अखिलेश यादव से हुई बड़ी चूक? BJP ने 'चवन्नी' को बनाया चुनावी हथियार...2027 में सपा के लिए बढ़ी टेंशन!

Akhilesh Yadav Chavanni Remark Row: अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान ने यूपी की सियासत गरमा दी है। जयंत चौधरी के समर्थन में BJP-RLD आक्रामक, 2027 चुनाव में जाट और किसान वोटों पर बढ़ी सपा की टेंशन।

Update:2026-09-08 10:40 IST

Akhilesh Yadav Chavanni Remark Row: उत्तर प्रदेश के सियासी दंगल में कई बार बड़े नेताओं के मुंह से निकले बोल ही पूरे चुनाव का रुख मोड़ देते हैं। चुनावी गहमागहमी के बीच भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन को विपक्षी खेमे से एक ऐसा ही बड़ा राजनीतिक हथियार मिल गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर हाल ही में 'चवन्नी' वाली विवादित टिप्पणी की थी। सपा प्रमुख का यह तंज अब केवल दो नेताओं के बीच की जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी और आरएलडी ने इसे जाट समाज और किसानों के स्वाभिमान का मुद्दा बनाकर 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पश्चिमी यूपी की सियासी जमीन पर बड़ा दांव खेल दिया है।

जयंत चौधरी का करारा पलटवार

अखिलेश यादव के इस जुबानी हमले के बाद राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी आक्रामक तेवर में नजर आ रहे हैं। सहारनपुर में आयोजित विशाल स्वाभिमान रैली में जयंत चौधरी ने मंच पर बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगवाकर अखिलेश यादव के बयान का वीडियो चलवाया और विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। जयंत ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में व्यक्ति विशेष पर हमला किया जा सकता था, लेकिन इस तरह की हल्की भाषा का इस्तेमाल कर एक पूरे जाट और किसान समुदाय का अपमान किया गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह का अहंकार पहले भी कई राजनीतिक घरानों के पतन का कारण बना है और जनता इस घटिया शब्दावली का जवाब आने वाले चुनाव में अपने वोट से देगी।

भाजपा के फायरब्रांड नेताओं की एंट्री

अखिलेश यादव की इस बयानबाज़ी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने मौका हाथ से जाने नहीं दिया और पूरी ताकत से जयंत चौधरी के समर्थन में उतर आई है। भाजपा के कद्दावर नेता संगीत सोम ने सपा प्रमुख पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि जिस किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह के परिवार ने अखिलेश और उनके पिता को नेता बनाया, आज उनका ही अपमान किया जा रहा है। संगीत सोम ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि जिस जयंत चौधरी को वे आज चवन्नी समझ रहे हैं, वही जयंत और पश्चिमी यूपी का किसान समाज 2027 के चुनाव में सपा को एकन्नी का भी नहीं छोड़ेगा। इसके साथ ही एनडीए के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के दिमागी संतुलन पर सवाल उठाते हुए इसे पूरे जाट समाज की बेइज्जती करार दिया।

भाजपा के लिए मास्टरकार्ड बने जयंत

2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए गठबंधन में जयंत चौधरी भाजपा के लिए सबसे मजबूत ट्रंप कार्ड साबित हो रहे हैं। जाट और किसान राजनीति की धुरी माने जाने वाले आरएलडी चीफ अब भाजपा के साथ मिलकर सवर्ण, विशेषकर ब्राह्मण समाज और अन्य वर्गों को भी अपने साथ साध रहे हैं। यदि यह सामाजिक समीकरण पूरी तरह फिट बैठता है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दर्जनों सीटों पर विपक्ष का सूपड़ा साफ होना तय माना जा रहा है। इसके साथ ही जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी की सक्रिय राजनीति और जनसभाओं में उपस्थिति के चलते महिला मतदाताओं के बीच भी आरएलडी की पैठ काफी गहरी हो रही है।

सीटों के बंटवारे में RLD का दावा मजबूत

पश्चिमी यूपी में लोकसभा 2024 में दो सीटें जीतने और विधानसभा में 9 मौजूदा विधायकों के दम पर आरएलडी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। 2022 के चुनाव में 33 सीटों पर लड़कर 8 सीटें जीतने वाली आरएलडी अब 2027 के चुनाव के लिए 33 से 38 सीटों की मांग कर रही है। हालांकि भाजपा शुरुआती रणनीतियों के तहत सीमित सीटें देने के मूड में थी, लेकिन अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान के बाद बने नए सियासी माहौल ने जयंत चौधरी की सौदेबाजी की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है। अब यह लगभग साफ है कि बीजेपी पश्चिमी यूपी को फतह करने के लिए जयंत चौधरी को बड़ा हिस्सा देने में जरा भी संकोच नहीं करेगी।

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