Newstrack Special: एक ही दिन में 16 बार उगता है सूरज! अंतरिक्ष यात्रियों की जिंदगी कैसी होती है?

Newstrack Special: ISS में अंतरिक्ष यात्री रोज 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं। जानिए अंतरिक्ष स्टेशन 90 मिनट में पृथ्वी का चक्कर कैसे लगाता है और वहां दिन-रात की गिनती कैसे होती है।

Update:2026-11-01 17:41 IST

Why Do Astronauts See 16 Sunrises a Day | How Many Sunrises on ISS | Newstrack Hindi News

ISS 16 Sunrises: कल्पना कीजिए कि आप सुबह उठें, खिड़की से बाहर देखें और सूरज निकलता हुआ दिखाई दे। कुछ ही देर बाद फिर शाम हो जाए, अंधेरा छा जाए और रात के बाद दोबारा सूर्योदय हो जाए। अब सोचिए कि यह सिलसिला एक ही दिन में 16 बार हो! सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यह बिल्कुल सामान्य बात है।

पृथ्वी पर हम 24 घंटे में एक बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं, जबकि ISS में मौजूद अंतरिक्ष यात्री लगभग हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेते हैं। इसी वजह से उन्हें रोजाना करीब 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त दिखाई देते हैं। लेकिन जब वहां इतनी बार दिन और रात होती है, तो अंतरिक्ष यात्रियों का सोने, जागने और काम करने का समय कैसे तय होता है?

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी की सतह से औसतन लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाता है। यह पृथ्वी के चारों ओर लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमता है। इतनी तेज गति के कारण यह पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगभग 90 मिनट में लगा लेता है।

जब ISS पृथ्वी के एक हिस्से के ऊपर से गुजरता है, तो वहां दिन होता है और स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को सूरज दिखाई देता है। जैसे ही स्टेशन पृथ्वी के दूसरी ओर पहुंचता है, वह पृथ्वी की छाया में चला जाता है और वहां रात जैसा अंधेरा हो जाता है। इसके बाद कुछ ही समय में स्टेशन फिर सूर्य की रोशनी वाले हिस्से में पहुंच जाता है और एक नया सूर्योदय दिखाई देता है।

इस तरह लगभग 90 मिनट में एक सूर्योदय और एक सूर्यास्त होता है। 24 घंटे में ISS पृथ्वी के लगभग 16 चक्कर लगाता है, इसलिए अंतरिक्ष यात्री एक दिन में करीब 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त देख सकते हैं।

क्या ISS में दिन और रात केवल 45-45 मिनट के होते हैं?

ISS की एक परिक्रमा में करीब 90 मिनट लगते हैं। इसमें लगभग 45 मिनट स्टेशन पृथ्वी की धूप वाले हिस्से में और करीब 45 मिनट पृथ्वी की छाया में रह सकता है। हालांकि यह समय उसकी कक्षा और सूर्य के सापेक्ष स्थिति के अनुसार थोड़ा बदलता रहता है।

जब स्टेशन सूर्य की सीधी रोशनी में होता है, तो बाहर का नजारा बेहद चमकीला दिखाई देता है। लेकिन जैसे ही वह पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, सूर्य अचानक दिखाई देना बंद हो जाता है। अंतरिक्ष में वातावरण लगभग नहीं होने के कारण वहां पृथ्वी जैसा नीला आसमान और धीरे-धीरे बदलती शाम नहीं होती। सूर्य का दिखाई देना और छिपना अपेक्षाकृत तेजी से होता है।

फिर ISS में दिन-रात की गिनती कैसे होती है?

पृथ्वी पर अलग-अलग देशों में समय अलग होता है। अगर हर देश के स्थानीय समय के अनुसार अंतरिक्ष यात्रियों का काम तय किया जाए, तो उनके लिए एक व्यवस्थित दिनचर्या बनाना मुश्किल हो जाएगा।

इसलिए ISS पर समय का निर्धारण आमतौर पर कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) के अनुसार किया जाता है। यह दुनिया भर में समय के समन्वय के लिए इस्तेमाल होने वाला मानक समय है। अंतरिक्ष स्टेशन पर काम करने वाले अंतरिक्ष यात्री इसी के आधार पर उठते हैं, भोजन करते हैं, वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं, व्यायाम करते हैं और सोते हैं।

यानी भले ही अंतरिक्ष यात्रियों को 24 घंटे में 16 बार सूर्योदय दिखाई दे, लेकिन उनके लिए एक दिन पृथ्वी की तरह लगभग 24 घंटे का ही होता है। उनके लिए सुबह और शाम का निर्धारण सूरज के दिखाई देने से नहीं, बल्कि तय समय-सारणी से होता है।

अंतरिक्ष यात्री सोते कैसे हैं?

ISS में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सोने का समय निर्धारित होता है। आमतौर पर उन्हें हर 24 घंटे में लगभग 8 घंटे सोने का समय दिया जाता है। स्टेशन पर उनके सोने के लिए छोटे-छोटे निजी केबिन होते हैं, जहां वे स्लीपिंग बैग में सोते हैं।

चूंकि वहां गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव बहुत कम महसूस होता है, इसलिए बिस्तर पर लेटकर सोने की जरूरत नहीं होती। अंतरिक्ष यात्री अपने स्लीपिंग बैग को दीवार या किसी अन्य सतह से बांध लेते हैं, ताकि सोते समय वे इधर-उधर न तैरने लगें। उनके केबिन में रोशनी को नियंत्रित किया जा सकता है। सोने के समय रोशनी कम कर दी जाती है और जागने के समय बढ़ाई जाती है। इससे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को नियमित रखने में मदद मिलती है।

बार-बार सूर्योदय देखने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जो सोने-जागने, हार्मोन के स्राव, शरीर के तापमान और कई दूसरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। सामान्य परिस्थितियों में यह घड़ी सूर्य की रोशनी और अंधेरे से संकेत लेती है।

ISS में बार-बार बदलती रोशनी इस प्राकृतिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। अगर अंतरिक्ष यात्री हर सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार अपनी दिनचर्या बदलने लगें, तो उनकी नींद और शरीर की जैविक लय बिगड़ सकती है। इससे थकान, ध्यान लगाने में कठिनाई और नींद से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इसीलिए अंतरिक्ष स्टेशन पर कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। रोशनी की तीव्रता और रंग को दिन के अलग-अलग समय के अनुसार बदला जा सकता है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों को यह संकेत मिलता है कि उनके काम करने, आराम करने और सोने का समय कब है।

क्या अंतरिक्ष यात्री 16 सूर्योदय देखकर भी दिन गिनते हैं?

हां, लेकिन वे सूर्योदय की संख्या को दिन की गिनती का आधार नहीं बनाते। ISS पर एक दिन का अर्थ लगभग 24 घंटे का निर्धारित समय होता है। उनकी गतिविधियों और मिशन की योजना इसी समय के आधार पर बनाई जाती है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई अंतरिक्ष यात्री सुबह 6 बजे UTC के अनुसार उठता है, तो उसके लिए अगला दिन भी निर्धारित समय-सारणी के अनुसार शुरू होगा। इस दौरान वह कई सूर्योदय और सूर्यास्त देख सकता है, लेकिन उसकी दिनचर्या नहीं बदलती।

अंतरिक्ष यात्रियों के मिशन की अवधि भी पृथ्वी के सामान्य कैलेंडर के अनुसार ही गिनी जाती है। अगर कोई अंतरिक्ष यात्री ISS पर छह महीने रहता है, तो इसका मतलब लगभग छह महीने का समय है, न कि सूर्योदय और सूर्यास्त की हजारों घटनाओं के आधार पर अलग-अलग दिनों की गिनती।

क्या ISS से सूर्योदय देखना पृथ्वी पर सूर्योदय देखने जैसा होता है?

अंतरिक्ष से सूर्योदय का दृश्य काफी अलग होता है। पृथ्वी पर हम सूर्य को क्षितिज से धीरे-धीरे ऊपर उठते हुए देखते हैं। लेकिन ISS से पृथ्वी का घुमावदार किनारा दिखाई देता है और उसके पीछे से सूर्य की रोशनी उभरती हुई नजर आती है।

अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के नीले वातावरण की एक पतली चमकदार परत भी देख सकते हैं। सूर्य की रोशनी जब इस वातावरण से होकर गुजरती है, तो किनारे पर नीले, नारंगी और लाल रंगों की खूबसूरत परतें दिखाई देती हैं। यह दृश्य इतना आकर्षक होता है कि अंतरिक्ष यात्री अक्सर इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं।

ISS में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को एक दिन में करीब 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त इसलिए दिखाई देते हैं, क्योंकि अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 90 मिनट में पूरा कर लेता है। लेकिन वहां दिन और रात की गिनती पृथ्वी की तरह 24 घंटे के आधार पर ही होती है।

अंतरिक्ष यात्रियों की दिनचर्या UTC समय के अनुसार तय की जाती है और कृत्रिम रोशनी की मदद से उनकी जैविक घड़ी को नियमित रखने की कोशिश की जाती है। इस तरह वे बार-बार बदलते सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच भी सामान्य काम, वैज्ञानिक प्रयोग और आराम कर पाते हैं। यानी अंतरिक्ष में सूरज भले ही दिन में 16 बार उगता और डूबता हो, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए दिन अब भी 24 घंटे का ही होता है।

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