भारत में EV की ऐसी आंधी, अक्टूबर में टूटे सारे रिकॉर्ड; यूपी बना नंबर-1

Electric Vehicle Sales October 2026: अक्टूबर 2026 में भारत में 3.54 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हुए, जो अब तक का रिकॉर्ड है। जनवरी से अक्टूबर तक 28.92 लाख रजिस्ट्रेशन के साथ उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा।

Update:2026-11-02 11:37 IST

Electric Vehicle Sales October 2026

Electric Vehicle Sales October 2026: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की मांग तेजी से बढ़ रही है। अक्टूबर 2026 में देशभर में करीब 3.54 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण (Registration) हुआ, जो किसी एक महीने में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले साल अक्टूबर में लगभग 2.45 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हुए थे। इस लिहाज से एक साल में करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। त्योहारों के दौरान बढ़ी खरीदारी, नए मॉडल, पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कम परिचालन खर्च और सरकारी प्रोत्साहन (Government Incentives) इस तेजी की प्रमुख वजह माने जा रहे हैं। खास बात यह है कि लगातार पांचवें महीने इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण तीन लाख के आंकड़े से ऊपर रहा है। हालांकि, ये वाहन पोर्टल पर उपलब्ध शुरुआती आंकड़े हैं। देरी से दर्ज होने वाले पंजीकरण जुड़ने के बाद अंतिम संख्या में बदलाव हो सकता है।

इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की सबसे ज्यादा मांग

भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में दोपहिया वाहनों (Electric Two-Wheelers) की हिस्सेदारी सबसे अधिक बनी हुई है। अक्टूबर 2026 में करीब 2.24 लाख इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल का पंजीकरण हुआ। अक्टूबर 2025 में यह संख्या लगभग 1.51 लाख थी। इस तरह सालाना आधार पर करीब 48 से 50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सितंबर 2026 में लगभग 2.09 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन रजिस्टर्ड हुए थे।

आंकड़े बताते हैं कि नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और शहरों में रोजाना सफर करने वाले उपभोक्ताओं के बीच इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की लोकप्रियता बढ़ रही है। कम चार्जिंग खर्च, घर पर चार्ज करने की सुविधा और दैनिक जरूरतों के हिसाब से उपलब्ध मॉडल इसकी बड़ी वजह हैं। हालांकि, ग्राहक वाहन खरीदने से पहले बैटरी की गुणवत्ता, सर्विस नेटवर्क, रीसेल वैल्यू (Resale Value) और चार्जिंग सुविधाओं को भी ध्यान में रख रहे हैं।

इलेक्ट्रिक कारों की मांग में सालाना 75% उछाल

इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों (Electric Passenger Vehicles) के बाजार में भी अक्टूबर के दौरान अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। एक नवंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में करीब 36,640 इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों का पंजीकरण हुआ। अक्टूबर 2025 के मुकाबले यह लगभग 75 फीसदी अधिक है।

हालांकि, सितंबर 2026 के संशोधित आंकड़े से तुलना करें तो अक्टूबर में इलेक्ट्रिक कारों के पंजीकरण में करीब चार फीसदी की गिरावट रही। सितंबर में लगभग 38,321 इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन रजिस्टर्ड हुए थे। इससे साफ है कि सालाना मांग में तेजी के बावजूद महीने-दर-महीने बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

टाटा मोटर्स, महिंद्रा, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर और अन्य कंपनियों के नए मॉडलों से ग्राहकों के सामने विकल्प बढ़े हैं। हालांकि, अक्टूबर के अलग-अलग समय पर जारी वाहन पोर्टल के आंकड़ों में अंतर देखने को मिला है। इसलिए कंपनियों की अंतिम बाजार हिस्सेदारी (Market Share) का आकलन संशोधित पंजीकरण आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

दस महीनों में करीब 29 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड, यूपी सबसे आगे

जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच देश में करीब 28.92 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ है। पिछले साल इसी अवधि में लगभग 19.15 लाख वाहन रजिस्टर्ड हुए थे। इस तरह सालाना आधार पर करीब 51 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सबसे आगे है। यहां 2026 के शुरुआती दस महीनों में चार लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए। इसके बाद महाराष्ट्र में करीब 3.28 लाख, कर्नाटक में 2.60 लाख और तमिलनाडु में लगभग 2.40 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ।

उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहनों (Electric Three-Wheelers) और ई-रिक्शा की बड़ी संख्या भी कुल पंजीकरण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, किसी राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल संख्या अधिक होना और वहां कुल वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी ज्यादा होना अलग-अलग बातें हैं।

 सरकार ने बढ़ाया पीएम ई-ड्राइव योजना का बजट

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना (PM E-DRIVE Scheme) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सितंबर 2024 में शुरू की गई इस योजना का वित्तीय प्रावधान अगस्त 2026 में एक हजार करोड़ रुपये बढ़ाकर 11,900 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके साथ ही अधिकांश पात्र श्रेणियों के लिए योजना की अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ाई गई है।

योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, पात्र तीनपहिया वाहन, ई-बस, ई-ट्रक, ई-एम्बुलेंस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) को बढ़ावा देने के लिए सहायता का प्रावधान है। सार्वजनिक परिवहन के लिए 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार को भी इसमें शामिल किया गया है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि योजना के तहत सभी निजी इलेक्ट्रिक कारों को सीधे खरीद सब्सिडी नहीं मिलती। अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए सहायता की पात्रता और अवधि अलग निर्धारित की गई है।

चार्जिंग स्टेशन और बैटरी की कीमत बनी बड़ी चुनौती

इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद इस बाजार के सामने कई चुनौतियां हैं। बड़े शहरों में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (Public Charging Stations) की संख्या बढ़ रही है, लेकिन छोटे शहरों, कस्बों और हाईवे पर अभी भी बेहतर चार्जिंग नेटवर्क की जरूरत है।

सिर्फ चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि ये स्टेशन सही तरीके से काम करें, वहां बिजली की उपलब्धता बनी रहे और भुगतान की व्यवस्था आसान हो। इसके अलावा वाहन और चार्जर के बीच तकनीकी अनुकूलता भी महत्वपूर्ण है।

इलेक्ट्रिक वाहन की कुल कीमत में बैटरी (Battery Cost) का बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में बैटरी की कीमत, उसकी वारंटी और भविष्य में उसे बदलने का खर्च ग्राहक के फैसले को प्रभावित करता है। दूसरी ओर, जिन लोगों का रोजाना सफर अधिक है और जिनके पास घर पर चार्जिंग की सुविधा है, उनके लिए इलेक्ट्रिक वाहन का प्रति किलोमीटर खर्च पेट्रोल-डीजल वाहनों के मुकाबले काफी कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत वाहन की कीमत, बिजली की दर, सालाना दूरी और रखरखाव पर निर्भर करती है।

क्या पेट्रोल-डीजल वाहनों का बाजार अब सिमटने लगेगा?

इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार (Automobile Market) में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पेट्रोल और डीजल वाहनों का दबदबा तुरंत खत्म हो जाएगा।

इलेक्ट्रिक दोपहिया और तीनपहिया वाहनों को अपनाने की रफ्तार अपेक्षाकृत तेज है, लेकिन निजी इलेक्ट्रिक कारों के मामले में खरीद मूल्य, लंबी दूरी की यात्रा और चार्जिंग सुविधाएं अब भी बड़ी चुनौतियां हैं। सितंबर 2026 में कुल नए वाहनों के पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी दर्ज की गई थी। इससे पता चलता है कि इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं, लेकिन कुल वाहन बाजार का बड़ा हिस्सा अभी भी दूसरे ईंधनों पर निर्भर है।

अक्टूबर 2026 का रिकॉर्ड भारतीय वाहन उद्योग के लिए एक अहम संकेत है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग अब केवल महानगरों और पर्यावरण को लेकर जागरूक सीमित ग्राहकों तक नहीं रह गई है। किफायती इलेक्ट्रिक दोपहिया, ई-रिक्शा, व्यावसायिक परिवहन और नए यात्री वाहन मॉडल इस बाजार को अलग-अलग आय वर्गों तक पहुंचा रहे हैं। आने वाले समय में इस वृद्धि की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि चार्जिंग नेटवर्क कितनी तेजी से विकसित होता है, बैटरी की लागत कितनी कम होती है और कंपनियां ग्राहकों को कितनी भरोसेमंद सर्विस उपलब्ध करा पाती हैं।

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