तेल संकट के बीच ‘कुबेर’ बना भारत...मिला 42.5 टन सोने का खजाना, अगले माह से मचेगी धूम

Gold Mining India: भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में शामिल है और हर साल 800 टन से अधिक सोना आयात करता है। इसी निर्भरता को कम करने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं, और अब इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।

Update:2026-04-19 11:36 IST

Gold Mining India

Gold Mining India: भारत में सोने के प्रति आकर्षण सदियों पुराना रहा है और आज भी यह परंपरा बरकरार है। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में शामिल है और हर साल 800 टन से अधिक सोना आयात करता है। इसी निर्भरता को कम करने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं, और अब इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में देश की पहली बड़ी निजी सोने की खान जल्द शुरू होने जा रही है।

जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की जोन्नागिरी गोल्ड परियोजना को भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी गोल्ड माइन माना जा रहा है। इस परियोजना का प्रोसेसिंग प्लांट मई के पहले सप्ताह में पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। फिलहाल यहां प्री-कमर्शियल ऑपरेशन जारी हैं। संभावना है कि राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू इस परियोजना को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित करेंगे।यह परियोजना 598 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागिदिरायी गांव शामिल हैं।

यहां लगभग 13.1 टन प्रमाणित सोने का भंडार मौजूद है, जबकि कुल संभावित भंडार 42.5 टन तक आंका गया है। जब यह खदान अपनी अधिकतम क्षमता पर पहुंचेगी, तब यहां से हर साल लगभग 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोने का उत्पादन होने की उम्मीद है, जो अगले 15 वर्षों तक जारी रह सकता है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है और इसे त्रिवेणी अर्थमूवर्स एंड इंफ्रा तथा डेक्कन गोल्ड जैसी प्रमुख कंपनियों का समर्थन प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत में स्वर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वर्तमान में हुट्टी गोल्ड माइंस जैसे सरकारी उपक्रम सालाना केवल 1.5 टन सोना ही उत्पादन कर पाते हैं, जबकि कोलार गोल्ड फील्ड्स को वर्ष 2000 में बंद कर दिया गया था। ऐसे में जोन्नागिरी जैसी निजी परियोजनाओं का सफल होना देश के खनन क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। आधुनिक तकनीकों और नियंत्रित विस्फोटों के जरिए इस खदान को मात्र 13 महीनों में तैयार किया गया है। परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत में जिम्मेदार और प्रतिस्पर्धी खनन का एक नया मॉडल पेश करेगी और भविष्य में अन्य खनिज क्षेत्रों में भी निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

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