Women Entrepreneurs on GeM: सरकारी बाजार में महिलाओं की धाक! GeM पर 2.17 लाख महिला उद्यमी, 5.6% पहुंची हिस्सेदारी

Women Entrepreneurs on GeM: GeM पर 2.17 लाख से अधिक महिला उद्यमी पंजीकृत हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में महिला संचालित MSE को ₹28 हजार करोड़ से अधिक के सरकारी ऑर्डर मिले, जबकि खरीद हिस्सेदारी 5.6% पहुंची।

Update:2026-08-14 00:36 IST

Women Entrepreneurs on GeM (Image Credit-Social Media)

नई दिल्ली। सरकारी खरीद कभी बड़े कारोबारियों और उन कंपनियों का क्षेत्र मानी जाती थी जिनके पास सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने, निविदाओं की जटिल प्रक्रिया समझने और अलग-अलग विभागों तक पहुंच बनाने के संसाधन हों। लेकिन दस वर्ष पुराने सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव का सबसे उल्लेखनीय परिणाम महिला उद्यमियों की भागीदारी में दिखाई दे रहा है। 30 जुलाई 2026 तक GeM पर 2,17,155 महिला उद्यमी पंजीकृत थीं, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में महिला संचालित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 13.7 लाख ऑर्डर और ₹28,000 करोड़ से अधिक मूल्य के सरकारी ठेके मिले। एक वर्ष में महिला उद्यमों को मिले कारोबार में 27.6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति के तहत केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से की जाने वाली खरीद में महिला स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए निर्धारित लक्ष्य 3 प्रतिशत है। GeM के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में महिला उद्यमों की हिस्सेदारी 5.6 प्रतिशत तक पहुंच गई, यानी निर्धारित लक्ष्य से लगभग दोगुनी। इस अर्थ में ₹28 हजार करोड़ केवल कारोबार का आंकड़ा नहीं है; यह इस बात का संकेत है कि महिला उद्यमी छोटे स्थानीय बाजार से निकलकर केंद्र और राज्य सरकारों के विशाल सार्वजनिक खरीद बाजार में प्रवेश कर रही हैं।

पहले एक जरूरी सुधार—₹28 हजार करोड़ दस साल की कुल खरीद नहीं

मूल खबर में यह अर्थ निकलता है कि GeM की स्थापना से अब तक महिला उद्यमियों से ₹28 हजार करोड़ की खरीद हुई है। सरकारी दस्तावेज इससे अलग बात कहते हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अप्रैल और अगस्त 2026 के आधिकारिक विवरण के अनुसार ₹28 हजार करोड़ से अधिक का आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 में महिला संचालित MSE को दिए गए ठेकों का है। यह GeM की स्थापना से अब तक का संचयी आंकड़ा नहीं बताया गया है।

यानी महिला उद्यमों का वास्तविक कुल दस वर्षीय कारोबार इससे कहीं अधिक हो सकता है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े से उसकी निश्चित संख्या निकालना उचित नहीं होगा।यह तथ्य इस उपलब्धि को छोटा नहीं बल्कि और बड़ा बनाता है—एक ही वित्त वर्ष में ₹28 हजार करोड़ से अधिक की सरकारी खरीद महिला संचालित छोटे उद्यमों से हुई।

2.17 लाख महिला उद्यमी—लेकिन केवल संख्या नहीं, बाजार तक सीधी पहुंच महत्वपूर्ण

30 जुलाई 2026 तक GeM के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में 2,17,155 महिला उद्यमी इस मंच पर पंजीकृत थीं। इनमें कर्नाटक की 10,896 और अकेले बेंगलुरु की 3,052 महिला उद्यमी शामिल थीं। इसी समय पूरे देश में GeM से जुड़े MSME की संख्या 11,75,001 थी।

GeM का महत्व इस बात में है कि कोई छोटा उद्यमी अब केवल अपने जिले या राज्य में ग्राहक तलाशने तक सीमित नहीं रहता। यदि उसका उत्पाद और पात्रता GeM के मानकों को पूरा करते हैं तो दिल्ली का मंत्रालय, किसी दूसरे राज्य का विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, विश्वविद्यालय या अन्य सरकारी संस्था उसका खरीदार बन सकती है।यानी एक छोटे शहर की महिला द्वारा संचालित इकाई के सामने संभावित ग्राहक का दायरा स्थानीय बाजार से निकलकर पूरे देश की सरकारी व्यवस्था तक पहुंच जाता है।

‘वुमनिया’ ने महिला कारोबारियों के लिए अलग दरवाजा खोला

महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए GeM ने जनवरी 2019 में ‘Womaniya’ पहल शुरू की थी। इसका उद्देश्य महिला उद्यमियों और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए उत्पादों को सरकारी खरीदारों के सामने विशेष रूप से प्रदर्शित करना और उन्हें सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में प्रवेश दिलाना था। इसमें हस्तशिल्प, हथकरघा, जूट, कॉयर, गृह सज्जा, कार्यालय उपयोग की वस्तुओं सहित अनेक उत्पादों को स्थान मिला।

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ बिचौलिये की निर्भरता कम होना है। उत्पाद सूचीबद्ध करने से लेकर बोली, ऑर्डर, स्वीकृति, बिल और भुगतान तक की प्रक्रिया डिजिटल हो सकती है। सरकारी दावे के अनुसार इससे महिला उद्यमियों और छोटे कारोबारियों के लिए सरकारी खरीद प्रक्रिया अधिक मानकीकृत और सुलभ हुई है।

2016 में शुरू हुआ GeM, दस साल में ₹20 लाख करोड़ पार

Government e-Marketplace की शुरुआत 9 अगस्त 2016 को हुई थी। इसका उद्देश्य सरकारी खरीद की उस पुरानी व्यवस्था को डिजिटल मंच पर लाना था जिसमें कागजी निविदाएं, अलग-अलग विभागीय नियम और अनेक स्तरों की प्रक्रिया शामिल थी। आज केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त संस्थाओं, स्थानीय निकायों, पंचायतों और सहकारी संस्थाओं तक को इस मंच से खरीद की सुविधा उपलब्ध है।

दसवीं वर्षगांठ तक GeM पर 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार संस्थाएं और करीब 25 लाख विक्रेता तथा सेवा प्रदाता जुड़े थे। स्थापना से 6 अगस्त 2026 तक मंच पर वस्तुओं और सेवाओं की संचयी खरीद ₹20 लाख करोड़ से अधिक पहुंच चुकी थी। इसके दायरे का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां 10,660 से ज्यादा उत्पाद श्रेणियां और करीब 350 सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं। चिकित्सा उपकरण और कंप्यूटर से लेकर वाहन, फर्नीचर, अग्निशमन उपकरण, परिवहन, कैटरिंग और मानव संसाधन सेवाएं तक सरकारी संस्थाएं इस मंच से खरीद सकती हैं।

पांच साल में सरकारी खरीद की रफ्तार कितनी बढ़ी

GeM के माध्यम से खरीद की गति तेजी से बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में कुल ऑर्डर मूल्य करीब ₹1.07 लाख करोड़ था। 2022-23 में यह ₹2.01 लाख करोड़, 2023-24 में ₹4.04 लाख करोड़ और 2024-25 में ₹5.42 लाख करोड़ तक पहुंच गया। 2025-26 में कुल ऑर्डर मूल्य करीब ₹5.03 लाख करोड़ रहा।

इसका अर्थ है कि जो मंच अपने शुरुआती वर्षों में सीमित सरकारी खरीद का माध्यम था, वह अब हर साल पांच लाख करोड़ रुपये के आसपास की सार्वजनिक खरीद संभालने की क्षमता तक पहुंच गया है।यही विशाल बाजार महिला उद्यमियों, छोटे उद्योगों और स्टार्टअप के लिए नई संभावना पैदा करता है।

MSME की हिस्सेदारी तो और बड़ी—₹2.37 लाख करोड़

महिला उद्यमों के ₹28 हजार करोड़ से आगे देखें तो सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की पूरी तस्वीर और बड़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में GeM के जरिए कुल ₹5,02,776 करोड़ की खरीद हुई, जिसमें से ₹2,37,235 करोड़ की खरीद MSME से की गई। यानी कुल सरकारी खरीद का करीब 47.2 प्रतिशत छोटे और सूक्ष्म उद्यमों के हिस्से आया।

पांच वर्ष पहले 2021-22 में MSME की GeM खरीद ₹59,033 करोड़ थी। 2025-26 में यह बढ़कर ₹2.37 लाख करोड़ हो गई। यानी चार वर्षों में मूल्य के आधार पर यह लगभग चार गुना हो गई। इससे GeM का आर्थिक महत्व समझ आता है। यह केवल सरकार को सामान खरीदने का पोर्टल नहीं है बल्कि सरकार की सालाना खरीद शक्ति को छोटे कारोबार तक पहुंचाने का माध्यम भी बन गया है।

कर्नाटक के आंकड़े सही, लेकिन ‘सबसे ज्यादा’ का दावा उपलब्ध आंकड़ों से सिद्ध नहीं

मूल खबर में कहा गया है कि देश के 11.75 लाख पंजीकृत MSME में सबसे ज्यादा 55,053 कर्नाटक के हैं। आधिकारिक संसदीय उत्तर यह जरूर पुष्टि करता है कि कर्नाटक में 55,053 और बेंगलुरु में 16,091 MSME पंजीकृत हैं। महिला उद्यमियों की संख्या भी कर्नाटक में 10,896 और बेंगलुरु में 3,052 है।

लेकिन उस आधिकारिक उत्तर में सभी राज्यों की तुलनात्मक सूची नहीं दी गई है। इसलिए केवल इसी दस्तावेज के आधार पर यह कहना कि कर्नाटक देश में ‘सबसे अधिक’ MSME वाला राज्य है, सुरक्षित नहीं होगा।सही वाक्य होगा—“कर्नाटक में 55,053 MSME GeM पर पंजीकृत हैं, जिनमें 16,091 अकेले बेंगलुरु के हैं।”

बेंगलुरु कर्नाटक के लगभग 29 प्रतिशत GeM-MSME का केंद्र

55,053 में से 16,091 MSME अकेले बेंगलुरु में हैं। इसका अर्थ है कि कर्नाटक के करीब 29.2 प्रतिशत GeM-पंजीकृत MSME बेंगलुरु में केंद्रित हैं।महिला उद्यमियों में यह अनुपात थोड़ा कम है। कर्नाटक की 10,896 महिला उद्यमियों में 3,052 बेंगलुरु की हैं, यानी करीब 28 प्रतिशत।

इसमें बेंगलुरु के तकनीकी और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका दिखाई देती है, हालांकि GeM केवल तकनीकी कंपनियों का बाजार नहीं है।

आधिकारिक PIB दस्तावेज कहता है कि Department of Military Affairs यानी सैन्य कार्य विभाग ने 6 अगस्त 2026 तक GeM पर संचयी रूप से ₹1.35 लाख करोड़ से अधिक का सकल कारोबार मूल्य पार किया। यह आंकड़ा अकेली भारतीय सेना का नहीं है।

सैन्य कार्य विभाग रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत है और सेना, नौसेना तथा वायुसेना से जुड़े मामलों से संबंधित है। इसलिए इसे सीधे “भारतीय सेना ने ₹1.35 लाख करोड़ खरीदा” लिखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। और ₹1.35 लाख करोड़, ₹20 लाख करोड़ का 14.93% भी नहीं

यहां दूसरी दिलचस्प विसंगति स्वयं सरकारी पृष्ठ पर दिखाई देती है। यदि कुल GeM खरीद ₹20 लाख करोड़ से अधिक है और सैन्य कार्य विभाग का आंकड़ा ₹1.35 लाख करोड़ है तो दोनों का सीधा अनुपात करीब 6.75 प्रतिशत बैठता है, 14.93 प्रतिशत नहीं।

लेकिन PIB के दस वर्षीय विवरण में अलग से लिखा गया है कि समग्र रक्षा खरीद ने 6 अगस्त 2026 तक GeM के संचयी सकल कारोबार मूल्य में 14.93 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। उसी के साथ सैन्य कार्य विभाग के ₹1.35 लाख करोड़ का आंकड़ा दिया गया है।

इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि ₹1.35 लाख करोड़ का आंकड़ा और 14.93 प्रतिशत का आंकड़ा एक ही आधार के आंकड़े नहीं हैं। 14.93 प्रतिशत व्यापक रक्षा खरीद से संबंधित है, जबकि ₹1.35 लाख करोड़ सैन्य कार्य विभाग के लिए अलग संख्या है।

इसलिए सुरक्षित और तथ्यात्मक प्रस्तुति होगी—

“सैन्य कार्य विभाग ने ₹1.35 लाख करोड़ से अधिक की संचयी खरीद दर्ज की है, जबकि सरकार के अनुसार समूचे रक्षा क्षेत्र की खरीद GeM के संचयी कारोबार में 14.93 प्रतिशत से अधिक रही है।”

महिलाओं के लिए 3% लक्ष्य क्यों बनाया गया था

सरकारी खरीद दुनिया भर में उद्योगों को विकसित करने का बड़ा नीतिगत हथियार है। सरकार स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदती है, अस्पतालों के लिए उपकरण, कार्यालयों के लिए स्टेशनरी और कंप्यूटर, सुरक्षा बलों के लिए अनेक वस्तुएं और सार्वजनिक संस्थानों के लिए सेवाएं।यदि इस विशाल खरीद का एक निश्चित हिस्सा छोटे और महिला संचालित उद्योगों से लिया जाए तो सरकार बिना प्रत्यक्ष अनुदान दिए उनके लिए बाजार तैयार कर सकती है।

यही कारण है कि सार्वजनिक खरीद नीति में महिला संचालित MSE के लिए 3 प्रतिशत खरीद लक्ष्य रखा गया। GeM पर 5.6 प्रतिशत तक पहुंचना बताता है कि कम से कम 2025-26 में वास्तविक खरीद निर्धारित सीमा से आगे निकली।

सरकारी खरीद मिलना छोटे उद्योग के लिए साधारण ऑर्डर क्यों नहीं

किसी छोटे उद्यम के लिए सरकारी ग्राहक मिलने का महत्व केवल ऑर्डर की रकम में नहीं है।एक बार किसी महिला उद्यम की उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति का रिकॉर्ड डिजिटल मंच पर बन जाता है तो उसके लिए बड़े ऑर्डर हासिल करना आसान हो सकता है। बैंक और वित्तीय संस्थान भी औपचारिक बिक्री रिकॉर्ड को देखकर कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में अधिक सहज हो सकते हैं।

GeM ने इसी समस्या के समाधान के लिए ‘GeM Sahay’ जैसी वित्तीय व्यवस्था भी जोड़ी है, जिसके तहत पात्र विक्रेताओं को सरकारी ऑर्डर के आधार पर बिना परंपरागत जमानत के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

सिर्फ हस्तशिल्प नहीं—महिला कारोबार का दायरा बढ़ाना अगली चुनौती

महिला उद्यमियों की सार्वजनिक खरीद में शुरुआत हस्तशिल्प, हथकरघा, जूट, घरेलू सजावट, कार्यालय सामग्री और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों जैसे क्षेत्रों से आसान होती है। लेकिन अगली चुनौती महिलाओं को उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों तक पहुंचाना है—इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, औद्योगिक उपकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य उपकरण और तकनीकी सेवाएं।

₹28 हजार करोड़ का आंकड़ा तब और महत्वपूर्ण होगा जब यह देखा जाए कि उसमें कितनी खरीद कम मूल्य वाली परंपरागत वस्तुओं से और कितनी उच्च प्रौद्योगिकी तथा औद्योगिक क्षेत्रों से आ रही है।सार्वजनिक आंकड़ों में इस क्षेत्रवार विभाजन को और स्पष्ट किया जाना चाहिए।

GeM पारदर्शी है, लेकिन डिजिटल मंच अपने आप भ्रष्टाचार खत्म नहीं करता

GeM का एक बड़ा दावा सरकारी खरीद में पारदर्शिता है। कागजी निविदा की तुलना में यहां बोली, कीमत, समय, खरीद और भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड बनता है। इससे मानवीय विवेक और बिचौलिये की भूमिका कम की जा सकती है। लेकिन डिजिटल प्रणाली अपने आप हर गड़बड़ी समाप्त नहीं करती।

11 अगस्त को राज्यसभा में दिए गए सरकारी उत्तर के अनुसार GeM अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के जरिए ऑर्डर तोड़कर देने, खरीदार-विक्रेता की संभावित मिलीभगत, असामान्य कीमत और समान डिजिटल पहचान से बोली लगाने जैसे संदिग्ध व्यवहार खोज रहा है। 2025-26 में विभिन्न उल्लंघनों के मामलों में 55,772 विक्रेताओं को निलंबित किया गया था। यानी डिजिटल खरीद के साथ डिजिटल निगरानी भी उतनी ही आवश्यक है।

महिलाओं के लिए सबसे बड़ी बाधा अब पंजीकरण नहीं, कारोबार बढ़ाना है

2.17 लाख महिला उद्यमियों का पंजीकरण उल्लेखनीय है, लेकिन केवल पोर्टल पर नाम होना आर्थिक सशक्तीकरण का पूरा पैमाना नहीं।अगला प्रश्न होना चाहिए—इनमें से कितनी महिलाओं को वास्तव में ऑर्डर मिला? औसत ऑर्डर कितना था? कितनी महिला इकाइयों ने पहली सरकारी बिक्री के बाद अपना कारोबार बढ़ाया? कितनी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं? कितनी विनिर्माण करती हैं और कितनी केवल ट्रेडिंग?GeM ने पंजीकरण का दरवाजा काफी हद तक खोल दिया है। अब असली चुनौती है पंजीकृत महिला को नियमित सरकारी सप्लायर में बदलना।

50 नए GeM सुविधा केंद्र इसी ‘डिजिटल दूरी’ को कम करने की कोशिश

हर महिला कारोबारी के पास कंप्यूटर, डिजिटल निविदा समझने वाला कर्मचारी या ऑनलाइन उत्पाद सूची बनाने की विशेषज्ञता नहीं होती। इसी समस्या को देखते हुए GeM ने जून 2026 में कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क के साथ मिलकर चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50 GeM सुविधा केंद्र शुरू करने की योजना बनाई है। यहां पंजीकरण, उत्पाद सूची, प्रशिक्षण, विक्रेता मूल्यांकन और शिकायत समाधान में मदद दी जानी है। यह कदम विशेष रूप से छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों, कारीगरों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी हो सकता है।

महिला उद्यमिता की असली परीक्षा—दिल्ली की खरीद गांव की महिला तक पहुंचे

GeM की सबसे बड़ी संभावना इसी में है कि सरकारी बाजार की भौगोलिक सीमाएं टूट जाएं। दिल्ली में मंत्रालय का खरीदार और किसी छोटे कस्बे की महिला उद्यमी एक ही मंच पर सौदा कर सकें।तकनीकी रूप से यह अब संभव है।लेकिन इसका सामाजिक प्रभाव तभी बड़ा होगा जब मंच पर मौजूद 2.17 लाख महिला उद्यमियों की संख्या कुछ महानगरों या स्थापित व्यवसायों तक सीमित न रहे बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण भारत तक विस्तार करे।

सरकारी खरीद का एक छोटा प्रतिशत भी यदि महिला संचालित कारोबारों की ओर नियमित रूप से जाता है तो उसके प्रभाव का दायरा केवल उद्यमी तक सीमित नहीं रहेगा। उससे रोजगार, बैंकिंग, औपचारिक अर्थव्यवस्था और स्थानीय उत्पादन भी बढ़ सकता है।

₹28 हजार करोड़ का असली अर्थ

GeM के दस वर्षों की सबसे बड़ी कहानी केवल यह नहीं है कि उसने ₹20 लाख करोड़ की खरीद का मंच तैयार कर दिया। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि इस विशाल सरकारी बाजार में ऐसे कारोबारियों के लिए जगह बनी जो पुरानी निविदा व्यवस्था में प्रवेश ही नहीं कर पाते थे। 2025-26 में MSME को ₹2.37 लाख करोड़, महिला संचालित MSE को ₹28 हजार करोड़ से अधिक, स्टार्टअप को ₹19 हजार करोड़ से अधिक और अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमों को ₹6 हजार करोड़ से अधिक की खरीद इसी बदलाव की अलग-अलग तस्वीरें हैं।

महिला उद्यमियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा शायद ₹28 हजार करोड़ भी नहीं है। अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उनकी हिस्सेदारी निर्धारित 3 प्रतिशत लक्ष्य से बढ़कर 5.6 प्रतिशत पहुंच गई। इसका अर्थ है कि आरक्षित अवसर केवल कागज पर नहीं रहा, महिलाएं उस सीमा से आगे जाकर सरकारी बाजार में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। अब अगला लक्ष्य पंजीकरण की संख्या बढ़ाना भर नहीं बल्कि ऐसी स्थिति बनाना होना चाहिए जहां किसी गांव या छोटे शहर में शुरू हुई महिला की इकाई के लिए भारत सरकार भी उतनी ही सहज ग्राहक हो जितना उसके पड़ोस का स्थानीय बाजार।

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