हेमंत सोरेन ने MMDR को बताया 'काला बिल', PM Modi को पत्र लिख कर दी ये बड़ी मांग
लोकसभा और राज्यसभा से MMDR Amendment Bill 2026 पास होने के बाद झारखंड में इसका विरोध तेज हो गया है। CM सोरेन ने कहा कि खनिज और जमीन झारखंड की है, इसलिए राज्य के अधिकारों से जुड़े फैसले दिल्ली से नहीं होने चाहिए।
Hemant Soren: खान और खनिज से जुड़े Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को संसद की मंजूरी मिलने के बाद झारखंड में सियासी विवाद तेज हो गया है। लोकसभा ने बुधवार को इस विधेयक को पास किया, जबकि राज्यसभा ने गुरुवार को इसे मंजूरी दे दी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
विधेयक के संसद से पास होने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इस कानून को झारखंड और झारखंड के लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। इसके साथ ही उन्होंने इस बिल को लेकर पीएम मोदी को भी पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बिल पर पुनर्विचार की मांग की है।
पीएम मोदी से पुनर्विचार की कर दी मांग
हेमंत सोरेन ने अपने X हैंडल पर लिखा, 'PM Modi को पत्र लिखकर Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 पर पुनर्विचार हेतु आग्रह किया। प्रस्तावित प्रावधान झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों के संवैधानिक अधिकारों, राजस्व, विकास और संघीय ढांचे पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।'
उन्होंने आगे लिखा, 'झारखंड के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों और राज्य की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए मैं विनम्र अनुरोध करता हूं कि केंद्र सरकार इन प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की कृपा करें।'
माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी को पत्र लिखकर Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 पर पुनर्विचार हेतु आग्रह किया। प्रस्तावित प्रावधान झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों के संवैधानिक अधिकारों, राजस्व, विकास और संघीय ढांचे पर गंभीर… pic.twitter.com/WfOqNFSq7S
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 13, 2026
‘खनिज और जमीन झारखंड की, फैसला दिल्ली क्यों करेगी?’
हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि झारखंड के खनिज और जमीन पर राज्य के लोगों का अधिकार है। ऐसे में उनके हक और अधिकार से जुड़े फैसले दिल्ली से क्यों किए जाएं?
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि विधेयक को जल्दबाजी में लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया गया है। सोरेन ने इसे झारखंड के अधिकारों को कमजोर करने वाला कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज झारखंड का है, जमीन झारखंड की है, तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी? उन्होंने विधेयक को ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि झारखंड इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगा।
झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा....
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 13, 2026
खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?
लोकसभा और राज्यसभा - दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों… pic.twitter.com/s3VzpacCbN
झारखंड में बड़े आंदोलन की चेतावनी
हेमंत सोरेन ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो झारखंड में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका विरोध सिर्फ राजधानी या कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। हर जिले, हर प्रखंड, हर पंचायत और हर शहर में आंदोलन किया जाएगा।
झारखंड के पास देश के करीब 40% खनिज
झारखंड को देश के सबसे महत्वपूर्ण खनिज संपदा वाले राज्यों में गिना जाता है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट समेत कई महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के पास देश के कुल खनिज संसाधनों का करीब 40 फीसदी हिस्सा है। यही वजह है कि खनन और खनिज से जुड़े कानूनों में बदलाव का राज्य की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर बड़ा असर माना जाता है। सोरेन का कहना है कि राज्य की खनिज संपदा से मिलने वाले संसाधनों का फायदा झारखंड के लोगों और राज्य के विकास में होना चाहिए।
संसद में पूरी हुई विधेयक की प्रक्रिया
MMDR Amendment Bill 2026 को केंद्र सरकार ने संसद में पेश किया था। लोकसभा ने बुधवार को इसे मंजूरी दी और अगले दिन यानी गुरुवार को राज्यसभा ने भी विधेयक को पास कर दिया। इस तरह विधेयक के लिए संसद की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।
केंद्र और झारखंड सरकार के बीच बढ़ सकता है टेंशन
विधेयक के पास होने के बाद केंद्र और झारखंड सरकार के बीच राजनीतिक टेंशन बढ़ने के आसार हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिस तरह राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है, उससे साफ है कि JMM इस मुद्दे को बड़े राजनीतिक अभियान में बदलने की तैयारी में है।
झारखंड सरकार का मुख्य तर्क राज्य के खनिज संसाधनों और उनसे जुड़े अधिकारों को लेकर है। वहीं, केंद्र सरकार का विधेयक खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों में बदलाव से संबंधित है। अब देखना होगा कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद झारखंड सरकार और JMM इस कानून के खिलाफ किस तरह की राजनीतिक और कानूनी रणनीति अपनाते हैं।