प्राइवेट पार्ट छूना भी रेप.... अमरूद का लालच देकर नाबालिग बच्चियों संग रेप मामले में कोर्ट का फैसला

Child sexual abuse: अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे को ‘सेक्शुअल इंटेंशन’ से छूता है, तो यह ‘रेप’ की श्रेणी में आएगा।

Update:2025-10-21 08:56 IST

Child sexual abuse: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई बच्चों के साथ थोड़ी भी अश्लील हरकत करता है, तो उसे 'रेप' की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।

अमरूद का लालच देकर की थी गंदी हरकत

दरअसल, कोर्ट ने 38 साल के एक ड्राइवर आरोपी की याचिका को खारिज करते हुए उसकी 10 साल की सज़ा को बरकरार रखा है। यह आरोपी वर्द्धा जिले के हिंगणघाट का रहने वाला है। इस व्यक्ति ने 5 और 6 साल की दो बच्चियों को अमरूद का लालच देकर अपने पास बुलाया था। इसके बाद आरोपी ने उन्हें अश्लील वीडियो दिखाए और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी।

'सेक्शुअल इंटेंशन' से छूना भी रेप: कोर्ट

इस मामले पर जस्टिस निवेदिता मेहता ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता को किसी भी तरह से 'सेक्शुअल इंटेंशन' से छूने या फिर सेक्स की कोशिश करने से भी मामला सीधे 'रेप' की श्रेणी में आ जाता है। आरोपी पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट के साथ-साथ आईपीसी की धारा 376 (2) (i) और 511 के तहत केस दर्ज किया गया था। निचली अदालत ने उसे सजा के साथ-साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

चोट का निशान न होना, अपराध न होने का सबूत नहीं

आरोपी ने अपनी सजा के ख़िलाफ़ याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि पीड़िता के परिवार से पुरानी दुश्मनी के कारण उस पर झूठे और निराधार आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को ख़ारिज कर दिया।

जस्टिस मेहता ने कहा कि पीड़िताओं और उनकी माँ के बयानों के साथ-साथ फॉरेंसिक सबूतों से स्पष्ट होता है कि यौन उत्पीड़न की कोशिश हुई थी। उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि 'घटना के 15 दिन बाद मेडिकल एग्जामिनेशन होने की वजह से पीड़िता के प्राइवेट पार्ट पर चोट का निशान नहीं मिला। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आरोपी ने यौन उत्पीड़न नहीं किया।'

सजा में नहीं मिली कोई रियायत

कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि आरोपी को सज़ा घटना के समय लागू पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत ही मिलनी चाहिए. बेंच ने कहा कि आरोपी को दी गई 10 साल की सश्रम कैद की सजा पर्याप्त है और इसमें किसी तरह की रियायत नहीं दी गई। भले ही अगस्त 2019 में कानून में सुधार के बाद कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान किया गया था, लेकिन इस मामले में पहले के कानून के मुताबिक सज़ा दी गई है, जिसे कोर्ट ने उचित माना है. यह फ़ैसला बाल यौन शोषण के मामलों में सख़्त रुख़ अपनाने की कोर्ट की मंशा को दर्शाता है।

Tags:    

Similar News