Pollution Certificate Rules 2026: प्रदूषण जांच को लेकर बदल सकती है व्यवस्था, BS-VI वाहनों को मिलेगी बड़ी छूट
Pollution Certificate Rules 2026: BS-VI कार और बाइक मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है, सरकार PUCC की वैधता अवधि 1 साल से बढ़ाकर 3 साल करने पर विचार कर रही है।
Pollution Certificate Rules 2026
Pollution Certificate Rules 2026: सड़कों पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं और हानिकारक गैसों को नियंत्रित करने के लिए भारत में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 के तहत निर्धारित प्रदूषण मानकों का पालन करना अनिवार्य है। जिसके तहत PUC (Pollution Under Control) सड़कों पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं और हानिकारक गैसों को नियंत्रित करना है। भारत में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 के तहत हर वाहन के लिए निर्धारित प्रदूषण मानकों का पालन करना अनिवार्य है। जिसके तहत् सभी वाहन चालकों के लिए PUCC (Pollution Under Control Certificate) एक प्रमाणपत्र बनवाना अनिवार्य होता है। जो यह बताता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं सरकार द्वारा तय सीमा के भीतर है। वहीं देश में वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य किए गए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट यानी PUCC को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के तहत नई BS-VI श्रेणी की निजी कारों और दोपहिया वाहनों के लिए PUCC की वैधता अवधि एक साल से बढ़ाकर तीन साल तक की जा सकती है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो लाखों वाहन मालिकों को बार-बार सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। साथ ही सरकार का मानना है कि नई तकनीक वाली BS-VI गाड़ियां अपेक्षाकृत कम प्रदूषण उत्सर्जित करती हैं, इसलिए इनके लिए नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है।
BS-VI वाहनों के लिए आसान हो सकते हैं PUCC नियम
केंद्र सरकार वाहन प्रदूषण से जुड़े नियमों की समीक्षा कर रही है। इसी कड़ी में BS-VI तकनीक से लैस निजी वाहनों के लिए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) की वैधता अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार नई BS-VI कारों और दोपहिया वाहनों के मालिकों को हर साल PUCC रिन्यू कराने की आवश्यकता नहीं होगी और इसकी वैधता तीन साल तक की जा सकती है।
सरकार का तर्क है कि BS-VI मानकों वाली गाड़ियां पुराने मॉडल की तुलना में काफी कम प्रदूषण फैलाती हैं। इनमें आधुनिक इंजन और बेहतर उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाला असर कम होता है।
किन वाहन मालिकों को मिलेगा सीधा फायदा?
यदि नया नियम लागू होता है तो हाल के वर्षों में खरीदी गई BS-VI निजी कारों और मोटरसाइकिलों के मालिकों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। वर्तमान व्यवस्था में वाहन मालिकों को समय-समय पर PUCC बनवाने के लिए अधिकृत केंद्रों पर जाना पड़ता है। नई व्यवस्था से समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वाहन मालिकों में नियमों के प्रति अनुपालन भी बढ़ेगा, क्योंकि बार-बार सर्टिफिकेट बनवाने की जरूरत कम हो जाएगी।
कमर्शियल वाहनों के लिए अलग हो सकते हैं नियम
सूत्रों के अनुसार वाणिज्यिक यानी कमर्शियल BS-VI वाहनों के लिए अलग व्यवस्था लागू की जा सकती है। इन वाहनों का उपयोग अधिक होने के कारण इनके उत्सर्जन स्तर की निगरानी नियमित रूप से आवश्यक मानी जाती है। इसलिए सरकार इनके लिए वर्तमान व्यवस्था में सीमित बदलाव कर सकती है। अभी अंतिम फैसला अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुरानी गाड़ियों के लिए क्या रहेंगे नियम?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार छह से दस साल पुरानी BS-VI कारों के लिए PUCC का वार्षिक नवीनीकरण जारी रह सकता है। वहीं 10 साल से अधिक पुरानी गाड़ियों को हर छह महीने में प्रदूषण जांच करानी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन पुराना होने के साथ इंजन की कार्यक्षमता और उत्सर्जन स्तर में बदलाव आता है। इसलिए पुरानी गाड़ियों के लिए निगरानी जरूरी बनी रहेगी।
PUCC न होने पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
मोटर वाहन नियमों के तहत PUCC नहीं होने पर वाहन मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। नियम उल्लंघन की स्थिति में 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कुछ मामलों में छह महीने तक की सजा का भी प्रावधान है। इसके अलावा पहली बार नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक निलंबित किए जाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
कितना खर्च आता है PUCC बनवाने में?
PUCC बनवाने का खर्च काफी कम होता है। आमतौर पर दोपहिया वाहनों के लिए यह शुल्क 60 से 80 रुपये के बीच रहता है। पेट्रोल और सीएनजी कारों के लिए 80 से 100 रुपये तक तथा डीजल कारों के लिए 120 से 150 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। इसी के साथ अलग-अलग राज्यों में यह दरें कुछ भिन्न हो सकती हैं। सरकार का यह प्रस्ताव पर्यावरण संरक्षण और आम वाहन मालिकों की सुविधा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।