Foreign Tourist in India: दुनिया घूम रही पेरिस-लंदन, भारत क्यों छूट रहा पीछे? विश्व बैंक अध्यक्ष ने बताई वजह

Foreign Tourist in India 2026: भारत की पर्यटन क्षमता बड़ी है, लेकिन स्वच्छता, सुरक्षा और सुविधाओं की कमी विदेशी पर्यटकों को रोक रही है।

Update:2026-06-23 18:13 IST

Foreign Tourist in India 2026

Foreign Tourist in India 2026: दुनिया भर में अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए लोकप्रिय भारत हमेशा से ही विदेशी सैलानियों का पसंदीदा ठिकाना रहा है। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले में भारत काफी पीछे चल रहा है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने हाल ही में भारत के पर्यटन क्षेत्र की चुनौतियों पर खुलकर बात करते हुए कहा कि पेरिस और लंदन जैसे अकेले शहरों में जितने पर्यटक आते हैं, उससे कहीं कम विदेशी पर्यटक पूरे भारत में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत को पर्यटन के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक लाभ हासिल करना है तो स्वच्छता, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान देना होगा।

पेरिस और लंदन के मुकाबले भारत का आंकड़ा काफी छोटा

रोजगार और आर्थिक विकास से जुड़े एक पॉडकास्ट में अजय बंगा ने दुनिया के प्रमुख पर्यटन केंद्रों की तुलना भारत से की। उन्होंने बताया कि पेरिस में हर साल करीब 6.4 करोड़ और लंदन में लगभग 6.5 करोड़ पर्यटक पहुंचते हैं। इसके विपरीत, हाल के वर्षों में भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या घटकर करीब 90 लाख रह गई है। बंगा के अनुसार यह अंतर दर्शाता है कि भारत अपनी पर्यटन क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है।

पर्यटन केवल यात्रा नहीं, करोड़ों रोजगार का स्रोत भी है

अजय बंगा ने कहा कि पर्यटन उद्योग दुनिया के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है। होटल, रेस्तरां, ट्रांसपोर्ट, ट्रैवल एजेंसी, स्थानीय बाजार और गाइड सेवाओं से लेकर प्रबंधन स्तर तक लाखों लोगों की आजीविका पर्यटन पर निर्भर करती है। उनका मानना है कि भारत जैसे युवा आबादी वाले देश में पर्यटन रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

थाईलैंड जैसे देशों ने दिखाई पर्यटन की ताकत

विश्व बैंक प्रमुख ने उदाहरण देते हुए बताया कि थाईलैंड जैसे देश हर साल करीब 3 करोड़ विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यह संख्या भारत से कई गुना अधिक है, जबकि भारत के पास प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के रूप में कहीं ज्यादा विविधता मौजूद है। उनका कहना है कि बेहतर नीतियों और सुविधाओं के जरिए भारत भी इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा सकता है।

स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती

अजय बंगा के मुताबिक भारत में विदेशी पर्यटकों की कम संख्या के पीछे कुछ बुनियादी समस्याएं जिम्मेदार हैं। कई पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई की स्थिति अपेक्षित स्तर की नहीं है। इसके अलावा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली सुविधाओं की कमी भी पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित करती है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा और सुविधा के मामले में भारत को अभी और सुधार करने की जरूरत है ताकि विदेशी यात्रियों का भरोसा बढ़ सके।

घरेलू पर्यटन ने दिखाई मजबूती, गोवा बना उदाहरण

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हालांकि विदेशी पर्यटकों की संख्या को लेकर चिंता जताने के साथ-साथ बंगा ने घरेलू पर्यटन की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि भारत में आंतरिक यात्रा तेजी से बढ़ रही है और गोवा जैसे पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में घरेलू पर्यटक पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और पर्यटन उद्योग को नया सहारा मिला है।

न्यूयॉर्क शहर बना उदाहरण

अजय बंगा ने पर्यटन क्षमता को समझाने के लिए न्यूयॉर्क शहर का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अकेला न्यूयॉर्क शहर सालाना करीब 6 करोड़ पर्यटकों को आकर्षित करता है। वहीं पूरे भारत में कुल पर्यटकों की संख्या लगभग 14 करोड़ के आसपास है। यह तुलना इस बात का संकेत है कि भारत के पास मौजूद पर्यटन में बढ़ोत्तरी की विशाल संभावनाओं का अभी तक पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

सही निवेश और सुधार से बदल सकती है तस्वीर

पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास विश्व धरोहर स्थलों, धार्मिक पर्यटन, समुद्री तटों, पहाड़ी इलाकों और वन्यजीव पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर स्वच्छता, परिवहन, सुरक्षा और डिजिटल सुविधाओं में निवेश बढ़ाएं तो भारत दुनिया के शीर्ष पर्यटन देशों में अपनी जगह बना सकता है। अजय बंगा का मानना है कि पर्यटन केवल यात्रियों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों नए रोजगार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार भी बन सकता है।

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