Jharkhand Politics: भाजपा के इस दांव से झारखंड में क्रॉस वोटिंग का डर! क्या चौथी बार राज्यसभा पहुंचेंगे परिमल नथवानी?
Jharkhand Politics: झारखंड की 2 राज्यसभा सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है। झामुमो-कांग्रेस गठबंधन (56 विधायक) ने 2 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि एनडीए (24 विधायक) समर्थित निर्दलीय परिमल नथवानी भी मैदान में हैं। एक सीट के लिए 28 वोट चाहिए। सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या क्रॉस-वोटिंग के जरिए नथवानी जरूरी 4 वोट जुटाएंगे या गठबंधन दोनों सीटें जीतेगा।
Jharkhand Politics: झारखंड की सियासत में इस वक्त काफी हलचल है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में गुरुवार को वोट डाले जाएंगे और मैदान में तीन प्रत्याशियों के होने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सत्ताधारी जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन दोनों सीटों पर कब्जा जमाने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं, बीजेपी के समर्थन से निर्दलीय ताल ठोक रहे परिमल नथवानी ने इस लड़ाई को पूरी तरह से रोमांचक बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नथवानी गठबंधन के इस मजबूत चक्रव्यूह को भेद पाएंगे।
इस राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर कब्जा जमाने के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोटों की दरकार है। अगर सत्ताधारी महागठबंधन की बात करें तो उनके पास कुल 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और वामदलों के दो विधायक शामिल हैं। दूसरी तरफ एनडीए के खाते में फिलहाल 24 विधायक हैं, जिनमें 21 बीजेपी, एक आजसू, एक जेडीयू और एक लोजपा से है।
चुनावी अखाड़े में जेएमएम ने बैजनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को उतारा है। वहीं, कारोबारी जगत से ताल्लुक रखने वाले परिमल नथवानी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं जिन्हें एनडीए का समर्थन हासिल है। इस गणित के हिसाब से नथवानी को जीत दर्ज करने के लिए अपने 24 पक्के वोटों के अलावा चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।
क्रॉस वोटिंग का मंडराता साया
कागजों पर भले ही महागठबंधन का पलड़ा भारी दिख रहा हो और उनके नंबर गेम के लिहाज से दोनों सीटें पक्की लग रही हों, लेकिन राजनीति में आखिरी पल तक कुछ भी हो सकता है। नथवानी के मैदान में उतरने से क्रॉस वोटिंग की सुगबुगाहट तेज हो गई है। कांग्रेस और जेएमएम के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। नथवानी अपना पूरा जोर लगा रहे हैं कि वे वो चार जादुई वोट जुगाड़ लें। वहीं सत्ताधारी खेमा अपने विधायकों की किलेबंदी करने में जुटा है ताकि कोई सेंधमारी न हो सके।
नथवानी का पुराना सियासी रिकॉर्ड
रिलायंस समूह से जुड़े परिमल नथवानी राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं और उनका झारखंड से पुराना और गहरा नाता रहा है। उन्होंने अपना पहला राज्यसभा चुनाव साल 2008 में यहीं से लड़ा था। उस वक्त भी वे निर्दलीय मैदान में उतरे थे और क्रॉस वोटिंग ने उनकी राह आसान कर दी थी। तब आरजेडी सहित कई अन्य विधायकों ने उन्हें समर्थन देकर संसद पहुंचा दिया था।
इसके बाद 2014 में उन्होंने बीजेपी और आजसू के समर्थन से पर्चा भरा और निर्विरोध चुन लिए गए। यह एक रिकॉर्ड था जब कोई निर्दलीय लगातार दूसरी बार झारखंड से उच्च सदन पहुंचा हो। साल 2020 में उन्होंने अपनी सियासी पिच बदली और आंध्र प्रदेश का रुख किया। वहां वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन से उन्होंने अपनी जीत की हैट्रिक लगाई और लगातार तीसरी बार सांसद बने।
क्या लगेगा जीत का चौका?
अब 2026 के इस सियासी रण में वे एक बार फिर अपनी पुरानी कर्मभूमि झारखंड लौट आए हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो बीजेपी केवल अपनी एक सीट पक्की करने की कोशिश नहीं कर रही, बल्कि उसकी नजर सत्ताधारी खेमे की अंदरूनी कलह और संभावित क्रॉस वोटिंग का पूरा फायदा उठाने पर है।
नथवानी की एक बड़ी खूबी यह है कि उनकी स्वीकार्यता दलगत राजनीति से ऊपर है और हर पार्टी के नेताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या परिमल नथवानी अपने अजेय चुनावी रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए चौथी बार राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ते हैं, या फिर इस बार झारखंड का बदलता हुआ सियासी समीकरण उनके विजय रथ पर ब्रेक लगा देगा।