Ghar Ka Purana Sona Bechne Ka Trend 2026: गोल्ड ड्यूटी बढ़ते ही बदलने लगा ट्रेंड, लोग बेचेंगे घरों में रखा सोना
Ghar Ka Purana Sona Bechne Ka Trend 2026: गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद भारत में लोग घरों में रखा पुराना सोना बेचने और एक्सचेंज करने की तरफ बढ़ रहे हैं। जानिए पूरा असर।
Ghar Ka Purana Sona Bechne Ka Trend 2026 India
Ghar Ka Purana Sona Bechne Ka Trend 2026: भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि परंपरा, सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक भी माना जाता है। लेकिन अब सरकार द्वारा गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे होते सोने के कारण जहां नई खरीदारी पर असर पड़ेगा, वहीं लोग घरों में वर्षों से रखा पुराना सोना बेचने या एक्सचेंज करने के लिए बाजार में ला सकते हैं। इससे देश में सोने के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और घरेलू गोल्ड सर्कुलेशन बढ़ सकता है।
सरकार ने हाल ही में सोने पर प्रभावी आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल है। सरकार का मकसद बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट को नियंत्रित करना और देश के करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव कम करना है। हालांकि इस फैसले का असर अब धीरे-धीरे ज्वेलरी बाजार और उपभोक्ताओं के व्यवहार में दिखने लगा है।
घरों में पड़ा है भारी मात्रा में निष्क्रिय सोना
जानकारों के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन से ज्यादा सोना मौजूद है। इसमें बड़ी मात्रा ऐसा सोना है जो लॉकरों या घरों में वर्षों से बिना इस्तेमाल के पड़ा हुआ है। अब जब सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं, तब लोग इस पुराने सोने को बेचकर नकदी लेने या नई ज्वेलरी के बदले एक्सचेंज कराने में रुचि दिखा सकते हैं।
ज्वेलरी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर घरेलू सोने का छोटा हिस्सा भी बाजार में वापस आने लगे तो नए सोने के आयात की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव भी घटेगा।
नई खरीदारी घट सकती है
महंगे सोने का सीधा असर उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता पर पड़ता है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सोने की मांग में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। खासतौर पर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवार नई ज्वेलरी खरीदने से बच सकते हैं। भीमा ज्वेलर्स के चेयरमैन बी. गोविंदन का कहना है कि ऊंचे दामों की वजह से लोग नई खरीदारी कम करेंगे, लेकिन पुराने सोने की बिक्री और एक्सचेंज तेजी से बढ़ सकता है। उनका मानना है कि सोने की मात्रा के हिसाब से बाजार में गिरावट देखी जा सकती है।
पुराने सोने के एक्सचेंज का बढ़ेगा ट्रेंड
देश के बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स पहले से ही एक्सचेंज मॉडल पर जोर दे रहे हैं। अब इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है। लोग पुरानी ज्वेलरी देकर नई डिजाइन की ज्वेलरी लेना ज्यादा पसंद कर सकते हैं, क्योंकि इससे उन्हें कम अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ेगा। जोस अलुक्कास के मैनेजिंग डायरेक्टर वर्गीज अलुक्कास के मुताबिक फिलहाल बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स की करीब 50 प्रतिशत बिक्री पुराने सोने के एक्सचेंज के जरिए हो रही है। आने वाले समय में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। मलाबार ग्रुप के चेयरमैन एम.पी. अहमद का भी कहना है कि ग्राहक सीधे नया सोना खरीदने के बजाय पुराने गहनों को एक्सचेंज कर नई ज्वेलरी लेना ज्यादा पसंद करेंगे। इससे बाजार में पुराने सोने की आवाजाही बढ़ सकती है।
तस्करी बढ़ने का भी खतरा
हालांकि सरकार का उद्देश्य आयात कम करना है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसके कुछ नकारात्मक पहलुओं की ओर भी इशारा किया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के चेयरमैन सुरेंद्र मेहता के अनुसार, जब भी सोने पर आयात शुल्क ज्यादा होता है, तब तस्करी बढ़ने का खतरा रहता है।
उनके मुताबिक पहले भी उच्च ड्यूटी के दौर में हर साल करीब 100 से 120 टन सोना गैरकानूनी रास्तों से भारत पहुंचता था। अब फिर से ऐसी स्थिति बन सकती है। इससे सरकार को राजस्व नुकसान होने के साथ-साथ अवैध कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
बढ़ सकती है गोल्ड लोन की मांग
महंगाई और बढ़ती आर्थिक जरूरतों के बीच लोग अपनी ज्वेलरी के बदले ज्यादा गोल्ड लोन लेना शुरू कर सकते हैं। क्योंकि सोने की कीमतें ऊंची होने से लोगों को अपने गहनों पर पहले की तुलना में अधिक लोन मिल सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बैंक और एनबीएफसी कंपनियों के गोल्ड लोन कारोबार में तेजी देखी जा सकती है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ सकता है।
कम कैरेट ज्वेलरी की ओर बढ़ सकता है बाजार
अब तक भारत में 22 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी सबसे ज्यादा पसंद की जाती रही है, लेकिन महंगे सोने के कारण लोग धीरे-धीरे 14K और 9K ज्वेलरी की तरफ रुख कर सकते हैं। इन ज्वेलरी में सोने की मात्रा कम होती है, जिससे कीमत भी कम रहती है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कम कैरेट ज्वेलरी का चलन बढ़ता है तो देश के सोना आयात में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा गोल्ड बार और कॉइन में निवेश घटने से भी आयात कम हो सकता है।
डायमंड और स्टडेड ज्वेलरी की मांग बढ़ने की उम्मीद
सोने के दाम बढ़ने का फायदा डायमंड और स्टडेड ज्वेलरी सेगमेंट को भी मिल सकता है। क्योंकि इन ज्वेलरी में सोने का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम होता है। ऐसे में ग्राहक कम बजट में आकर्षक डिजाइन वाली ज्वेलरी खरीद सकते हैं। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) का कहना है कि केवल इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से आयात पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम को मजबूत करना जरूरी होगा ताकि घरों में रखा निष्क्रिय सोना आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो सके।
सरकार के लिए चुनौती और अवसर दोनों
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार सही नीतियों के जरिए घरेलू सोने को औपचारिक बाजार में लाने में सफल होती है, तो इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा। लेकिन दूसरी ओर तस्करी, ऊंची कीमतों और कमजोर मांग जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी का असर बाजार पर कितना गहरा पड़ता है, लेकिन फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि भारत में सोने की खरीद-बिक्री का तरीका तेजी से बदलने वाला है।