Men vs Women: लू और उमस में कौन ज्यादा मजबूत...पुरुष या महिलाएं? डॉक्टर ने बताया सच

Men vs Women Heat Tolerance: पसीना, हार्मोन और बॉडी सिस्टम में फर्क से कैसे बदलती है गर्मी सहने की क्षमता, जानिए डॉक्टर की राय

Update:2026-05-23 11:54 IST

Men vs Women Better Heat Tolerance

Men vs Women Heat Tolerance: मौजूदा समय में प्रचंड धूप और चिलचिलाती गर्मी के कहर से आम जनजीवन बुरी तरह आहत है। हर कोई स्वस्थ पर पड़ने वाले इस मौसम की मार से बचाव के तरीके अपना रहा है। गर्मी, उमस और अचानक बदलते मौसम का असर सिर्फ हमारे दिनचर्या पर नहीं बल्कि शरीर की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर भी पड़ता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, हीट स्ट्रेस और लू से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या पुरुष और महिलाएं गर्मी और मौसम के बदलाव को अलग-अलग तरीके से झेलते हैं? विज्ञान और मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार इसका जवाब हां है। शरीर की संरचना, हार्मोन, पसीने की प्रक्रिया और मेटाबॉलिज्म में अंतर के कारण पुरुष और महिलाएं गर्मी को अलग तरह से महसूस करते हैं और उससे निपटते हैं।

इस विषय पर फिजिशियन डॉ. विष्णु देव का कहना है कि 'शरीर की गर्मी सहने की क्षमता केवल जेंडर पर निर्भर नहीं करती, लेकिन जैविक अंतर निश्चित रूप से प्रतिक्रिया के तरीके को बदल देते हैं।'

पुरुषों में जल्दी क्यों आता है पसीना?

डॉक्टरों के अनुसार पुरुषों में मांसपेशियों का द्रव्यमान अधिक होता है। मांसपेशियां शरीर में लगातार ऊर्जा और गर्मी पैदा करती रहती हैं, यहां तक कि आराम की स्थिति में भी। यही वजह है कि पुरुषों का शरीर अंदरूनी रूप से ज्यादा हीट जनरेट करता है। डॉ. विष्णु देव बताते हैं, 'पुरुषों में पसीना जल्दी और ज्यादा आता है, जो शरीर को तेजी से ठंडा करने में मदद करता है। यह एक प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम है।' गर्म और सूखे मौसम में यह पसीना जल्दी भाप बनकर उड़ जाता है, जिससे शरीर का तापमान जल्दी नियंत्रित हो जाता है। लेकिन अधिक पसीने के कारण शरीर में पानी और नमक की कमी भी तेजी से हो सकती है, जिससे कमजोरी और थकान का खतरा बढ़ जाता है।

महिलाओं का शरीर कैसे करता है एडजस्ट?

महिलाओं के शरीर में फैट प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक और मांसपेशियों की मात्रा कम होती है। इसी वजह से उनका रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट भी पुरुषों की तुलना में थोड़ा कम होता है। इसका अर्थ है कि उनका शरीर कम आंतरिक गर्मी पैदा करता है। डॉक्टरों का मानना है कि यही वजह है कि महिलाओं को कई बार अत्यधिक पसीना नहीं आता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे गर्मी को सहन नहीं कर पातीं। डॉ. विष्णु देव कहते हैं, 'महिलाओं का शरीर पानी की बचत करते हुए तापमान को संतुलित करने की कोशिश करता है। खासकर नमी वाले मौसम में यह प्रक्रिया काफी प्रभावी हो सकती है।' उमस भरे वातावरण में जब पसीना सूखना मुश्किल होता है, तब कम पसीना आना भी शरीर के लिए एक तरह की ऊर्जा संरक्षण रणनीति हो सकती है।

क्या महिलाओं में मौसम सहने की क्षमता ज्यादा होती है?

यह सवाल अक्सर चर्चा में रहता है कि क्या महिलाएं मौसम के बदलाव को पुरुषों से बेहतर झेलती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका कोई सीधा और एकतरफा जवाब नहीं है। महिलाओं का शरीर हार्मोनल बदलावों से गुजरता रहता है, जैसे मासिक धर्म, गर्भावस्था और मेनोपॉज। इन स्थितियों में शरीर का तापमान और ऊर्जा स्तर लगातार बदलता रहता है।

डॉ. विष्णु देव के अनुसार, 'महिलाओं का शरीर हार्मोनल बदलावों के कारण मौसम के उतार-चढ़ाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकता है, लेकिन यही बदलाव उन्हें अनुकूलन की क्षमता भी देता है।'

ओव्यूलेशन के बाद शरीर का बेसल टेम्परेचर थोड़ा बढ़ जाता है, जिससे गर्म मौसम में असहजता महसूस हो सकती है।

हार्मोन का बड़ा प्रभाव

हार्मोन शरीर के तापमान नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन शरीर की गर्मी महसूस करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। वहीं पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन मांसपेशियों के विकास और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे शरीर अधिक गर्मी उत्पन्न करता है।

डॉक्टरों का कहना है कि यही हार्मोनल अंतर दोनों के शरीर की गर्मी सहने की प्रक्रिया को अलग बनाता है।

उम्र, फिटनेस और लाइफस्टाइल भी जरूरी

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल जेंडर ही नहीं, बल्कि उम्र और जीवनशैली भी गर्मी सहने की क्षमता को प्रभावित करती है। जो लोग नियमित व्यायाम करते हैं, उनका शरीर तापमान में बदलाव के प्रति ज्यादा अनुकूल हो जाता है।

डॉ. विष्णु देव कहते हैं, 'अच्छी हाइड्रेशन, संतुलित आहार और फिटनेस गर्मी से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।'

बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं हीट स्ट्रेस के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं, इसलिए उन्हें विशेष सावधानी की जरूरत होती है।

लू और बढ़ती गर्मी में सावधानी जरूरी

भारत जैसे देशों में जहां गर्मी और लू का असर ज्यादा होता है, वहां शरीर की गर्मी सहने की क्षमता को समझना और भी जरूरी हो जाता है। ज्यादा समय धूप में रहना, पानी की कमी और गलत खानपान हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्मियों में पर्याप्त पानी पीना, हल्का भोजन लेना और धूप से बचना सबसे जरूरी है।

शरीर अलग, लेकिन संतुलन समान

वैज्ञानिक और मेडिकल दोनों दृष्टिकोणों से यह स्पष्ट है कि पुरुष और महिलाएं गर्मी को अलग-अलग तरीके से महसूस करते हैं। पुरुषों में तेज पसीना और तेजी से ठंडा होने की प्रक्रिया होती है, जबकि महिलाओं का शरीर कम ऊर्जा खर्च करके संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। डॉ. विष्णु देव के अनुसार, 'कोई भी शरीर पूरी तरह बेहतर या कमजोर नहीं होता, बस दोनों की कार्यप्रणाली अलग होती है। सही देखभाल और जीवनशैली के साथ हर कोई मौसम के बदलाव को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।' यानी गर्मी सहने की क्षमता में अंतर जेंडर के अनुरूप नहीं बल्कि शरीर की जैविक बनावट और जीवनशैली पर ज्यादा निर्भर करता है।

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