FCRA Bill पर मोदी सरकार का बड़ा दांव! JPC भेजने की तैयारी, विपक्ष ने रख दी ये बड़ी शर्त
FCRA Amendment Bill: FCRA Bill 2026 को लेकर सरकार JPC भेजने पर विचार कर रही है। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद किरेन रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की। विपक्ष बिल वापस लेने पर अड़ा है।
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FCRA Amendment Bill: केंद्र सरकार विवादित एफसीआरए (FCRA) यानी फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल, 2026 को संसद में पेश करने से पहले संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी (JPC) के पास भेजने पर विचार कर रही है। इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार बातचीत चल रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर रहे हैं। इससे पहले रिजिजू विपक्षी दलों के नेताओं के साथ भी लगातार बातचीत कर रहे थे, ताकि एफसीआरए बिल को लेकर संसद में बने गतिरोध को खत्म किया जा सके।
PM से मुलाकात के बाद स्पीकर से मिले रिजिजू
FCRA बिल को लेकर सरकार की ओर से लगातार विपक्ष के साथ बातचीत की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर रहे हैं। इस मुलाकात को एफसीआरए बिल को लेकर सरकार की आगे की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार बिल को संसद में पेश करने से पहले संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी (JPC) के पास भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है। इससे सरकार की कोशिश है कि बिल को लेकर विपक्ष के साथ जारी गतिरोध को दूर किया जा सके और संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
विपक्ष की मांग, सिर्फ JPC भेजना काफी नहीं
हालांकि विपक्ष FCRA बिल को सिर्फ JPC के पास भेजे जाने से संतुष्ट नहीं है। विपक्ष की मांग है कि सरकार इस बिल को पूरी तरह वापस ले। विपक्षी दलों का कहना है कि केवल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजना पर्याप्त नहीं होगा और बिल को मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
सरकार और विपक्ष के बीच एफसीआरए (FCRA) को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। यही वजह है कि सरकार की ओर से विपक्षी दलों के नेताओं के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। अब देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की सहमति बन पाती है या नहीं।
BAC की बैठक में बिल का जिक्र नहीं
इस बीच सोमवार को हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी यानी बीएसी (BAC) की बैठक में एफसीआरए बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल का जिक्र नहीं हुआ। सरकार ने सोमवार को हुई बीएसी की बैठक के एजेंडे में दोनों विधेयकों को शामिल नहीं किया था।
इसके बाद मॉनसून सत्र के बचे हुए दिनों में इन दोनों विधेयकों को संसद में पेश किए जाने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। बीएसी की बैठक में दोनों बिलों को एजेंडे में जगह नहीं मिलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सरकार इन्हें संसद में कब और किस तरीके से आगे बढ़ाएगी।
सुप्रिया सुले ने भी की JPC की मांग
एफसीआरए बिल के मौजूदा स्वरूप को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार यानी एनसीपी-एसपी (NCP-SP) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने भी विरोध जताया है। उन्होंने केंद्र सरकार से बिल वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी (JPC) के पास भेजने की मांग की है।
सुप्रिया सुले का कहना है कि विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण कानून पर सभी पक्षों के साथ विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने एफसीआरए बिल को लेकर व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत बताई है।
DMK ने अमित शाह से की मुलाकात
एफसीआरए बिल को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके (DMK) ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी की ओर से सांसद पी विल्सन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से एफसीआरए बिल वापस लेने की मांग की।
डीएमके ने मौजूदा कानून की धारा 15 को हटाने की मांग भी की है। पार्टी ने वैकल्पिक तौर पर एफसीआरए कानून की पूरी समीक्षा करने और बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी (JPC) के पास भेजने की मांग रखी है। इस तरह डीएमके ने भी बिल को लेकर अपनी आपत्ति साफ तौर पर सरकार के सामने रख दी है।
कांग्रेस, सपा और वाम दल भी विरोध में
एफसीआरए बिल को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों समेत कई विपक्षी पार्टियां पहले ही विरोध जता चुकी हैं। विपक्षी दल बिल के मौजूदा स्वरूप को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
ऐसे में केंद्र सरकार के सामने एफसीआरए बिल पर विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती बनी हुई है। सरकार की ओर से एक तरफ विपक्षी नेताओं से बातचीत की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी (JPC) के पास भेजने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
अब क्या करेगी सरकार?
एफसीआरए बिल को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केंद्र सरकार विपक्ष को साथ लेकर इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी (JPC) के हवाले करेगी या फिर मौजूदा स्वरूप में ही इसे संसद में आगे बढ़ाने का फैसला करेगी। विपक्ष लगातार बिल वापस लेने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से गतिरोध खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाया जा रहा है।
मॉनसून सत्र के बचे हुए दिनों में एफसीआरए बिल को लेकर सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। सोमवार की बीएसी बैठक में एफसीआरए और प्रस्तावित परिसीमन बिल का जिक्र नहीं होने के बाद इन दोनों विधेयकों को संसद में पेश किए जाने को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।