CM शुभेंदु के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी नंदीग्राम सीट, ममता से मुकाबले ने कैसे बदले सियासी समीकरण?
Nandigram Bypoll: नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी की राजनीति से गहराई से जुड़ी सीट है। ममता बनर्जी को हराने से लेकर मुख्यमंत्री बनने के बाद हो रहे उपचुनाव तक, जानिए क्यों यह सीट उनके लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है।
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Nandigram Bypoll: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए बेहद अहम राजनीतिक परीक्षा बन गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद नंदीग्राम में यह उनकी पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है और उपचुनाव से पहले यहां जिस तरह के घटनाक्रम सामने आए हैं, उसने मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है। 6 अक्टूबर को नंदीग्राम के साथ रेजीनगर सीट पर भी उपचुनाव होना है।
नंदीग्राम में शुक्रवार को कुछ ही घंटों के भीतर कई बड़े घटनाक्रम हुए। ममता बनर्जी के खेमे ने पहले संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद संचिता ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान कर दिया। समर्थन के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले ममता का उम्मीदवार मैदान से हटा
नंदीग्राम उपचुनाव (Nandigram Bypoll) में ममता बनर्जी के खेमे ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन शुक्रवार को उन्होंने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। यह फैसला उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद लिया। उनके नामांकन वापस लेने की वजह तत्काल स्पष्ट नहीं की गई।
संचिता के मैदान से हटने के बाद ममता बनर्जी के खेमे के सामने नंदीग्राम में उम्मीदवार का संकट खड़ा हो गया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। इस तरह नंदीग्राम में कांग्रेस और ममता के खेमे के बीच चुनावी तालमेल की तस्वीर सामने आई।
ममता के समर्थन के बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार
ममता बनर्जी के समर्थन के ऐलान के कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हो गई। उन्हें 2007 से जुड़े एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक मामला नंदीग्राम के 2007 के घटनाक्रम से जुड़ा है।
कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि मिलन प्रधान के खिलाफ पुराने मामले पहले से मौजूद थे, ऐसे में नामांकन दाखिल करने और ममता बनर्जी के समर्थन के तुरंत बाद गिरफ्तारी क्यों हुई, यह सवाल उठता है। वहीं बीजेपी की ओर से इन राजनीतिक आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया है कि पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई की है और गिरफ्तारी का राजनीति से कोई संबंध नहीं है।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि पुराने मामले का इस्तेमाल विपक्षी उम्मीदवार को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर मामला बताया है।
यही वजह है कि नंदीग्राम का उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। नामांकन वापसी, ममता का कांग्रेस को समर्थन और उसके बाद उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
शुभेंदु ने खेला इमोशनल कार्ड
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में भावनात्मक जुड़ाव वाला दांव चला है। बीजेपी ने यहां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। हसीरानी रथ, शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की 6 मई को मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की जांच सीबीआई कर रही है।
इस उम्मीदवार के जरिए शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के चुनाव को अपने पुराने राजनीतिक रिश्ते और चंद्रनाथ रथ की हत्या से जोड़ने वाला भावनात्मक पक्ष भी सामने रखा है।
नंदीग्राम से शुरू हुई थी शुभेंदु की बड़ी सियासत
नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी की राजनीति के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। उनकी राजनीतिक सक्रियता को नंदीग्राम आंदोलन से भी जोड़ा जाता है। इसी इलाके में उन्होंने ममता बनर्जी के साथ किसानों की जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन किया था।
उस दौर के आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव पैदा किया। इसके बाद राज्य में लंबे समय से चली आ रही वाम मोर्चे की सरकार का अंत हुआ और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी।
शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी लंबे समय तक राजनीतिक रूप से साथ रहे, लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए। इसके बाद नंदीग्राम ही दोनों नेताओं के बीच सीधे राजनीतिक मुकाबले का बड़ा मैदान बन गया।
2021 में ममता को ही हरा चुके हैं अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी राजनीतिक गुरु ममता बनर्जी के खिलाफ इसी सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें हरा दिया। इस चुनाव के बाद नंदीग्राम की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई।
2026 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा। उन्होंने दोनों जगह जीत दर्ज की, लेकिन बाद में भवानीपुर सीट को अपने पास रखा और नंदीग्राम सीट छोड़ दी। इसी वजह से अब नंदीग्राम में उपचुनाव हो रहा है।
अब नंदीग्राम में अधिकारी की पहली बड़ी परीक्षा
मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी के लिए नंदीग्राम का यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी सीट ने उनके राजनीतिक सफर को अलग पहचान दी है। अब उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार यहां उपचुनाव हो रहा है।
अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कई बड़े फैसले लिए हैं और राज्य में बदलाव की कोशिश की है। ऐसे में नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनावों के नतीजे उनकी सरकार के शुरुआती राजनीतिक दौर के संदर्भ में भी देखे जाएंगे।
हालांकि किसी उपचुनाव के नतीजे को सीधे तौर पर सरकार के पूरे कामकाज पर जनता की राय मानना अलग राजनीतिक व्याख्या का विषय होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि नंदीग्राम में मुकाबला लगातार घटनाओं की वजह से बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।
6 अक्टूबर को होगा मुकाबला
नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नंदीग्राम में एक तरफ बीजेपी की ओर से हसीरानी रथ मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उनके चुनावी अभियान और आगे की कानूनी स्थिति पर नजर रहेगी। ममता बनर्जी का खेमा पहले ही कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर चुका है।
ऐसे में नंदीग्राम में चुनाव से पहले घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। ममता के उम्मीदवार का नामांकन वापस लेना, कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन मिलना और उसके कुछ ही घंटे बाद उनकी गिरफ्तारी ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है। दूसरी ओर शुभेंदु अधिकारी ने अपने पूर्व सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाकर नंदीग्राम से अपने पुराने जुड़ाव और भावनात्मक मुद्दे को भी चुनावी मैदान में ला दिया है। अब 6 अक्टूबर का मतदान इस पूरी राजनीतिक कहानी का अगला बड़ा पड़ाव होगा।