Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज 2026 पर ऐसे करें पूजा, जानें जरूरी सामग्री और व्रत से जुड़े नियम

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज 2026 पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। जानें तीज की तारीख, पूजा विधि, सामग्री और व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान।

Update:2026-08-06 22:46 IST

Hariyali Teej 2026  (Image Credit-Social Media)

Hariyali Teej 2026: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी महीने में आने वाला हरियाली तीज महिलाओं के प्रमुख पर्वों में शामिल है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। अविवाहित महिलाएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।

साल 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम तक रहेगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि हरियाली तीज और हरतालिका तीज अलग-अलग पर्व हैं। हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को आती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। इसलिए दोनों व्रतों की तिथि और पूजा परंपराओं को एक-दूसरे से अलग रखना जरूरी है।

क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

इसी वजह से हरियाली तीज को दांपत्य सुख और पति-पत्नी के प्रेम से जुड़े पर्व के तौर पर भी देखा जाता है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

हरियाली तीज के मौके पर हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनने, हाथों में मेहंदी लगाने और झूला झूलने की भी परंपरा है। सावन की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला यह पर्व महिलाओं के लिए उत्सव और धार्मिक आस्था का खास अवसर होता है।

हरियाली तीज की पूजा के लिए क्या-क्या चाहिए?

हरियाली तीज की पूजा के लिए पहले से सामग्री तैयार कर लेना बेहतर रहता है। पूजा की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है:

  • भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर
  • गणेश जी की प्रतिमा
  • पूजा की चौकी और पीला या साफ कपड़ा
  • गंगाजल
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • शमी पत्र
  • अक्षत
  • दूर्वा
  • नारियल और सुपारी
  • कलश
  • पंचामृत
  • गाय का दूध
  • घी और कपूर
  • केले के पत्ते
  • फूल और फल
  • मिठाई
  • माता पार्वती के लिए सोलह श्रृंगार की सामग्री
  • मेहंदी और हरी चूड़ियां

पूजा सामग्री में स्थानीय परंपरा के अनुसार कुछ चीजें कम या ज्यादा हो सकती हैं।

हरियाली तीज की पूजा विधि

हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत का संकल्प लें।

इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करें। चौकी पर साफ या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

सबसे पहले करें गणेश पूजन

किसी भी शुभ पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। इसलिए सबसे पहले गणेश जी का ध्यान कर उनका पूजन करें और व्रत को निर्विघ्न पूरा करने की प्रार्थना करें।

शिव-पार्वती का करें पूजन

इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को जल, गंगाजल, दूध, पंचामृत, अक्षत, फूल और बेलपत्र आदि अर्पित करें। पूजा सामग्री अपनी स्थानीय परंपरा और उपलब्धता के अनुसार अर्पित की जा सकती है।

माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना भी इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाएं।

अंत में हरियाली तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और भगवान शिव-माता पार्वती की आरती करें। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटें।

हरियाली तीज पर किन बातों का रखें ध्यान?

हरियाली तीज के व्रत और पूजा को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। इसलिए किसी एक नियम को सभी के लिए अनिवार्य मानना उचित नहीं है। फिर भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है।

क्रोध और विवाद से बचें

व्रत के दिन मन को शांत रखने और भगवान शिव-माता पार्वती का ध्यान करने की परंपरा है। इसलिए अनावश्यक क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने की सलाह दी जाती है।

पूजा में रखें श्रद्धा और संयम

हरियाली तीज केवल व्रत रखने का पर्व नहीं है, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना और दांपत्य सुख की कामना से जुड़ा धार्मिक अवसर है। इसलिए पूजा के दौरान श्रद्धा और संयम बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

हरे रंग और सोलह श्रृंगार की परंपरा

हरियाली तीज पर हरे रंग के वस्त्र, हरी चूड़ियां और मेहंदी लगाने की परंपरा कई क्षेत्रों में लोकप्रिय है। महिलाएं माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करती हैं और स्वयं भी श्रृंगार करती हैं।

क्या हरियाली तीज पर निर्जला व्रत जरूरी है?

हरियाली तीज के व्रत को लेकर कई जगह निर्जला उपवास की परंपरा है, लेकिन व्रत रखने का तरीका परिवार, क्षेत्र और व्यक्तिगत धार्मिक मान्यता के अनुसार अलग हो सकता है।

स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है। धार्मिक नियमों के संबंध में स्थानीय पंडित या आचार्य से भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

हरियाली तीज और हरतालिका तीज में अंतर

हरियाली तीज और हरतालिका तीज को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, जबकि दोनों अलग पर्व हैं। हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आती है।

2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी। इसके बाद आने वाली अन्य तीजों की तिथि अलग होगी।

जरूरी डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक मान्यताएं और पूजा विधियां विभिन्न परंपराओं एवं मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा की विधि और व्रत के नियम क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी मामलों में धार्मिक मान्यता के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह को प्राथमिकता दें। न्यूज़ट्रैक इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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