Pan Masala Packaging Rules: अब पान मसाला की बदलेगी पैकिंग, प्लास्टिक पाउच पर lरोक

Pan Masala Packaging Rules: FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नए नियम लागू किए हैं। अब प्लास्टिक, PVC, लैमिनेट और मेटलाइज्ड पैकेजिंग पर रोक होगी।

Update:2026-08-12 12:57 IST

Pan Masala Packaging Rules: Plastic Pouches Banned

Pan Masala Packaging Rules: बाजार में पान की दुकान पर चमचमाते हुए रंग-बिरंगे पान मसालों के पाउच अब जल्द ही अपनी बदली हुई रंगत के साथ नजर आएंगे। पान मसाला के तलबगारों को जल्द ही इसकी पैकेजिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत पान मसाला को कुछ खास तरह की प्लास्टिक पैकेजिंग में पैक करने पर रोक लगा दी गई है। नए नियमों के बाद कंपनियों को पैकेजिंग के लिए वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल करना होगा।

FSSAI ने इस संबंध में 7 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी की है। इसके जरिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में संशोधन किया गया है। नए प्रावधानों का सीधा असर उन छोटे-बड़े पाउच पर पड़ सकता है, जिनमें बाजार में पान मसाला बेचा जाता है।

किन चीजों में नहीं पैक किया जा सकेगा पान मसाला?

संशोधित नियमों के मुताबिक पान मसाला की पैकेजिंग में पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएस्टर, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC), सिंथेटिक पॉलिमर, कोपॉलिमर और लैमिनेट जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा पैकेजिंग में एल्युमीनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। इसका मतलब है कि पान मसाला के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे मल्टी-लेयर प्लास्टिक पाउच को अब नए पैकेजिंग मानकों के अनुरूप बदलना होगा। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि पान मसाला का बड़ा हिस्सा छोटे सैशे या पाउच में बाजार में पहुंचता है। ऐसे में नई व्यवस्था का असर निर्माताओं से लेकर पैकेजिंग कंपनियों और सप्लाई चेन तक देखने को मिल सकता है।

अब किन चीजों से होगी पैकेजिंग?

नए नियमों में पान मसाला की पैकेजिंग के लिए कागज, पेपरबोर्ड, सेल्युलोज और अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

इसके अलावा निर्माता टिन और कांच के कंटेनर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी कंपनियों के पास प्लास्टिक पैकेजिंग की जगह कई वैकल्पिक विकल्प मौजूद होंगे। इन सामग्रियों का इस्तेमाल करते समय खाद्य सुरक्षा और पैकेजिंग से जुड़े अन्य निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी होगा। पैकेजिंग ऐसी होनी चाहिए जिससे उत्पाद दूषित न हो और उसकी गुणवत्ता भी बनी रहे।

प्लास्टिक कचरे को कम करने की कोशिश

FSSAI का यह फैसला सिर्फ पैकेजिंग में बदलाव तक सीमित नहीं है। इसका संबंध प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन से भी है। संशोधन में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के नियम 4 के उप-नियम 1 के खंड (F) और (I) के प्रावधानों को भी पान मसाला पैकेजिंग पर लागू किया गया है।

पान मसाला और इसी तरह के उत्पादों के छोटे पाउच बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने के कारण इनके कचरे को लेकर लंबे समय से पर्यावरण संबंधी चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग को सीमित करने का यह कदम कचरा प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कंपनियों पर बढ़ सकता है पैकेजिंग का खर्च

पैकेजिंग सामग्री में बदलाव का असर सिर्फ पैकेट के डिजाइन पर नहीं पड़ेगा। कंपनियों को नई पैकेजिंग सामग्री, मशीनरी, स्टोरेज और परिवहन व्यवस्था में भी बदलाव करना पड़ सकता है। टिन या कांच जैसे विकल्प प्लास्टिक पाउच की तुलना में भारी हो सकते हैं। ऐसे में उत्पादन, भंडारण और परिवहन लागत बढ़ने की संभावना है। वहीं प्राकृतिक सामग्री से बनी पैकेजिंग के बड़े स्तर पर इस्तेमाल के लिए कंपनियों को अपनी मौजूदा पैकेजिंग प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है।

हितधारकों से सुझाव लेने के बाद हुआ बदलाव

FSSAI ने यह संशोधन सीधे तौर पर लागू करने से पहले संबंधित हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद पैकेजिंग नियमों में बदलाव किया गया है। अब पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था को संशोधित नियमों के अनुरूप करना होगा। आने वाले समय में बाजार में पान मसाला के पैकेट और कंटेनर का स्वरूप बदलता हुआ दिखाई दे सकता है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन पारंपरिक छोटे प्लास्टिक पाउच पर पड़ने वाला है। जिनका इस्तेमाल पान मसाला की बिक्री में बड़े पैमाने पर होता है। नए नियम लागू होने के साथ कंपनियों के सामने सुरक्षित, टिकाऊ, लागत प्रभावी और नए FSSAI मानकों के अनुरूप पैकेजिंग की बड़ी चुनौती खड़ी होने जा रही है।

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