राम मंदिर चढ़ावा Scam: सुप्रीम कोर्ट ने SIT से सीलबंद लिफाफे में मांगी स्टेटस रिपोर्ट, जांच तेज करने के निर्देश
Ram Mandir donation scam: राम मंदिर चंदे के कथित गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT को जांच तेज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
Ram Mandir Donation Scam SC Hearing: अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को जांच में तेजी लाने और इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने SIT से जांच की प्रगति पर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
SIT को जांच में तेजी लाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIT कथित चंदा गबन मामले की जांच को जल्द पूरा करे। अदालत ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े अलग-अलग पक्षकारों की ओर से जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर करने के लिए दिए गए सुझावों पर SIT वस्तुनिष्ठ तरीके से विचार करे।
अदालत ने संकेत दिया कि SIT की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद वह अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान के प्रबंधन में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।
चार सदस्यीय SIT का हुआ था गठन
इससे पहले 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित चार सदस्यीय SIT का संज्ञान लिया था। इस SIT की अध्यक्षता IGP किरण एस. कर रहे हैं। अदालत ने जांच को और प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को टीम में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने उस समय स्पष्ट किया था कि मामले में सामने आई शिकायतों के मद्देनजर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे और दान के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। SIT को दो सप्ताह के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा गया था।
20 जुलाई को SIT बनाने की संभावना पर मांगा था जवाब
इस मामले में 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि कथित चंदा गबन की जांच के लिए SIT गठित करने की क्या संभावना है। इसके बाद राज्य सरकार ने SIT गठित करने की दिशा में कदम उठाया।
इससे पहले 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस से मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया था। याचिकाओं में कथित चंदा अनियमितताओं की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
CBI जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग
राम मंदिर में दान के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इनमें RJD सांसद सुधाकर सिंह भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच CBI से कराने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है।
अब सुप्रीम कोर्ट की नजर SIT की जांच रिपोर्ट पर है। अदालत के ताजा निर्देश से साफ है कि वह केवल आरोपों की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चंदे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था को भी मजबूत करने पर विचार कर रही है।
नोट: कथित गबन से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है। अंतिम जिम्मेदारी और किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि सक्षम जांच/अदालत के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।