भारत के चाबहार बंदरगाह को अमेरिकी झटका… खतरे में मोदी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट!

Chabahar Port India: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि ईरान में भारत का अहम चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट खतरे में पड़ सकता है।

Update:2026-04-29 22:28 IST

Chabahar Port India: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि ईरान में भारत का अहम चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट खतरे में पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली छूट 26 अप्रैल 2026 को खत्म हो गई है। इसके बाद से भारत की इस बड़ी सामरिक और कनेक्टिविटी परियोजना पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

चाबहार में भारत की भूमिका पर सवाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने करीब 120 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1130 करोड़ रुपये के अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि भारत ने अपने कर्मचारियों को वापस बुला लिया है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने से बचा जा सके। इतना ही नहीं, भारत अब शहीद बेहेश्ती टर्मिनल में अपनी हिस्सेदारी किसी ईरानी कंपनी को ट्रांसफर करने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि सरकार अभी इस स्थिति को संभालने के लिए अमेरिका और ईरान दोनों के साथ बातचीत में जुटी हुई है।

अमेरिकी प्रतिबंधों ने बढ़ाई भारत की टेंशन

गौरतलब हो कि, अमेरिका इस समय ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति पर काम कर रहा है। उसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है ताकि वह अपनी शर्तें आसानी से लागू कर सके। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाए हैं और समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर चाबहार जैसे प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है, जो भारत के लिए बेहद अहम है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है चाबहार?

आपको बताते चलें कि, भारत का चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है और यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इस बंदरगाह के दो टर्मिनल हैं, जिनमें शहीद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास में भारत की बड़ी भूमिका रही है। भारत यहां आधुनिक सुविधाएं विकसित करने के लिए भारी निवेश कर चुका है। पिछले दो दशकों में यह प्रोजेक्ट भारत की आर्थिक और रणनीतिक योजनाओं का अहम हिस्सा बन चुका है।

पाकिस्तान को बाईपास करने का बड़ा प्लान

असल में भारत के लिए चाबहार की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इसके जरिए वह पाकिस्तान को दरकिनार कर सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच सकता है। जमीनी रास्ते से यह संभव नहीं हो पाता क्योंकि पाकिस्तान लगातार इसमें बाधा बनता रहा है। ऐसे में चाबहार भारत के लिए एक वैकल्पिक और मजबूत कनेक्टिविटी मार्ग के तौर पर विकसित किया गया था।

ग्वादर के जवाब में चाबहार की रणनीतिक भूमिका

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चाबहार सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन की मदद से विकसित किया गया है, जो भविष्य में सैन्य और आर्थिक चुनौती बन सकता है। ऐसे में चाबहार भारत को इस चुनौती का जवाब देने और क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने का मौका देता है।

अमेरिका का बदलता रुख और भारत की मुश्किल

दरअसल अमेरिका ने पहले 2018 में चाबहार को प्रतिबंधों से छूट दी थी, लेकिन बाद में उसने अपना रुख बदल लिया। सितंबर 2025 में ट्रंप प्रशासन ने इस छूट को खत्म करने का फैसला किया। भारत ने कोशिश कर इस छूट को 26 अप्रैल 2026 तक बढ़वाया, लेकिन अब इसके खत्म होने के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। भारत ने फरवरी में तय निवेश का भुगतान भी किया था, जिस पर विपक्ष ने सरकार की आलोचना की थी।

क्या कर रही है सरकार?

वहीं छूट खत्म होने के बाद भारत सरकार ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर ईरान और अमेरिका दोनों के साथ बातचीत कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी माना कि मौजूदा हालात काफी जटिल हैं। हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि भारत इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह बाहर निकलेगा या इसे जारी रखेगा।

आगे क्या हैं भारत के विकल्प?

वहीं मौजूदा स्थिति में भारत के सामने कई चुनौतियां खड़ी हैं। पहले ही चाबहार का संचालन संभालने वाली कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड के अधिकारियों के इस्तीफे और बजट में फंडिंग न मिलने जैसे संकेत मिल चुके हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल भारत के पास इंतजार करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं। उसे क्षेत्र में तनाव कम होने और प्रतिबंधों के हटने का इंतजार करना पड़ सकता है।

हालांकि भारत यह कोशिश भी कर सकता है कि वह पूरी तरह पीछे हटे बिना अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संतुलन बनाकर इस प्रोजेक्ट को किसी तरह जारी रखे। लेकिन इसके लिए अमेरिका को मनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

अनिश्चितता के दौर में फंसा ड्रीम प्रोजेक्ट?

तो कुल मिलाकर चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर फैसला भारत की रणनीतिक और आर्थिक दिशा तय करेगा। अगर हालात नहीं सुधरे तो यह प्रोजेक्ट भारत के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, वहीं अगर संतुलन बना लिया गया तो यह भविष्य में भारत की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

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