INDIA Alliance Meeting: एकता का दावा या दरार की शुरुआत? 23 दलों की बैठक से पहले क्यों मचा है घमासान?

INDIA Alliance Meeting: पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद INDIA गठबंधन की अहम बैठक दिल्ली में होने जा रही है। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे समेत कई बड़े नेता शामिल होंगे। हालांकि DMK और AAP की दूरी तथा कांग्रेस-वाम विवाद विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

Update:2026-06-07 20:29 IST

INDIA Alliance Meeting: पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद विपक्षी खेमे में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को 'इंडिया' गठबंधन के घटक दलों की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में करीब 23 राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के जुटने की उम्मीद है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे जैसे बड़े चेहरे शामिल होंगे। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि तमाम विविधताओं के बावजूद यह गठबंधन एकजुट है। इस बैठक को बेहद खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी पहली बार दिल्ली दौरे पर आकर इस साझा मंच का हिस्सा बन रहे हैं। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस बात पर जोर दिया है कि सभी दल एक साफ नीयत और साझा मकसद के साथ इस बैठक में शामिल हो रहे हैं।

अंदरूनी तल्खी और कई बड़े दलों की दूरी

भले ही गठबंधन एकजुटता का दावा कर रहा हो, लेकिन इस बैठक से पहले कुछ बड़े झटके भी लगे हैं। तमिलनाडु की राजनीति में आए बदलावों और टीवीके सरकार को कांग्रेस के समर्थन के बाद द्रमुक (डीएमके) ने इस गठबंधन से दूरी बना ली है, जिसके चलते उसके नेता इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के भी इस बैठक से दूर रहने की संभावना जताई जा रही है। इन कमियों के अलावा, बैठक के भीतर भी वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच का पुराना विवाद गहरा सकता है। केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस के बयानों से नाराज माकपा (सीपीएम) ने नाराजगी खुलकर जाहिर की है। सीपीएम नेता एमए बेबी ने मल्लिकार्जुन खरगे को खत लिखकर कांग्रेस के उन आरोपों पर जवाब मांगा है, जिनमें वामपंथियों और भाजपा की मिलीभगत की बात कही गई थी। उनका मानना है कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ जांच की मांग करना विपक्षी एकता को कमजोर करता है। हालांकि, इन तमाम शिकायतों के बावजूद सीपीएम ने इस बैठक में अपने सांसद जॉन ब्रिटास को भेजने का फैसला किया है। इसके साथ ही माकपा नेता हन्नान मोल्लाह ने भी कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सबसे बड़े दल के रूप में कांग्रेस जरूरी परिपक्वता नहीं दिखा पा रही है और राहुल गांधी द्वारा क्षेत्रीय दलों को निशाना बनाना गठबंधन के हित में नहीं है।

बैठक का मुख्य एजेंडा और केंद्र पर तीखे वार

हालांकि इस बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा पहले से तय नहीं किया गया है, लेकिन कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने साफ किया है कि कुछ दलों की अनुपस्थिति के बावजूद सभी विपक्षी पार्टियां भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई में एकजुट हैं। विपक्ष का मुख्य ध्यान केंद्र सरकार की उन नीतियों पर रहेगा जिन्हें वे जनविरोधी मानते हैं। जयराम रमेश ने सत्तापक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है, संविधान पर लगातार हमले हो रहे हैं और केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सरकार की विदेश नीति को भी विपक्ष इस बैठक में एक बड़े मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में है।

भाजपा का तीखा पलटवार और गठबंधन पर तंज

विपक्ष की इस उठापटक और अंदरूनी कलह पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने भी तीखा हमला बोला है। भाजपा ने इसे गठबंधन की कमजोरी बताते हुए कहा कि विपक्षी दलों के पास देश के विकास के लिए कोई विजन नहीं है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा कि इस गठबंधन के पास न तो कोई मिशन है और न ही कोई स्पष्ट सोच, बल्कि यहां सिर्फ भ्रम की स्थिति बनी हुई है। वहीं बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्षी दलों के बीच की आपसी लड़ाई और वैचारिक मतभेद अब पूरी तरह सतह पर आ चुके हैं, जिससे साफ है कि यह गठबंधन केवल नाम का रह गया है।

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