Aligarh News: जाते-जाते फोटोग्राफर को गुरुजी कह गईं कमिश्नर संगीता, निजी स्टाफ के लिए छलके आंसू
Aligarh News: अलीगढ़ की कमिश्नर संगीता सिंह विदाई के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने फोटोग्राफर को गुरुजी कहा और निजी स्टाफ के लिए आंसू छलक पड़े।
Aligarh News(Photo-Social Media)
Aligarh News: जनपद की निवर्तमान मंडलायुक्त संगीता सिंह की विदाई समारोह में उस वक्त सबकी आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने अपने निजी स्टाफ का नाम लेकर उनका आभार जताया। मंच पर बड़ी-बड़ी योजनाओं की बात करने वाली कमिश्नर निजी स्टाफ का जिक्र आते ही भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी का कार्यकाल अकेले सफल नहीं होता। पर्दे के पीछे उसके निजी स्टाफ की सबसे बड़ी भूमिका होती है।
संगीता सिंह ने अपने पेशकार अरुण कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से न्यायालयीय कार्यों को संभाला। कोर्ट के बोझ को उन्होंने कभी उन पर हावी नहीं होने दिया। सबसे मार्मिक जिक्र उन्होंने अपने वैयक्तिक सहायक विकास गंगल का किया। उन्होंने कहा, "विकास उम्र में मुझसे काफी छोटा है, लेकिन उसने दायित्वों से आगे बढ़कर एक पिता की तरह मेरी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखा।" यह सुनते ही सभागार में सन्नाटा छा गया और तालियों से पूरा हॉल गूंज उठा।
इसके साथ ही उन्होंने अपने अर्दली जसवंत और प्रदीप के सहयोग और समर्पण को भी दिल से याद किया। कहा कि इन सबके बिना 19 महीने का कार्यकाल इतना सहज और संतोषजनक नहीं होता। विदाई समारोह खत्म होने के बाद सबसे यादगार पल तब आया, जब वह शासकीय वाहन की ओर बढ़ रही थीं। पास में ही सूचना विभाग के फोटोग्राफर विकास भारद्वाज खड़े थे, जो पूरे कार्यकाल में उनके हर कार्यक्रम की तस्वीरें लेते रहे। संगीता सिंह उनके पास रुकीं और बेहद आत्मीय अंदाज में बोलीं- "गुरुजी, अब चलते हैं।"
उनका यह एक वाक्य ही पूरे विदाई समारोह की सबसे बड़ी तस्वीर बन गया। एक मंडलायुक्त का अपने फोटोग्राफर को गुरुजी कहना, उनके सहज और जमीन से जुड़े व्यवहार की कहानी कह गया। फोटोग्राफर विकास भी इस संबोधन से भावुक हो गए। गौरतलब है। कि संगीता सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान खुद को एक फोटोग्राफर के रूप में भी निखारा था। शायद इसीलिए फोटोग्राफर के प्रति उनका यह सम्मान और भी खास था।
इससे पहले आयुक्त सभागार में हुए विदाई समारोह में अधिकारियों और बार एसोसिएशन ने उन्हें सम्मानित किया था। अब अलीगढ़ से विदा लेकर वह मुरादाबाद मंडल में अपनी नई पारी शुरू करने जा रही हैं, लेकिन जाते-जाते "गुरुजी" वाला यह संबोधन अलीगढ़ के अफसरों और कर्मचारियों के दिल में हमेशा के लिए बस गया।