सोनिया गांधी ने खोल दिए कई राज! BJP-मीडिया-चुनाव आयोग पर फूटा गुस्सा, बताया- 2004 में क्यों नहीं बनीं PM?
सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस को बीजेपी और आरएसएस से राजनीति सीखने की जरूरत नहीं है।
Sonia Gandhi: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने बीजेपी, आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि कांग्रेस को बीजेपी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से राजनीति करने के तरीके सीखने की कोई जरूरत नहीं है। सोनिया गांधी का कहना है कि पिछले 12 सालों में देश के लोकतंत्र, संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि समय के साथ देश की व्यवस्था फिर से सही रास्ते पर लौटेगी।
सोनिया गांधी ने ये बातें अपनी नई किताब 'Belonging: A Journey of Love' के लॉन्च से पहले अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' को दिए एक इंटरव्यू में कहीं। इस बातचीत में उन्होंने मोदी सरकार, कांग्रेस की मौजूदा स्थिति, विपक्ष की चुनौतियों और 2004 में प्रधानमंत्री नहीं बनने के अपने फैसले पर भी खुलकर बात की।
'पिछले 12 सालों में लोकतंत्र को पहुंचा बड़ा नुकसान'
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले 12 सालों में देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं को गंभीर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के जाने के बाद भी व्यवस्था को दोबारा मजबूत बनाने में समय लगेगा। इसके लिए राजनीतिक दलों को काफी मेहनत करनी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक सफलता और उनकी विचारधारा को लेकर सवाल पूछे जाने पर सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी का राजनीतिक नजरिया कांग्रेस से काफी अलग है। लेकिन कांग्रेस में भी कई तरह से लोग राजनीति में सफल हुए हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस में आगे बढ़ने के कई रास्ते रहे हैं। साथ ही उन्होंने साफ कहा कि उन्हें RSS से कुछ सीखने की जरूरत महसूस नहीं होती।
2004 में प्रधानमंत्री बनने का ख्याल कभी मन में नहीं आया
इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी से 2004 के उस फैसले को लेकर भी सवाल किया गया, जब कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए ने केंद्र में सरकार बनाई थी, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया था। उनसे पूछा गया कि अगर वह प्रधानमंत्री बनतीं तो क्या यूपीए सरकार की रणनीति अलग होती?
इस पर सोनिया गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने का विचार उनके मन में कभी आया ही नहीं। उन्होंने उस समय के अनुभव को काफी सकारात्मक बताया। सोनिया ने कहा कि यूपीए सरकार में सभी ने एक टीम की तरह काम किया था। डॉ. मनमोहन सिंह सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि वह पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं और इसी व्यवस्था के तहत काम आगे बढ़ा।
चुनाव आयोग और मीडिया को लेकर भी लगाए आरोप
सोनिया गांधी ने चुनावी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग समेत पूरी चुनावी मशीनरी पर बीजेपी का कब्जा हो गया है। इसके अलावा उन्होंने मुख्यधारा के मीडिया पर भी नियंत्रण होने का आरोप लगाया।
सोनिया गांधी ने कहा कि हाल के महीनों में यह साबित हुआ है कि कई चुनावों में गड़बड़ी हुई है और चुनाव चोरी किए गए हैं। उनके मुताबिक, अब लोग भी इन मुद्दों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने कांग्रेस की स्थिति को लेकर उम्मीद जताई। सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस लड़ाई लड़ रही है और आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर काम कर रही है और विपक्ष की संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं।
नई किताब में इटली से भारत तक का सफर
सोनिया गांधी की नई किताब 'Belonging: A Journey of Love' हार्परकॉलिन्स इंडिया ने प्रकाशित की है। यह उनकी निजी जिंदगी पर आधारित संस्मरण है, जिसमें राजनीति को पृष्ठभूमि के तौर पर रखा गया है।
किताब की शुरुआत इटली के वेनेटो इलाके में उनके बचपन से होती है। इसमें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर में उनके शुरुआती जीवन का जिक्र है। इसके बाद कहानी उन्हें कैम्ब्रिज तक ले जाती है, जहां साल 1965 में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी।
इस इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने एक तरफ कांग्रेस की राजनीतिक चुनौतियों और देश की मौजूदा व्यवस्था पर अपनी बात रखी, तो दूसरी तरफ अपने निजी जीवन के उन पड़ावों को भी याद किया, जिन्होंने उन्हें भारत तक पहुंचाया।