Bhojshala Verdict: भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने किया स्वागत

Bhojshala Verdict: स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानने वाले हाईकोर्ट फैसले को सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक सत्य की जीत बताया।

Update:2026-05-15 21:52 IST

भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने किया स्वागत (Photo- Newstrack)

Bhojshala Verdict: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले पर अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने खुशी जताई है। उन्होंने इस फैसले को भारत की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक सत्य की जीत बताया है। स्वामी जी ने कहा कि अदालत ने पुरातात्विक तथ्यों, ऐतिहासिक प्रमाणों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाकर करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया है।

भोजशाला मां वाग्देवी का ऐतिहासिक और संरक्षित मंदिर

स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ माना है कि भोजशाला एक ऐतिहासिक और संरक्षित स्थल है, जो देवी सरस्वती यानी मां वाग्देवी का मंदिर है। उन्होंने कहा कि अदालत ने एएसआई एक्ट के प्रावधानों और अयोध्या विवाद मामले में स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय दिया है। उनके मुताबिक यह फैसला भारतीय संस्कृति, शिक्षा और ज्ञान परंपरा के प्रतीक मां वाग्देवी के सम्मान से जुड़ा हुआ है।

एएसआई के 2003 के आदेश को रद्द करना बताया अहम

स्वामी जी ने कहा कि अदालत द्वारा वर्ष 2003 में एएसआई की तरफ से जारी उस आदेश को रद्द करना भी बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें हिंदुओं को भोजशाला में नियमित पूजा-अर्चना के अधिकार से वंचित किया गया था। इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति देने वाले आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार और एएसआई को न्यायालय की भावना के अनुरूप मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं की धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि वर्षभर मां सरस्वती की पूजा, हवन और वैदिक अनुष्ठान बिना किसी रुकावट के संपन्न हो सकें।

भोजशाला भारत की ज्ञान और संस्कृति की पहचान

स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि भोजशाला सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि राजा भोज के काल से जुड़ी इस ऐतिहासिक धरोहर का संबंध शिक्षा, संस्कृत और भारतीय दर्शन की गौरवशाली परंपरा से रहा है। ऐसे में इस स्थल की मूल पहचान को स्थापित करना ऐतिहासिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जाना चाहिए।

हिंदू पक्ष के तर्कों का भी किया उल्लेख

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों का जिक्र करते हुए स्वामी जी ने कहा कि अदालत में साफ बताया गया था कि भोजशाला एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए उस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। हिंदू पक्ष ने यह भी कहा था कि भोजशाला का उल्लेख प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की सूची में दर्ज है। इसी आधार पर अदालत ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाणों को महत्व दिया।

उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष ने अदालत से 7 अप्रैल 2003 को एएसआई द्वारा जारी आदेश को निरस्त करने और भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर उसे पूर्ण रूप से हिंदू समाज को सौंपने की मांग भी की थी। अब हाईकोर्ट के फैसले ने उस मांग को मजबूत आधार प्रदान किया है।

सुप्रीम कोर्ट जाने की बात पर क्या बोले स्वामी जी

मुस्लिम पक्ष द्वारा फैसले की समीक्षा और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि भारत का संविधान सभी को न्यायिक प्रक्रिया अपनाने का अधिकार देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी सभी पक्ष शांति, संयम और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करेंगे।

उन्होंने कहा कि समाज में सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह का तनाव या टकराव देशहित में नहीं है।

काजी वकार सादिक के बयान का भी किया स्वागत

स्वामी जी ने धार शहर काजी वकार सादिक द्वारा फैसले के सम्मान की बात कहे जाने का भी स्वागत किया। उन्होंने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि भारत की संस्कृति संवाद, सहिष्णुता और न्याय की परंपरा पर आधारित रही है। ऐसे में सभी समुदायों को न्यायालय के फैसलों का सम्मान करते हुए सामाजिक समरसता को मजबूत करना चाहिए।

जैन समाज के दावे पर भी दी प्रतिक्रिया

जैन समाज द्वारा भोजशाला को जैन तीर्थ बताए जाने और मां वाग्देवी की प्रतिमा को मां अंबिका की प्रतिमा कहे जाने पर भी स्वामी जी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों का इतिहास बहुआयामी रहा है। ऐसे में सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही अंतिम निर्णय होना चाहिए।

भोजशाला परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा

फिलहाल भोजशाला परिसर के मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।


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