'जजों पर फेंकी फाइलें, दीं भद्दी गालियां...' SC में अचानक बौखलाया याचिकाकर्ता, सन्न रह गए जज साहब
Supreme Court Chaos: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने जजों पर फाइलें फेंकी, आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और कोर्ट रूम में हंगामा खड़ा कर दिया। जानिए पूरी घटना, कोर्ट की प्रतिक्रिया और आगे क्या कार्रवाई हो सकती है।
Supreme Court Chaos: देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में आज एक ऐसी अभूतपूर्व और हैरान कर देने वाली घटना घटी जिसने न्याय के मंदिर की सुरक्षा और गरिमा को हिलाकर रख दिया। शुक्रवार, 10 जुलाई को अदालत परिसर के भीतर उस समय बेहद अजीबोगरीब और तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए, जब अपनी याचिका की खुद पैरवी कर रहे एक शख्स ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं। उसने न सिर्फ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए माननीय जजों को ही हुक्म सुनाना शुरू कर दिया, बल्कि गुस्से में आकर अपने केस के सारे दस्तावेज भी जजों की पीठ की तरफ हवा में उछाल कर फेंक दिए।
जजों को सरेआम दी गालियां
यह पूरी सनसनीखेज घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की दो जजों वाली खंडपीठ के सामने घटित हुई। कोर्ट रूम के भीतर मौजूद लोग उस समय सन्न रह गए जब याचिकाकर्ता ने अपनी लिखित अर्जी में जजों के लिए बेहद आपत्तिजनक और भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया। सुनवाई के दौरान जब उसका यह उग्र और हिंसक बर्ताव हद से ज्यादा बढ़ गया, तो कोर्ट का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पीठ ने बिना कोई वक्त गंवाए वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को सख्त आदेश दिया कि इस उपद्रवी शख्स को तुरंत धक्के मारकर कोर्ट रूम से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
याचिकाकर्ता का हाई वोल्टेज ड्रामा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह याचिकाकर्ता इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने आया था। जैसे ही इस मामले की फाइल खुली और सुनवाई शुरू हुई, याचिकाकर्ता ने जजों को संबोधित करते हुए चिल्लाकर कहा कि मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने का ऑर्डर जारी करें। उसका यह हैरान करने वाला रवैया देखकर जस्टिस विश्वनाथन दंग रह गए। उन्होंने तुरंत पूछा कि क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं? इस पर उस शख्स ने बदतमीजी से जवाब दिया कि मेरी तरफ से बस इतना ही है, बाकी सब रिकॉर्ड में दर्ज है।
सुरक्षाकर्मियों ने दबोचा
इतना कहते ही उस सिरफिरे शख्स ने अपने हाथ में पकड़ी फाइलों का बंडल सीधे जजों की बेंच की तरफ उछाल दिया और भरी अदालत में खड़े होकर जजों को भद्दी गालियां बकने लगा। इस अप्रत्याशित हमले से कोर्ट रूम में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, वहां मुस्तैद सुरक्षा स्टाफ ने पलक झपकते ही मुस्तैदी दिखाई और उस हिंसक याचिकाकर्ता को चारों तरफ से दबोचकर जबरन अदालत कक्ष से बाहर खींच लिया। इस पूरे ड्रामे ने कोर्ट की कार्यवाही को कुछ समय के लिए पूरी तरह ठप कर दिया।
पुरानी घटना की यादें ताजा
आज के इस बड़े बवाल ने कुछ महीनों पहले सुप्रीम कोर्ट में ही हुई एक और खौफनाक वारदात की यादों को ताजा कर दिया है। उस समय तत्कालीन सीजेआई बीआर गवई की बेंच के ऊपर राकेश किशोर नाम के एक वकील ने कोई भारी चीज फेंकने का प्रयास किया था। हालांकि, उस वक्त तत्कालीन सीजेआई गवई ने बड़प्पन दिखाते हुए वकील को माफ करने का मन बनाया था, लेकिन बाद में देश के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने इस हरकत को अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना। उन्होंने आरोपी वकील के खिलाफ 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' के तहत आपराधिक अवमानना का मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी थी।
संस्था की सुरक्षा सर्वोपरि
उस पुरानी घटना पर बाद में सुनवाई करते हुए जजों ने कहा था कि वे इस तरह के बर्ताव से बेहद दुखी और हैरान थे, लेकिन वे इसे एक भूला हुआ अध्याय मान चुके हैं। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साफ शब्दों में कहा था कि देश की शीर्ष अदालत की संस्थागत अखंडता और जजों की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता पूरी तरह से अक्षम्य है। बहरहाल, आज 10 जुलाई को हुई इस नई और शर्मनाक वारदात ने सुप्रीम कोर्ट के भीतर जजों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।