पप्पू यादव की सुरक्षा पर दिल्ली HC एक्शन, तुरंत PSO तैनात करने का आदेश, केंद्र सरकार को अल्टीमेटम
Delhi HC on Pappu Yadav Security: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुरक्षा समीक्षा पूरी होने तक तुरंत अतिरिक्त PSO उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
Delhi HC on Pappu Yadav Security: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को बेहद अहम निर्देश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि गृह मंत्रालय जब तक सांसद की सुरक्षा समीक्षा पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लेता, तब तक के लिए बिना किसी विलंब के उन्हें एक अतिरिक्त पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) तुरंत प्रदान किया जाए। अदालत का यह आदेश एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील खतरे को देखते हुए अंतरिम राहत के रूप में आया है।
तीन सप्ताह के भीतर केंद्र को फैसला लेने की मोहलत
हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए याचिका का निस्तारण किया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित वकील ने अदालत में आश्वासन दिया कि सांसद के आवेदन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गंभीरता से मंथन किया जा रहा है। सरकार के पक्ष के अनुसार, अगले 3 हफ्तों के भीतर इस सुरक्षा समीक्षा पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। वर्तमान समय में पप्पू यादव को बिहार राज्य की सीमा के भीतर Y+ श्रेणी का सुरक्षा घेरा मिला हुआ है, लेकिन उन्होंने अपनी राष्ट्रव्यापी यात्राओं को देखते हुए पूरे देश में सुरक्षा का स्तर बढ़ाने की अर्जी दी है।
सिर काटने पर 51 लाख के इनाम
अदालत में दायर याचिका के माध्यम से सांसद ने अपनी जान पर बने बड़े खतरे की पूरी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि 1 अगस्त को सार्वजानिक मंच पर उनका सिर कलम करने वाले को 51 लाख रुपये का इनाम देने की खुली घोषणा की गई थी। इसके अगले ही दिन 2 अगस्त को तड़के दिल्ली में उनकी सांसद पत्नी रंजीत रंजन के सरकारी आवास के बाहर एक अनियंत्रित भीड़ जमा हो गई, जहां उपद्रवियों ने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चप्पल और चाकू से हमले की साजिश
संकट यहीं नहीं रुका, 2 अगस्त की दोपहर जब पप्पू यादव दिल्ली स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे, तभी एक संदिग्ध व्यक्ति ने उन पर चप्पल फेंक दी। जब वहां मौजूद सहयोगियों ने हमलावर को दबोचा, तो उसके पास से एक धारदार चाकू बरामद हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि वहां किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देने की साजिश रची गई थी। सांसद के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि नीट परीक्षा और धार्मिक ट्रस्ट से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के बाद से ही उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
"सांसद पर हमले को मनगढ़ंत नहीं माना जा सकता"
दिल्ली हाईकोर्ट ने इन घटनाओं पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता देश की संसद के सदस्य हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उन पर हुए हमलों या मिली धमकियों को मनगढ़ंत कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। सुरक्षा के अभाव को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का हनन बताते हुए कोर्ट ने गृह मंत्रालय को 3 हफ्तों में पूरे भारत में सुरक्षा बढ़ाने पर ठोस फैसला लेने को कहा है।