Machar Kyu Katte Hai: कुछ लोगों को मच्छर ज्यादा क्यों काटते हैं? ब्लड ग्रुप, पसीना और गंध का कनेक्शन
Machar Kise Jyada Katte Hai: क्या मच्छर कुछ लोगों को ज्यादा काटते हैं? जानिए ब्लड ग्रुप, CO₂, शरीर की गर्मी, पसीना, त्वचा की गंध और कपड़ों के रंग का मच्छरों के आकर्षण से क्या संबंध है।
Machar Kise Jyada Katte Hai
Machar Kise Jyada Katte Hai: एक कमरे में कई लोग बैठे हों और एक मच्छर आ जाए तो अक्सर ऐसा होता है कि वह बाकी लोगों को छोड़कर किसी एक व्यक्ति के पीछे पड़ जाता है। थोड़ी देर में वही व्यक्ति हाथ-पैर खुजला रहा होता है और बाकी लोग सोच रहे होते हैं कि आखिर मच्छर इसे ही क्यों काट रहा है। आम बोलचाल में इसका जवाब दिया जाता है कि ‘इसका खून मीठा है।‘ लेकिन विज्ञान के मुताबिक ऐसा कुछ नहीं है। मच्छर यह पहचानने नहीं आता कि किसका खून मीठा है। वह इंसान को उसकी सांस, शरीर की गर्मी, पसीने और त्वचा से निकलने वाली खास गंध के जरिए ढूंढता है। ब्लड ग्रुप भी कुछ हद तक फर्क डाल सकता है।
मच्छर हमें ढूंढता कैसे है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मच्छर इंसान को ढूंढता कैसे है। मच्छर की नजर इंसानों जैसी नहीं होती। वह सिर्फ देखकर हमारा पीछा नहीं करता, बल्कि आसपास की हवा में मौजूद कई तरह के संकेतों को पकड़ता है। इनमें सबसे अहम है कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)। हम जब सांस लेते हैं तो ऑक्सीजन अंदर लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ते हैं। हमारे आसपास की सामान्य हवा की तुलना में इंसान के मुंह और शरीर के आसपास कार्बन डाईऑक्साइड (CO₂) की मात्रा ज्यादा होती है। मच्छर अपने खास संवेदी अंगों की मदद से इस बदलाव को महसूस कर सकता है। यानी दूर से ही उसे एक तरह का संकेत मिल जाता है कि आसपास कोई जीवित इंसान मौजूद है।
सिर्फ सांस नहीं, शरीर की गर्मी भी खींचती है
लेकिन सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड मच्छर को हमारे शरीर तक नहीं पहुंचाती। उसे यह भी पता लगाना होता है कि इंसान ठीक किस जगह है। यहां शरीर की गर्मी और त्वचा की गंध काम आती है। इंसान का शरीर लगातार गर्मी छोड़ता रहता है और मच्छर इस गर्मी को महसूस कर सकता है। वह कई संकेतों को एक साथ इस्तेमाल करता है। पहले कार्बन डाईऑक्साइड उसे इंसान की मौजूदगी का संकेत देती है, फिर शरीर की गर्मी और त्वचा से निकलने वाली गंध उसे करीब आने में मदद करती है।
पसीने की गंध मच्छर को क्यों आकर्षित करती है?
अब पसीने की बात करें तो यहां मामला और दिलचस्प हो जाता है। पसीना सिर्फ पानी नहीं होता। इसमें कई तरह के रसायन होते हैं और हमारी त्वचा पर रहने वाले बैक्टीरिया इन पदार्थों को बदलकर अलग-अलग गंध पैदा कर सकते हैं। इंसान को इनमें से बहुत-सी गंध महसूस भी नहीं होती, लेकिन मच्छर के लिए ये महत्वपूर्ण संकेत हो सकती हैं।
यही वजह है कि गर्मी में ज्यादा पसीना आने पर या व्यायाम करके आने के बाद कुछ लोगों को मच्छर ज्यादा परेशान कर सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि जिसे ज्यादा पसीना आएगा, उसे हर बार ज्यादा मच्छर ही काटेंगे। मच्छर कई संकेतों को एक साथ देखकर अपना लक्ष्य चुनता है।
हर इंसान की त्वचा की गंध अलग क्यों होती है?
हर इंसान की त्वचा की अपनी एक अलग रासायनिक पहचान भी होती है। हमारी त्वचा पर कई तरह के पदार्थ मौजूद रहते हैं और वहां रहने वाले सूक्ष्मजीव इनके साथ मिलकर अलग-अलग रसायन बनाते हैं। इसी वजह से दो लोगों की त्वचा से निकलने वाली गंध एक जैसी नहीं होती। हो सकता है कि आपको अपनी त्वचा से कोई खास गंध महसूस न हो, लेकिन मच्छर उसे आसानी से पहचान ले। कुछ लोगों की त्वचा से निकलने वाले रासायनिक संकेत मच्छरों को दूसरों की तुलना में ज्यादा आकर्षित कर सकते हैं। इसलिए एक ही कमरे में बैठे लोगों में से किसी एक को बार-बार मच्छर काटना सिर्फ संयोग नहीं हो सकता।
क्या ब्लड ग्रुप से भी फर्क पड़ता है?
क्या मच्छर किसी खास ब्लड ग्रुप वाले लोगों को ज्यादा काटते हैं? कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि कुछ मच्छर प्रजातियां कुछ ब्लड ग्रुप वाले लोगों की ओर दूसरों की तुलना में ज्यादा आकर्षित हो सकती हैं। खासकर कुछ शोधों में ओ (O) ब्लड ग्रुप वाले लोगों के प्रति अधिक आकर्षण देखा गया है, जबकि ए (A) ब्लड ग्रुप की तुलना में यह आकर्षण ज्यादा हो सकता है। बी (B) ब्लड ग्रुप कई मामलों में बीच में दिखाई देता है।
लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि अगर आपका ब्लड ग्रुप O है तो मच्छर आपको जरूर ज्यादा काटेंगे। ब्लड ग्रुप सिर्फ एक कारक है। मच्छर की प्रजाति, आसपास का तापमान, शरीर की गंध, CO₂ और कई दूसरे संकेत भी उसके व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
मीठा खून वाली बात कितनी सही है?
“मेरा खून मीठा है, इसलिए मच्छर मुझे ज्यादा काटते हैं”, यह बात वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। मच्छर हमारे खून का स्वाद चखकर यह फैसला नहीं करता कि कौन ज्यादा स्वादिष्ट है। वह पहले हमें ढूंढता है और इसके लिए हवा में मौजूद संकेतों का इस्तेमाल करता है। CO₂ उसे हमारी मौजूदगी का पता देती है, शरीर की गर्मी उसे करीब आने में मदद करती है और त्वचा से निकलने वाले रसायन और गंध उसे सही जगह तक पहुंचाते हैं। इसके बाद वह त्वचा पर बैठकर खून तक पहुंचता है।
इंसानों का खून आखिर मादा मच्छर ही क्यों पीती है?
वैसे इंसानों का खून पीने वाली मादा मच्छर होती है। नर मच्छर आम तौर पर इंसानों को नहीं काटते। मादा मच्छर को अंडे बनाने के लिए खून में मौजूद कुछ पोषक तत्वों की जरूरत होती है। यानी उसका यह व्यवहार सिर्फ भूख मिटाने के लिए नहीं, बल्कि उसके प्रजनन से जुड़ा हुआ है। नर मच्छर आम तौर पर फूलों और पौधों से मिलने वाले रस जैसी चीजों से ऊर्जा लेते हैं।
क्या ज्यादा सांस लेने वाले लोगों को ज्यादा मच्छर काट सकते हैं?
यह बात कुछ हद तक सही हो सकती है, क्योंकि सांस से CO₂ निकलती है। व्यायाम करने, दौड़ने या कोई मेहनत का काम करने के बाद सांस तेज हो जाती है और शरीर से CO₂ का उत्सर्जन भी बढ़ सकता है। साथ ही शरीर गर्म हो जाता है और पसीना भी निकलता है। यानी उस समय शरीर से मच्छर को मिलने वाले कई संकेत एक साथ बदल जाते हैं। यही वजह है कि व्यायाम के बाद या गर्म वातावरण में मच्छर कुछ लोगों की ओर ज्यादा आकर्षित हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मच्छर हमेशा उसी व्यक्ति को चुनेगा जो सबसे ज्यादा CO₂ छोड़ रहा है। करीब आने के बाद उसे गंध और शरीर की गर्मी जैसे दूसरे संकेत भी मिलते हैं।
क्या गर्भवती महिलाओं को मच्छर ज्यादा काटते हैं?
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं। कुछ अध्ययनों में गर्भवती महिलाओं के प्रति मच्छरों के अधिक आकर्षण के संकेत मिले हैं। इसके पीछे शरीर का तापमान, रक्त प्रवाह और CO₂ उत्सर्जन जैसे बदलावों की भूमिका हो सकती है। हालांकि यहां भी मच्छर की प्रजाति और आसपास की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए इसे हर गर्भवती महिला पर लागू होने वाला पक्का नियम नहीं माना जा सकता।
क्या कपड़ों का रंग भी मच्छर को आकर्षित करता है?
मच्छर के लिए सिर्फ गंध ही मायने नहीं रखती। कुछ मच्छर दृश्य संकेतों का भी इस्तेमाल करते हैं और गहरे रंग उन्हें ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकते हैं। इसलिए खुले में मच्छरों से बचने के लिए हल्के रंग के कपड़े पहनने की सलाह कई बार दी जाती है। लेकिन सिर्फ कपड़ों का रंग बदल लेने से मच्छर आपको काटना बंद नहीं कर देंगे। शरीर से निकलने वाली कार्बन डाईऑक्साइड, गर्मी और गंध जैसे संकेत लगातार उन्हें आपकी तरफ खींच सकते हैं।
एक ही कमरे में किसी एक को ही ज्यादा क्यों काटता है?
अगर एक कमरे में पांच लोग बैठे हैं और मच्छर के सामने पांच अलग-अलग शरीर हैं। किसी व्यक्ति से ज्यादा कार्बन डाईऑक्साइड निकल रही हो सकती है। किसी का शरीर थोड़ा ज्यादा गर्म हो सकता है। किसी को ज्यादा पसीना आ रहा हो सकता है। किसी की त्वचा पर रहने वाले बैक्टीरिया अलग तरह के रसायन बना सकते हैं। किसी का ब्लड ग्रुप भी कुछ मच्छर प्रजातियों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकता है। इन सबके ऊपर मच्छर की अपनी प्रजाति, कमरे का तापमान, नमी और हवा भी उसके व्यवहार को प्रभावित करते हैं। यानी हर इंसान मच्छर के लिए एक तरह का अलग “रासायनिक पता” लेकर घूम रहा होता है। मच्छर उसी पते को पढ़कर अपने लक्ष्य तक पहुंचता है।
ज्यादा मच्छर काटना और बीमारी का खतरा एक बात नहीं
एक जरूरी फर्क समझना भी जरूरी है। अगर आपको मच्छर ज्यादा काटते हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि आपको मच्छर से होने वाली बीमारी भी जरूर होगी। बीमारी फैलाने के लिए मच्छर की खास प्रजाति, उसके अंदर मौजूद वायरस या परजीवी और कई दूसरी परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं। भारत में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां अलग-अलग मच्छर प्रजातियों और रोगजनकों से जुड़ी हैं। इसलिए ‘मुझे मच्छर ज्यादा काटते हैं’ और ‘मुझे मच्छर से बीमारी होने का खतरा ज्यादा है’ - दोनों अलग बातें हैं।
आखिर मच्छर आपको ही क्यों चुनता है?
आखिर में ‘मच्छर मुझे ही क्यों काटता है? का सबसे सही जवाब यही है कि मच्छर आपको आपके खून के स्वाद से नहीं, बल्कि आपके शरीर से निकलने वाले संकेतों से ढूंढता है। आपकी हर सांस से निकलने वाली कार्बन डाईऑक्साइड, शरीर की गर्मी, पसीना और त्वचा की अपनी खास रासायनिक गंध उसके लिए अलग-अलग संकेत हैं। ब्लड ग्रुप भी इस खेल में कुछ भूमिका निभा सकता है, लेकिन वह अकेला फैसला नहीं करता। यानी मच्छर के लिए आप ‘मीठे खून वाले इंसान’ नहीं हैं। आप बस एक ऐसा शरीर हैं जो उसकी सूंघने और महसूस करने की क्षमता को बाकी लोगों की तुलना में थोड़ा ज्यादा आकर्षित कर रहा है।