Chhattisgarh News: सावधान पशुपालक! बरसात में ये 2 बीमारियां ले सकती हैं मवेशियों की जान, तुरंत कराएं टीकाकरण
Chhattisgarh News: बरसात के मौसम में मवेशियों में गलघोंटू और एकटांगिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बिलासपुर में पशु चिकित्सा विभाग ने टीकाकरण अभियान शुरू किया है। जानिए बीमारी से बचाव के उपाय।
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Chhattisgarh News: बरसात का मौसम शुरू होते ही सिर्फ इंसानों की ही नहीं, बल्कि मवेशियों की सेहत पर भी खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में कई संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं, जिनका समय पर इलाज और बचाव नहीं किया जाए तो पशुओं की जान तक जा सकती है। खासतौर पर बड़े मवेशियों में गलघोंटू (HS) और एकटांगिया (BQ) जैसी जीवाणुजनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इसी वजह से पशु चिकित्सा विभाग (Veterinary Department) ने बिलासपुर (Bilaspur) जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है, ताकि समय रहते पशुओं को इन खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
बरसात में क्यों बढ़ जाता है बीमारी का खतरा?
बिलासपुर (Bilaspur) जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ. राम ओत्तलवार (Dr. Ram Ottalwar) के अनुसार, गलघोंटू (HS) और एकटांगिया (BQ) दोनों ही जीवाणुजनित बीमारियां हैं और बरसात के मौसम में इनका खतरा सबसे अधिक रहता है। चार महीने से लेकर दो से चार साल तक की उम्र के पशु इन बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। खास बात यह है कि केवल कमजोर ही नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट दिखने वाले पशु भी इन बीमारियों से संक्रमित हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि अगर समय पर बचाव और इलाज नहीं किया गया तो बीमारी बहुत तेजी से फैल सकती है और गंभीर स्थिति में पशु की मौत भी हो सकती है। इसलिए बरसात के मौसम में पशुपालकों को पहले से सतर्क रहने की जरूरत है।
गलघोंटू बीमारी कैसे फैलती है?
डॉ. राम ओत्तलवार (Dr. Ram Ottalwar) के अनुसार, गलघोंटू (HS) बीमारी मुख्य रूप से सांस के माध्यम से फैल सकती है। यदि किसी पशु को यह संक्रमण हो जाता है तो वह दूसरे पशुओं तक भी बीमारी पहुंचा सकता है। ऐसे में संक्रमित पशु को तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि संक्रमण पूरे झुंड में न फैल सके।
पशु चिकित्सकों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही पूरे पशुधन के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इसलिए बीमारी के शुरुआती संकेत मिलते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
मृत पशु के शव से भी फैल सकता है संक्रमण
पशु चिकित्सकों ने एक और महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। उनके अनुसार कई बार संक्रमित पशु की अचानक मौत हो जाती है और उसका शव खुले मैदान या घास वाले स्थान पर छोड़ दिया जाता है। ऐसी स्थिति में बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया (Bacteria) आसपास की मिट्टी और घास में फैल जाते हैं।
इसके बाद जब दूसरे पशु उसी स्थान की घास खाते हैं तो उनके संक्रमित होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए किसी भी संक्रमित पशु के शव का सही और सुरक्षित तरीके से निपटारा करना बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी आगे न फैले।
टीकाकरण ही सबसे बड़ा बचाव
पशु चिकित्सा विभाग (Veterinary Department) का कहना है कि इन बीमारियों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण (Vaccination) कराना है। इसी उद्देश्य से बिलासपुर (Bilaspur) जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।
पशुपालकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा केंद्र में जाकर अपने मवेशियों का टीकाकरण जरूर कराएं। समय पर लगाया गया टीका पशुओं को इन गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संक्रमित पशु को तुरंत करें अलग
यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए। संक्रमित पशु को क्वारंटीन (Quarantine) में रखकर पशु चिकित्सक की देखरेख में उसका उपचार कराना चाहिए। इससे संक्रमण को दूसरे पशुओं तक फैलने से रोका जा सकता है।
बरसात के मौसम में हरे चारे और घास को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि घास किसी संक्रमित क्षेत्र की है तो उसे खाने से बीमारी दूसरे पशुओं में भी फैल सकती है। इसलिए पशुपालकों को इस मौसम में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहिए। समय पर टीकाकरण, संक्रमित पशुओं को अलग रखना और पशु चिकित्सक की सलाह का पालन करना ही मवेशियों को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।