घर वापसी करने को तैयार TMC के बागी नेता, लेकिन रख दी ऐसी शर्त, ममता दीदी के पैरों तले खिसक गई ज़मीन
TMC Rebelllion Rabindranath Ghosh: पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के बागी नेता रवींद्रनाथ घोष ने ममता बनर्जी के सामने बड़ी शर्त रख दी है। दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से दूर करने पर कई नाराज नेता पार्टी में लौट सकते हैं।
TMC Rebelllion Rabindranath Ghosh: पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बेहद सीनियर नेता और उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने ममता बनर्जी की नींद उड़ा दी है। बागी गुट में शामिल हो चुके घोष ने रविवार को खुला ऐलान किया कि अगर ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से पूरी तरह अलग करने में कामयाब हो जाती हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे के ज्यादातर नाराज नेता वापस टीएमसी में लौट आएंगे। रवींद्रनाथ घोष का ममता बनर्जी का साथ छोड़कर विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट में जाना कूर्चबिहार समेत पूरे बंगाल में एक बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।
समानांतर सरकार चलाने की तैयारी
यह बड़ा सियासी घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब बागी गुट ने पूरी तृणमूल कांग्रेस पर कब्जा करने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। इस गुट ने राज्य से लेकर जिला स्तर तक अपनी खुद की अलग और समानांतर समितियां बनाकर पार्टी आलाकमान को सीधी चुनौती दी है। बागियों के इस आक्रामक कदम के बाद ममता बनर्जी के कई पुराने और बेहद भरोसेमंद सिपहसालार भी दीदी का साथ छोड़ रहे हैं। इनमें बीरभूम के कद्दावर और रसूखदार नेता अनुब्रत मंडल का नाम भी शामिल है, जो अब बागी खेमे में खड़े नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बागी गुट बहुत जल्द रवींद्रनाथ घोष को कूचबिहार का नया जिला अध्यक्ष घोषित कर सकता है।
टिकट कटने से भड़का गुस्सा
अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीतिकार कंपनी आई-पैक (I-PAC) पर तीखा हमला बोलते हुए रवींद्रनाथ घोष ने कहा कि विधानसभा चुनावों में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के पीछे सबसे बड़ा हाथ इन्हीं लोगों का था। उन्होंने कहा, "मैंने पार्टी के कई बड़े नेताओं से चर्चा की है और मुझे साफ समझ आया है कि ममता बनर्जी को कुछ समय के लिए अभिषेक बनर्जी को राजनीति से दूर रखना ही होगा। तभी नाराज नेता और जमीनी कार्यकर्ता वापस दीदी के पास लौटेंगे।" घोष ने खुलकर आरोप लगाया कि अभिषेक की मनमानी की वजह से ही चुनाव में 80 से ज्यादा मौजूदा विधायकों और मंत्रियों के टिकट काट दिए गए, जिससे पूरी पार्टी बिखर गई।
दीदी के हाथ से निकली कमान
लगभग 20 सालों से ज्यादा समय तक तृणमूल के जिला अध्यक्ष रहे और ममता बनर्जी के सबसे पुराने रणनीतिकारों में शुमार घोष ने अब ममता दीदी की क्षमता पर ही गंभीर सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने बेहद तल्ख अंदाज में पूछा कि क्या वाकई आज के दौर में पार्टी पर ममता दीदी का कोई नियंत्रण बचा भी है? घोष ने दावा किया, "हकीकत तो यह है कि अब दीदी के हाथों में कोई पावर नहीं रह गई है। फैसले लेने की असली ताकत कहीं और ट्रांसफर हो चुकी है और बेहद महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी उन लोगों को सौंप दी गई है जो इसके बिल्कुल लायक नहीं हैं। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी चाहकर भी कुछ नहीं कर सकतीं।"
अनुभवहीन लीडरशिप ने किया बेड़ागर्क
जब घोष से पूछा गया कि क्या पार्टी के इस बिखराव और शर्मनाक हार के जिम्मेदार सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी हैं, तो उन्होंने बिना झिझक कहा कि अभिषेक में राजनीतिक अनुभव की भारी कमी है। वे किसी जमीनी आंदोलन या संघर्ष से तपकर नेता नहीं बने हैं। आई-पैक पर गुस्सा निकालते हुए उन्होंने कहा कि वह सिर्फ कुछ नौजवान लड़कों का एक ग्रुप था, जो सालों से खून-पसीना बहाने वाले सीनियर नेताओं को यह सिखा रहा था कि राजनीति कैसे की जाती है। उन्होंने कहा कि 2011 और 2016 के चुनावों में कोई आई-पैक नहीं थी, फिर भी हम जीते। अचानक इस कंपनी को इतना बड़ा बना दिया गया कि उसने पूरी पार्टी को तबाह कर दिया और खुद किनारे हो गई।
जहां बहुमत, वहीं असली तृणमूल
ममता बनर्जी से सीधे बात करने के बजाय पाला बदलने के सवाल पर रवींद्रनाथ घोष ने एक नया दांव खेल दिया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कोई दो पार्टियां नहीं हैं, यह एक ही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हमें राजनीति में वहीं रहना होगा जहां असली बहुमत है। इस समय उत्तर बंगाल के लगभग सभी विधायक और बड़े नेता एक मंच पर इकट्ठा हो चुके हैं। मैंने यह बड़ा फैसला अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और उनके भविष्य को बचाने के लिए लिया है।" इस बयान के बाद अब गेंद ममता बनर्जी के पाले में है कि वे अपने भतीजे को बचाती हैं या पार्टी को।