CJI गवई की मां का संघ कार्यक्रम में जाना बना सियासी बम! आखिर क्यों छिड़ गया नया विवाद? जानें सच
CJI BR Gavai RSS controversy: ये मामला सीधा पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) BR गवई की मां कमलाताई गवई से जुड़ा हुआ है।
CJI BR Gavai RSS controversy (PHOTO: social media)
CJI BR Gavai RSS controversy: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष समारोह और विजयदशमी कार्यक्रम को लेकर इस वक़्त पूरे देश में एक नया विवाद छिड़ गया है। दरअसल ये मामला सीधा पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) BR गवई की मां कमलाताई गवई से जुड़ा हुआ है। अमरावती (महाराष्ट्र) में होने वाले संघ के विजयदशमी कार्यक्रम में RSS ने उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। इस आमंत्रण को लेकर वामपंथी खेमे, कांग्रेस समर्थकों और कुछ मीडिया संस्थानों ने गंभीर रूप से आपत्तियां जताईं, जिसके बाद से राजनीतिक गलयारों में सरगर्मी तेज हो गई है।
कमलाताई गवई का आमंत्रण और फिर... हुआ विवाद
RSS का कहना है कि वह लंबे वक़्त से अपने कार्यक्रमों में विपरीत विचारधारा वाले लोगों को आमंत्रित करता आ रहा है ताकि आपसी संवाद और समझ बनी रहे। इसी परंपरा के अंतर्गत CJI की मां कमलाताई गवई को भी आमंत्रण भेजा गया था। लेकिन जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। कई लोगों ने इसे हिंदुओं से 'माफीनामा' बताया, तो कई लोगों ने इसे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने का प्रयास बता रहे।
विवाद उस वक़्त और गंभीर रूप ले लिया जब मराठी भाषा में एक पत्र वायरल हो गया। इस पत्र को कमलाताई गवई का बताया गया, जिसमें उन्होंने खुद को अंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़ा बताते हुए RSS के कार्यक्रम में शामिल होने से साफतौर से इनकार किया। पत्र में यह भी लिखा गया कि विजयदशमी जैसे हिंदू त्योहार के कार्यक्रम में शामिल होना 'सामाजिक चेतना के लिए हानिकारक' होगा।
बेटे का दावा – मां अवश्य जाएंगी कार्यक्रम में
पत्र सामने आने के तुरंत बाद कमलाताई गवई के बेटे और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डॉ. राजेंद्र गवई ने बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी मां को निमंत्रण स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है और वे 5 अक्टूबर को अमरावती में होने वाले RSS के विजयदशमी कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस बयान ने पूरे विवाद को पूरी तरह से उलझा कर रख दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सच्चाई क्या है ? क्या पत्र वास्तव में कमलाताई ने लिखा है, या फिर... यह कोई राजनीतिक प्रोपेगेंडा है?
CJI गवई और उनके परिवार की पृष्ठभूमि
CJI बी.आर. गवई का पूरा नाम भवानीरामकृष्ण गवई है। उनके पिता दादासाहेब गवई भी राजनीति में बहुत एक्टिव रहे और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के वरिष्ठ नेता के रूप में कार्य किया। दिलचस्प बात यह है कि साल 1981 में नागपुर में आयोजित RSS के संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में खुद दादासाहेब गवई मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। यही वजह है कि कई लोग आज यह सवाल खड़े कर रहे हैं कि यदि उनके पिता संघ के मंच पर जा सकते थे, तो आज उनकी मां के जाने पर इतना विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है।
न्यायपालिका, राजनीति और विचारधारा का आपसी टकराव - क्यों?
आपको बता दे, CJI गवई पहले भी विवादों से घिर चुके हैं। खजुराहो मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति को लेकर एक मामले में उनके बयान पर कई हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई थी। इस पृष्ठभूमि में अब उनकी मां का RSS कार्यक्रम में जाना या न जाना, एक बड़े राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बन गया है।
वामपंथी और कांग्रेसी खेमे का आरोप है कि संघ इस तरह के आमंत्रणों के माध्यम से दलित और अंबेडकरवादी विचारधारा को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। वहीं, RSS समर्थकों का कहना है कि यह एक सकारात्मक पहल है जिससे विभिन्न विचारधाराओं के बीच संवाद संभव हो पायेगा।
संघ का बड़ा संदेश?
कई राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह विवाद सिर्फ एक निमंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि RSS लगातार ऐसे व्यक्तियों को मंच पर बुलाता आ रहा है जिनकी विचारधारा उससे ज़रा भी मेल नहीं खाती। इससे एक ओर संघ की छवि 'खुले संवाद' वाले संगठन के रूप में जाती है, तो दूसरी ओर उसके आलोचक असहज हो जाते हैं।
बता दे, 5 अक्टूबर 2025 को अमरावती में होने वाला यह कार्यक्रम अब सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण बन गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अंततः कमलाताई गवई मंच पर पहुंचती हैं या नहीं। लेकिन इतना तो तय है कि इस निमंत्रण ने न्यायपालिका, राजनीति और समाज के बीच विचारधारात्मक खींचतान को एक बार फिर से उजागर कर दिया है।