धर्मेंद्र प्रधान-मंगल पांडेय को BJP ने किया साइडलाइन! अब क्या होगा इनका सियासी भविष्य?

Dharmendra Pradhan-Mangal Pandey Sidelined: बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में धर्मेंद्र प्रधान और मंगल पांडेय का नाम नहीं होने से उनके सियासी भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नितिन नबीन की नई टीम में कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिली है, लेकिन इन दोनों दिग्गजों को जगह नहीं मिली।

Update:2026-08-19 15:35 IST

Dharmendra Pradhan-Mangal Pandey Sidelined: भारतीय जनता पार्टी की बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की नई सूची सामने आ चुकी है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुवाई में बनी इस नई टीम में कई पुराने कद्दावर नेताओं को फिर से फ्रंट लाइन पर लाया गया है, तो कई रणनीतिकारों को बड़े राज्यों की सीधी कमान सौंपी गई है। लेकिन इस पूरे संगठनात्मक फेरबदल में राजनीति के दो सबसे बड़े महारथियों के नाम गायब हैं। उड़ीसा की राजनीति में गहरा प्रभाव रखने वाले धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के वरिष्ठ रणनीतिकार मंगल पांडेय का नाम सूची में न होना पूरी दिल्ली से लेकर राज्य के गलियारों तक सबसे तीखी चर्चा का विषय बन गया है। अब हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि क्या हालिया विवादों के कारण दोनों को जानबूझकर मुख्यधारा से दूर रखा गया है या यह किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी है।

क्या है प्रधान का सियासी भविष्य?

धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय तक केंद्र सरकार में सबसे मजबूत और भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते रहे हैं। उड़ीसा के क्षेत्रीय और राजनीतिक ताने-बाने पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। हालांकि, 25 जुलाई को उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया गया। दरअसल, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की गड़बड़ियों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में 20 जुलाई को संसद मार्च के बाद देशभर में उग्र आंदोलन छिड़ गया था। प्रधान के इस्तीफे को इस जनआक्रोश को शांत करने के बड़े कदम के रूप में देखा गया। तब कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार से हटने के बाद उन्हें संगठन में कोई राष्ट्रीय स्तर का बड़ा पद मिलेगा, लेकिन 17 अगस्त को आई नई सूची ने सबको चौंका दिया। गौरतलब है कि उन्हें 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का चुनाव प्रभारी भी बनाया गया था।

पांडेय का अगला कदम क्या?

दूसरी तरफ, बिहार की राजनीति के माहिर खिलाड़ी मंगल पांडेय के साथ भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम देखने को मिला है। नीतीश सरकार में सालों तक स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले पांडेय बिहार भाजपा के प्रदेश प्रमुख और पश्चिम बंगाल चुनाव के समय राज्य के प्रभारी रह चुके हैं। बिहार चुनाव के बाद जब राज्य में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनी, तो 15 अप्रैल 2026 को मंत्रियों के नए शपथ ग्रहण में उन्हें जगह नहीं मिली। उस दौरान राजनीतिक पंडितों का दावा था कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का काम संभालने के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा। लेकिन नितिन नवीन की केंद्रीय टीम में उनका नाम न होना कई सियासी संकेत दे रहा है। दूसरी ओर, पार्टी ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे चुनावी राज्यों के लिए विनोद तावड़े, सतीश पूनिया और तरुण चुघ जैसे दिग्गजों को प्रभारी बनाकर नई रणनीति साफ कर दी है।

क्या यह सिर्फ ब्रेक है या राजनीतिक समीकरणों का नया मोड़?

भाजपा के कामकाज का तरीका हमेशा चौंकाने वाला रहा है। पार्टी में पद न मिलना किसी नेता का राजनीतिक अंत नहीं माना जाता। हालांकि, मौजूदा माहौल को देखते हुए विश्लेषक इसे विवादित विवादों से दूरी बनाने की एक रणनीति भी मान रहे हैं। जल्द ही भाजपा के संसदीय बोर्ड का पुनर्गठन होना है, लेकिन क्या इन दोनों नेताओं को पार्टी की इस सबसे शक्तिशाली इकाई में जगह मिलेगी, इस पर गहरा सस्पेंस बना हुआ है। दोनों ही जमीन से जुड़े संगठन के पुराने सिपाही रहे हैं, इसलिए उन्हें भविष्य में कोई नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

2027 के चुनावी समर में क्या मिलेगी नई कमान?

साल 2027 में देश के 7 प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में साल की शुरुआत में चुनाव प्रस्तावित हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में साल के अंत में वोट डाले जाएंगे। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान और मंगल पांडेय के लिए सबसे स्वाभाविक रास्ता इन राज्यों में चुनाव प्रभारी बनने का दिखता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पार्टी ने विनोद तावड़े को प्रभारी और जगदीश पटेल को सह-प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं पंजाब में सतीश पूनिया और गुजरात में तरुण चुघ को कमान दी गई है।

पहले के चुनावों में विनोद तावड़े बिहार के पार्टी प्रभारी थे और धर्मेंद्र प्रधान चुनाव प्रभारी का काम देख रहे थे। वहीं बंगाल में मंगल पांडेय के साथ भूपेंद्र यादव की जोड़ी थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि नितिन नवीन इन दोनों के व्यापक सांगठनिक अनुभव का इस्तेमाल इन राज्यों में करते हैं या फिर दोनों दिग्गजों का यह राजनीतिक वनवास अभी और लंबा चलेगा।

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