Ethanol Petrol in Old Cars: एथेनॉल पेट्रोल से कार इंजन खराब होने पर रिजेक्ट होगा इंश्योरेंस क्लेम?

Ethanol Petrol in Old Cars: पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने के सरकार के फैसले के बाद इंजन खराब होने और इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने की अफवाहें फैल रही हैं। हालांकि, पीआईबी फैक्ट चेक ने साफ किया है कि ई-20 फ्यूल के इस्तेमाल से मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी अमान्य नहीं होती और ऐसे दावे भ्रामक हैं।

Update:2026-06-16 16:55 IST

Ethanol Petrol in Old Cars: केंद्र सरकार ने हाल ही में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी है। इसके अलावा 22 से 30 प्रतिशत एथेनॉल वाले पेट्रोल को सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी से भी छूट दी गई है। सरकार का यह कदम प्रदूषण को कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को घटाने के लिए उठाया गया है। लेकिन इस बड़े फैसले के बाद से ही सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। लोगों के बीच यह डर बैठ गया है कि एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल उनकी गाड़ियों के इंजन को पूरी तरह से खराब कर सकता है। इसी डर और भ्रम की स्थिति को साफ करने के लिए अब खुद सरकार को सामने आकर सच्चाई बतानी पड़ी है।

पुरानी गाड़ियों के मालिकों की बढ़ी चिंता

जैसे-जैसे देश में ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल यानी ई-20 फ्यूल का चलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पुरानी गाड़ियों के मालिकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इस नए ईंधन की वजह से उनकी गाड़ी का इंजन खराब हो जाता है, तो क्या बीमा कंपनी इसके नुकसान की भरपाई करेगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य तो पर्यावरण को स्वच्छ रखना और बायोफ्यूल को बढ़ावा देना है, लेकिन आम जनता अपनी गाड़ी की सुरक्षा को लेकर परेशान है। असल में, भारत में अप्रैल 2023 के बाद बनी गाड़ियां तो ई-20 फ्यूल के हिसाब से डिजाइन की गई हैं, लेकिन उससे पहले की बनी गाड़ियों के बारे में सोशल मीडिया पर कई तरह की दिक्कतें आने की आशंका जताई जा रही है।

बीमा दावों को लेकर कंपनियों का क्या रुख है?

ई-20 फ्यूल के इस्तेमाल और बीमा कवरेज के मुद्दे पर आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जैसी कंपनियों ने अपने आधिकारिक जवाबों में स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। कंपनी के मुताबिक अगर किसी ऐसे पुराने वाहन में ई-20 पेट्रोल डाला जाता है जो इसके अनुकूल नहीं है और इस वजह से इंजन को नुकसान पहुंचता है, तो सामान्य मोटर बीमा पॉलिसी के तहत क्लेम मिलने में परेशानी हो सकती है। किसी भी ऐसे ईंधन का इस्तेमाल करना जिसके लिए गाड़ी नहीं बनी है, उसे बीमा कंपनियां गलत उपयोग या लापरवाही मान सकती हैं। इस आधार पर दावों की जांच की जा सकती है और क्लेम खारिज भी हो सकता है। इसलिए लोगों को यह सलाह दी गई है कि वे अपनी गाड़ी की क्षमता और बीमा पॉलिसी की शर्तों को अच्छी तरह से पढ़ लें ताकि बाद में उन्हें अपनी जेब से भारी मरम्मत का खर्च ना उठाना पड़े।

पीआईबी फैक्ट चेक में सामने आई असली बात

इंटरनेट पर तेजी से फैल रही इन तमाम अफवाहों और दावों के बीच प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने इस पूरे मामले की सच्चाई दुनिया के सामने रखी है। पीआईबी के फैक्ट चेक में यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि ई-20 फ्यूल के इस्तेमाल से इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने वाले दावे पूरी तरह से भ्रामक और गलत हैं। सरकारी फैक्ट चेक एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ई-20 फ्यूल का उपयोग करने के बावजूद वाहन की मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी पूरी तरह से वैध रहती है। पीआईबी ने आम जनता से यह अपील भी की है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे किसी भी मेसेज पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें और कोई भी जानकारी आगे बढ़ाने से पहले हमेशा आधिकारिक सरकारी स्रोतों से उसकी पुष्टि जरूर कर लें।

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