70 लाख रुपये, फिक्स इंटरव्यू और नौकरी पक्की... JPSC परीक्षा घोटाले में CID के सामने आरोपी ने बताई सेटिंग की पूरी कहानी

Jharkhand: JPSC भर्ती धांधली मामले में गिरफ्तार अभय तिवारी ने CID के सामने कथित भर्ती रैकेट को लेकर बड़े दावे किए हैं। CID अब बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।

Update:2026-08-13 14:06 IST

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Jharkhand News: झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। JPSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID को गिरफ्तार किए गए एक आरोपी से पूछताछ में भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर सेटिंग का पता चला है।

CID के अनुसार, TDPL नाम की परीक्षा कराने वाली एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को एजेंट और बिचौलियों के जरिए परीक्षा एजेंसी तथा JPSC से जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाता था।

60 से 70 लाख रुपये में नौकरी पक्की

आरोप है कि इसके बाद अभ्यर्थियों से उनकी जरूरत और परीक्षा के अलग-अलग चरणों के हिसाब से रकम तय की जाती थी। कथित तौर पर इंटरव्यू बोर्ड ‘फिक्स’ कराने के नाम पर लाखों रुपये लिए जाते थे और चयन तक यह रकम 60 से 70 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।

इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने का कथित खेल

अभय तिवारी के बयान के अनुसार, कथित नेटवर्क में इंटरव्यू को सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता था। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को उनकी पसंद के बोर्ड तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थी का कोड कथित तौर पर डिकोड किया जाता था और फिर उसे किसी खास बोर्ड के सामने भेजने की व्यवस्था होती थी। इसके बाद इंटरव्यू में अधिक अंक दिलाकर चयन में मदद करने का कथित खेल चलता था।

तीन चयनित अधिकारियों के नाम भी बताए

सूत्रों के मुताबिक, अभय तिवारी ने कथित तौर पर कुछ ऐसे अधिकारियों के नाम भी बताए हैं, जिनका चयन इस नेटवर्क के जरिए होने का दावा किया गया है। इनमें पुलिस अधीक्षक, DSP और डिप्टी जेलर स्तर के अधिकारियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन उम्मीदवारों को एजेंटों के जरिए नेटवर्क तक पहुंचाया गया और बाद में इंटरव्यू बोर्ड को लेकर कथित तौर पर व्यवस्था की गई।

पैसे के लेनदेन की भी जांच

CID अब सिर्फ बयानों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। जांच एजेंसी कथित लेनदेन की पुष्टि के लिए बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत, इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेज और अन्य गवाहों की जानकारी खंगाल रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर पैसे किसके जरिए और किन लोगों तक पहुंचाए गए।

JPSC के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार, तीन सदस्यों से पूछताछ

इस मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। इसके बाद आयोग की तीन सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनीमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। CID ने इन पूर्व सदस्यों को पूछताछ के लिए बुलाया है। एजेंसी पहले ही डॉ. अजीता भट्टाचार्य और डॉ. जमाल अहमद से परीक्षा में कथित गड़बड़ी, आयोग के कामकाज और पूर्व अध्यक्ष से जुड़े मामलों पर पूछताछ कर चुकी है।

छात्रों का आंदोलन भी जारी

इस बीच JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ रांची में छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षाओं में पारदर्शिता, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

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