों बढ़ी सरकार की चिंता,क्या E20 पेट्रोल होगा बंद?
E20 Petrol Update: चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच गन्ने से एथेनॉल उत्पादन घटाने पर विचार हो रहा है। जानें मक्का-चावल से बने एथेनॉल का इंजन और माइलेज पर असर।
E20 Petrol Update: Will Corn and Rice Ethanol Replace Sugarcane? Know the Impact on Engines
E20 Petrol Update: घरों की रसोइयों से लेकर फ़ूड बिजनेस से जुड़े कारोबारियों, हलवाइयों के लिए चीनी की कीमतों में आईं तेजी ने उनका बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है वहीं इस विकट समस्या ने अब सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की मांग बढ़ रही है और उत्पादन को लेकर भी आशंका है। ऐसे में सरकार अगले एथेनॉल सीजन में गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए सीमित करने पर विचार कर रही है, ताकि ज्यादा गन्ना चीनी बनाने में लगाया जा सके। लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि, अगर गन्ने से एथेनॉल कम बनेगा तो पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा? क्या E20 पेट्रोल की सप्लाई प्रभावित होगी और क्या मक्का या चावल से बना एथेनॉल इंजन के लिए नुकसानदायक होगा?
चीनी के दाम बढ़ने से क्यों बढ़ी सरकार की चिंता
जुलाई 2026 से चीनी की कीमतों में करीब 10 फीसदी की तेजी बताई जा रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में बारिश की स्थिति को लेकर चिंता है। कम बारिश की वजह से अगले सीजन में गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। दूसरी तरफ अगस्त से त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की मांग बढ़ने से चीनी की खपत भी बढ़ जाती है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में थोक चीनी की कीमत 4,716 रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंचने की रिपोर्ट है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने की है।
गन्ने से एथेनॉल कम करने पर विचार क्यों हो रहा है
गन्ने का इस्तेमाल सिर्फ चीनी बनाने के लिए नहीं होता। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने के रस और मोलासेस को भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। इससे पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ाने में मदद मिली है। मौजूदा एथेनॉल सीजन में चीनी उत्पादन का करीब 10 फीसदी हिस्सा यानी लगभग 30 लाख मीट्रिक टन चीनी के बराबर मात्रा एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किए जाने का अनुमान है। अगर अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल बनाने पर रोक या सीमित प्रतिबंध लगाया जाता है, तो इतनी अतिरिक्त मात्रा चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध हो सकती है। इससे कम उत्पादन की आशंका के बावजूद घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इस संबंध में अभी केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। रिपोर्टों के मुताबिक गन्ने के रस और B-हेवी मोलासेस से एथेनॉल उत्पादन को सीमित करने तथा C-हेवी मोलासेस से उत्पादन जारी रखने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
गन्ने की जगह मक्का और चावल से बनेगा एथेनॉल
गन्ने से एथेनॉल कम बनने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि E20 पेट्रोल बंद हो जाएगा। सरकार की रणनीति एथेनॉल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए दूसरे कच्चे माल का इस्तेमाल बढ़ाने की हो सकती है। इसमें सबसे अहम भूमिका मक्का और चावल की होगी।
मक्का और टूटे हुए चावल से औद्योगिक प्रक्रिया के जरिए एथेनॉल तैयार किया जाता है। इसके बाद इस एथेनॉल को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के मुताबिक तैयार करके पेट्रोल में मिलाया जाता है। इसलिए E20 पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस, मक्का या चावल नहीं मिलाया जाता। यानी अगर अगले सीजन में गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की मात्रा कम होती है तो मक्का और चावल से बनने वाले एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। इस तरह पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य भी जारी रखा जा सकता है।
मक्का या चावल से बना एथेनॉल क्या इंजन को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा
एक्सपर्ट्स के मुताबिक कई लोगों को ऐसा लगता है कि गन्ने से बना एथेनॉल और अनाज से बना एथेनॉल इंजन पर अलग असर डालता है। वास्तव में फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल का मूल रासायनिक यौगिक एक ही होता है। गन्ना हो, मक्का हो या चावल, उचित औद्योगिक प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया एथेनॉल रासायनिक रूप से C₂H₅OH ही होता है।
इसलिए इंजन पर असर इस बात से तय नहीं होता कि एथेनॉल किस फसल से बनाया गया है। ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी शुद्धता, गुणवत्ता और पेट्रोल में मिलाने का निर्धारित अनुपात है। पेट्रोल में इस्तेमाल होने से पहले एथेनॉल को तय ईंधन मानकों को पूरा करना होता है।
E20 से माइलेज कम होने की बात कितनी सही है
E20 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इंजन और माइलेज को लेकर होती है। यहां यह समझना जरूरी है कि एथेनॉल की ऊर्जा मात्रा पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसलिए E20 इस्तेमाल करने पर कुछ वाहनों में पेट्रोल की तुलना में मामूली माइलेज अंतर देखा जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि E20 से इंजन खराब हो जाएगा। वाहन का मॉडल, इंजन की डिजाइन, उसकी ट्यूनिंग और इस्तेमाल की परिस्थितियां भी माइलेज पर असर डालती हैं। नए E20-अनुकूल वाहनों को इस ब्लेंड के हिसाब से ही डिजाइन और कैलिब्रेट किया जा रहा है।
E20 पेट्रोल पर क्या कहती है सरकार की टेस्टिंग
सरकार और ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने E20 को लेकर कई परीक्षण किए हैं। इन परीक्षणों में वाहनों की ड्राइविंग परफॉर्मेंस, इंजन ड्यूरेबिलिटी, फ्यूल एफिशिएंसी और दूसरे तकनीकी पहलुओं को देखा गया। ARAI, इंडियन ऑयल और SIAM से जुड़े परीक्षणों में पैसेंजर वाहनों को लंबे समय तक चलाकर देखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक 40,000 किलोमीटर तक पैसेंजर व्हीकल्स और 20,000 किलोमीटर तक दोपहिया वाहनों पर परीक्षण किए गए। इनमें E20 के कारण ड्राइविंग या इंजन प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर सामने नहीं आया।
यानी तय मानकों के अनुरूप E20 इस्तेमाल करने वाले वाहनों में बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने की बात को मौजूदा परीक्षणों से समर्थन नहीं मिलता।
क्या पुरानी कार और बाइक में भी E20 इस्तेमाल किया जा सकता है
यह सवाल उन करोड़ों वाहन मालिकों के लिए अहम है जिनके पास पुराने वाहन हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि 2023 से पहले बने वाहनों में भी E20 इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन सभी पुराने वाहनों की तकनीकी क्षमता एक जैसी नहीं होती। इसलिए वाहन निर्माता की ओर से दिए गए ईंधन संबंधी निर्देशों को देखना हमेशा बेहतर है। E20 के इस्तेमाल से पुराने वाहनों में बिना इंजन को नुकसान पहुंचाए माइलेज या कुछ परिस्थितियों में कंपोनेंट्स की अनुकूलता में अंतर हो सकता है।
क्या सरकार फिर E10 पेट्रोल पर लौट सकती है
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि सरकार E20 कार्यक्रम को वापस लेकर E10 पर लौटने की तैयारी कर रही है। देश में एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ाने के लिए पिछले कई वर्षों में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन तैयार की गई है।
देशभर में बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों तक अलग-अलग राज्यों और तेल कंपनियों के जरिए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में पूरे देश में दोबारा अलग-अलग ब्लेंड की सप्लाई व्यवस्था बनाना आसान या सस्ता नहीं होगा। यही वजह है कि सरकार E20 को जारी रखते हुए एथेनॉल के स्रोत में बदलाव पर ज्यादा ध्यान दे सकती है।
अब आगे क्या बदलेगा और इसका आम आदमी पर क्या असर होगा
एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर सरकार गन्ने से एथेनॉल बनाने पर रोक या सीमा लगाती है तो इसका सबसे बड़ा बदलाव एथेनॉल के कच्चे माल में दिखाई देगा। पेट्रोल में एथेनॉल का अनुपात 20 फीसदी रखने की कोशिश जारी रह सकती है। इसमें गन्ने से बने एथेनॉल की जगह मक्का और चावल से बने एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। यानी पेट्रोल पंप पर मिलने वाला E20 पहले की तरह ही E20 रहेगा। उसमें एथेनॉल किस फसल से बना है, यह वाहन चलाते समय अलग से महसूस नहीं किया जा सकता। उल्टा मौजूदा समय में असली चुनौती सरकार के लिए चीनी की कीमत, खाद्य जरूरतों और एथेनॉल की मांग के बीच संतुलन बनाने की होगी।