PoK में बगावत, कश्मीर में अमेरिकी राजदूत! क्या बदलने वाला है पूरा खेल? भारत के पक्ष में बन रहा माहौल
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब PoK में पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष और राजनीतिक उथल-पुथल जारी है।
Sergio Gor Kashmir visit: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी POK में जारी भारी असंतोष और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरा चर्चा में है। गोर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात करेंगे।
इसके बाद वह लद्दाख भी जाएंगे। ऐसे समय में उनका कश्मीर दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक तरफ भारत के जम्मू-कश्मीर में विकास और राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ POK में आर्थिक संकट और सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है।
अमेरिकी राजदूत के दौरे का क्या मतलब?
POK में टेंशन और सर्जियो गोर का कश्मीर दौरा अपने आप में कोई आम बात नहीं है। इससे पहले भी कई अमेरिकी राजदूत जम्मू-कश्मीर का दौरा कर चुके हैं। समय के साथ अमेरिका का रुख बदला। कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने नियंत्रण रेखा का सम्मान करने की जरूरत पर जोर दिया और पाकिस्तान से अपनी सेनाएं पीछे हटाने को कहा। 2001 के बाद आतंकवाद अमेरिका की विदेश नीति का बड़ा मुद्दा बना और कश्मीर को लेकर भी उसका नजरिया सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर और ज्यादा स्पष्ट हुआ।
क्या अमेरिकी राजदूत का दौरा POK के लिए कोई संदेश है?
दौरे की टाइमिंग निश्चित तौर पर बेहद अहम है। एक तरफ भारत के जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार काम कर रही है, जबकि दूसरी ओर POK में जनता आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर सड़कों पर है।
ऐसे माहौल में अमेरिकी राजदूत का श्रीनगर जाना पाकिस्तान के लिए राजनीतिक रूप से असहज जरूर हो सकता है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका POK को भारत का हिस्सा मानने की दिशा में कोई नया कदम तो नहीं उठा रहा है?
क्या जल्द भारत में शामिल होगा POK?
भारत का आधिकारिक रुख हमेशा से यह रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और POK पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है। दूसरी तरफ POK में बढ़ता जन असंतोष पाकिस्तान के लिए जरूर एक गंभीर चुनौती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि POK का घर वापसी ये बिल्कुल सही समय है, क्योंकि वहां की आवाम भी इसका विरोध नहीं करेगी। वजह साफ है कि वे भी पाकिस्तान के चंगुल मुक्त होना चाहते हैं।
लेकिन किसी क्षेत्र का भारत में विलय केवल वहां के विरोध प्रदर्शनों या किसी विदेशी राजदूत के दौरे से नहीं होता। इसके लिए बड़े राजनीतिक, कूटनीतिक और सुरक्षा स्तर के घटनाक्रम जरूरी होंगे। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई संकेत सामने नहीं है कि भारत ने POK को लेकर तत्काल किसी सैन्य या राजनीतिक कार्रवाई का फैसला किया है।
POK में क्यों मचा है बवाल?
POK में लंबे समय से महंगाई, बेरोजगारी, बिजली-पानी की समस्या और आर्थिक बदहाली को लेकर लोगों में नाराजगी है। हाल के दिनों में यह असंतोष बड़े विरोध प्रदर्शनों में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इन प्रदर्शनों को केवल स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि पाकिस्तान की सत्ता और सेना के प्रति बढ़ते असंतोष से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में बदली तस्वीर
भारत के जम्मू-कश्मीर में 2019 के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े बदलाव हुए हैं। केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को पुनर्गठित किया और इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया। इसके बाद सड़क, रेल, पर्यटन, स्वास्थ्य और दूसरे क्षेत्रों में कई परियोजनाओं पर काम हुआ है। घाटी में पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिली है। हालांकि जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस अभी भी जारी है, लेकिन विकास के मोर्चे पर केंद्र सरकार लगातार अपनी उपलब्धियां गिनाती रही है।