TMC Political Crisis: बगावत के बाद भी ममता बनर्जी के साथ क्यों हैं TMC विधायक? इनसाइड स्टोरी आई सामने

TMC Political Crisis: TMC में बगावत गहराती जा रही है। 58 विधायकों ने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को ठुकराते हुए ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया, लेकिन अब ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर बागी गुट में ही मतभेद उभर आए हैं। कई विधायक उन्हें सिर्फ सलाहकार नहीं, बल्कि पार्टी की सर्वोच्च नेता बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

Update:2026-06-05 16:24 IST

Mamata Banerjee

TMC Political Crisis: तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद पार्टी के भीतर बगावत की चिंगारी सुलग उठी है। पार्टी के 58 विधायकों ने अभिषेक बनर्जी को महासचिव के रूप में स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। इस विरोध के चलते इन विधायकों ने अलग रुख अपनाते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया और विधानसभा अध्यक्ष से इसे मान्यता भी दिला दी। हालांकि, अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ शुरू हुई यह बगावत अब खुद बागी गुट के भीतर ही फूट का कारण बनने लगी है।

ममता बनर्जी की भूमिका पर बागी गुट में मतभेद (Rift in rebel camp over Mamata Banerjee’s role)

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले इस बागी धड़े में दरार तब पैदा हुई जब ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य और पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हुई। दरअसल, एक हालिया बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने प्रस्ताव रखा था कि ममता बनर्जी को नए विधायक दल का मुख्य सलाहकार बना दिया जाए। यह बात कई बागी विधायकों को रास नहीं आई। इन विधायकों का स्पष्ट कहना है कि ममता बनर्जी सिर्फ एक सलाहकार नहीं हो सकतीं, बल्कि वही पार्टी की सर्वोच्च नेता बनी रहेंगी। बागी विधायकों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि ममता बनर्जी को मुख्य भूमिका से हटाकर सिर्फ सलाहकार की गद्दी पर बैठाया गया, तो वे इस नए गुट में बने रहने के फैसले पर दोबारा विचार करेंगे।

विधायक बोले- ममता बनर्जी सलाहकार नहीं, सर्वोच्च नेता हैं (Mamata Banerjee is supreme leader, not advisor)

बागी खेमे में शामिल कई प्रमुख चेहरों ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा जाहिर की है। पांचला से तृणमूल कांग्रेस के विधायक गुलशन मलिक ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें पहले यही भरोसा दिया गया था कि पूरी पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी। वे महज एक सलाहकार की भूमिका में सीमित नहीं रह सकतीं। मलिक ने साफ कर दिया कि अगर ममता बनर्जी को सर्वोच्च नेता का दर्जा नहीं मिला, तो उन्हें इस बागी गुट में रहने या न रहने को लेकर कड़ा फैसला लेना होगा।

इसी सुर में सुर मिलाते हुए सीताई विधानसभा सीट से विधायक संगीता रॉय बसुनिया ने भी अपनी बात दोहराई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी उनकी सर्वोच्च नेता हैं और हमेशा रहेंगी। उन्हें किसी भी कीमत पर सलाहकार के पद तक सीमित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे पार्टी की वास्तविक मार्गदर्शक और नेता हैं। इस तरह बागी विधायक अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व का विरोध तो कर रहे हैं, लेकिन ममता बनर्जी के प्रति उनका सम्मान और निष्ठा बरकरार है, जिससे इस नए गुट का भविष्य अब अधर में लटकता नजर आ रहा है।

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