India Global Ranking Crash 2026: दुनिया की टॉप-100 कंपनियों से बाहर हुआ भारत! रिलायंस-TCS समेत दिग्गजों की रैंकिंग धड़ाम

India Out of Top 100 Companies Ranking Crash 2026: दुनिया की टॉप-100 कंपनियों से बाहर भारत, रिलायंस-TCS को बड़ा झटका

Update:2026-05-20 15:02 IST

India Out of Top 100 Companies Ranking Crash 2026 Global Market Cap 

India Out of Top 100 Companies Ranking Crash 2026: भारतीय शेयर बाजार कभी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में गिना जाता था। विदेशी निवेशकों से लेकर घरेलू निवेशकों तक, हर किसी की नजर भारत की विकास कहानी पर टिकी रहती थी। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है। लगातार गिरते शेयर बाजार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक दबावों ने भारत को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी कुछ साल पहले तक कल्पना करना भी मुश्किल था। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर दुनिया की टॉप 100 कंपनियों की सूची में एक भी भारतीय कंपनी नहीं बची है। कभी इस सूची में मजबूती से मौजूद रहने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस जैसी कंपनियां अब काफी नीचे खिसक चुकी हैं। यह केवल कंपनियों की रैंकिंग में गिरावट नहीं, बल्कि भारतीय बाजार के कमजोर होते वैश्विक प्रभाव का संकेत भी माना जा रहा है।

रिलायंस से लेकर TCS तक क्यों टूटा भारतीय कंपनियों का दबदबा?

कुछ समय पहले तक रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे मजबूत और प्रभावशाली कंपनी मानी जाती थी। साल 2025 की शुरुआत में कंपनी दुनिया की 57वीं सबसे मूल्यवान कंपनी थी। इसके बाद भी रिलायंस ने अपनी स्थिति काफी समय तक संभालकर रखी, लेकिन अब यह फिसलकर 106वें स्थान पर पहुंच गई है। इसी तरह एचडीएफसी बैंक, जो कभी दुनिया के सबसे बड़े निजी बैंकों में गिना जाता था, अब 97वें स्थान से गिरकर 190वें नंबर पर पहुंच चुका है। भारती एयरटेल भी इस गिरावट से बच नहीं पाई। टेलीकॉम सेक्टर की इस बड़ी कंपनी की वैश्विक रैंकिंग 164 से गिरकर 202 पर पहुंच गई है। बैंकिंग सेक्टर की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। आईसीआईसीआई बैंक 274वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई 276वें नंबर पर खिसक गया है। यह गिरावट दिखाती है कि भारतीय वित्तीय कंपनियों पर वैश्विक निवेशकों का भरोसा पहले की तुलना में कमजोर हुआ है।

आईटी सेक्टर में आई सबसे बड़ी गिरावट ने बढ़ाई चिंता

भारतीय शेयर बाजार में सबसे ज्यादा नुकसान आईटी कंपनियों को हुआ है। एक समय भारत की आईटी इंडस्ट्री को दुनिया की डिजिटल ताकत माना जाता था, लेकिन अब यही सेक्टर भारी दबाव में दिखाई दे रहा है। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस, जो साल 2025 की शुरुआत में दुनिया की 84वीं सबसे मूल्यवान कंपनी थी, अब सीधे 314वें स्थान पर पहुंच गई है। यह गिरावट भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

इन्फोसिस की स्थिति भी कमजोर हुई है। कंपनी की रैंकिंग 198 से गिरकर 590 तक पहुंच गई है। वहीं आईटीसी जैसी मजबूत मानी जाने वाली कंपनी भी 296 से फिसलकर 702वें स्थान पर पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर AI और नई टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों में निवेश तेजी से बढ़ा है, जबकि भारतीय आईटी कंपनियां अभी भी पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर काफी हद तक निर्भर हैं। यही वजह है कि निवेशकों का रुझान अमेरिकी टेक कंपनियों की ओर ज्यादा बढ़ गया है।

100 अरब डॉलर क्लब भी सिमटा, कई दिग्गज हुए बाहर

कुछ साल पहले तक भारत की कई कंपनियां 100 अरब डॉलर यानी लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मार्केट कैप वाली कंपनियों में शामिल थीं। लेकिन बाजार में आई कमजोरी ने इस क्लब को भी छोटा कर दिया है। अब केवल तीन भारतीय कंपनियां ही इस क्लब में बची हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप लगभग 198 अरब डॉलर है, जबकि एचडीएफसी बैंक करीब 124 अरब डॉलर और भारती एयरटेल लगभग 113 अरब डॉलर के मार्केट कैप के साथ इस सूची में मौजूद हैं। टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई जैसी कंपनियां अब इस सूची से बाहर हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, दुनिया की टॉप 500 कंपनियों में भारत की मौजूदगी भी लगातार घट रही है। साल 2025 की शुरुआत में जहां भारत की 15 कंपनियां इस सूची में थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 9 रह गई है।

मिडिल ईस्ट संकट बना भारतीय बाजार में मुश्किलों की बड़ी वजह

भारतीय बाजार में जारी गिरावट के पीछे वैश्विक तनाव भी बड़ी वजह माना जा रहा है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है।

भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई, व्यापार घाटे और सरकारी वित्तीय स्थिति पर पड़ता है। तेल की बढ़ती कीमतें कंपनियों की लागत बढ़ाती हैं, जिससे उनका मुनाफा घटता है और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ जाता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में बढ़ा दबाव

पिछले कई महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। जब वैश्विक निवेशकों को अमेरिका जैसे देशों में सुरक्षित और बेहतर रिटर्न मिलने लगता है, तो वे उभरते बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। यही इस समय भारत के साथ हो रहा है। अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड यील्ड 4.6 प्रतिशत और 30 साल के बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुके हैं। बिना जोखिम के इतना मजबूत रिटर्न मिलने पर निवेशक भारतीय बाजार में जोखिम उठाने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दे रहा है।

वैश्विक ब्रोकरेज कंपनियों के डाउनग्रेड ने बिगाड़ी धारणा

यूबीएस, मॉर्गन स्टेनली, नोमुरा, जेपी मॉर्गन, एचएसबीसी, गोल्डमैन सैक्स और सिटी जैसी बड़ी वैश्विक ब्रोकरेज कंपनियों ने भारतीय बाजार को लेकर अपना नजरिया कमजोर किया है। इन संस्थानों का मानना है कि भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अभी भी काफी महंगा है, जबकि कंपनियों की कमाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही। जब बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां डाउनग्रेड करती हैं, तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है। यही वजह है कि बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है।

AI और टेक्नोलॉजी सेक्टर में पिछड़ना भी बना बड़ी वजह

दुनिया के शेयर बाजारों में इस समय सबसे बड़ा आकर्षण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI बना हुआ है। अमेरिका की टेक कंपनियां AI की वजह से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं। भारत में अभी तक ऐसा कोई बड़ा AI दिग्गज सामने नहीं आया है, जो वैश्विक निवेशकों को उसी स्तर पर आकर्षित कर सके। भारतीय बाजार अभी भी बैंकिंग, पारंपरिक आईटी, ऊर्जा और उपभोक्ता कंपनियों पर ज्यादा निर्भर है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत को वैश्विक निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतना है, तो उसे AI, सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

अमेरिकी टेक कंपनियों का दुनिया पर लगातार बढ़ रहा दबदबा

जहां भारतीय कंपनियां वैश्विक सूची से बाहर हो रही हैं, वहीं अमेरिकी टेक कंपनियां लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। AI चिप बनाने वाली NVIDIA करीब 5.33 ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। इसके बाद Alphabet लगभग 4.7 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। Apple करीब 4.3 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे नंबर पर मौजूद है। वहीं Microsoft और Amazon भी दुनिया की टॉप-5 कंपनियों में शामिल हैं। इन कंपनियों की तेजी ने पूरी दुनिया के निवेशकों का ध्यान अमेरिकी टेक सेक्टर की ओर खींच लिया है। यही वजह है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे होती दिखाई दे रही हैं।

क्या भारतीय शेयर बाजार फिर कर पाएगा वापसी?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। देश की जीडीपी ग्रोथ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर है और घरेलू खपत भी मजबूत बनी हुई है। हालांकि बाजार में वापसी के लिए कुछ बड़ी चुनौतियों से पार पाना जरूरी होगा। तेल की कीमतों में स्थिरता, विदेशी निवेश की वापसी, कंपनियों की बेहतर कमाई और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए अवसर भारत के लिए बेहद अहम होंगे। अगर सरकार AI, सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों पर तेजी से काम करती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियां फिर से दुनिया की टॉप कंपनियों में अपनी जगह बना सकती हैं। फिलहाल, बाजार की यह गिरावट भारत के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत जरूर मानी जा रही है। इससे साफ हो गया है कि केवल तेज आर्थिक विकास ही काफी नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए टेक्नोलॉजी, निवेशकों का भरोसा और मजबूत कॉरपोरेट प्रदर्शन भी उतना ही जरूरी हो चुका है।

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