Ram Mandir Dhwaja Rohan: अयोध्या फिर बनेगी साक्षी, राम मंदिर पर ध्वज-स्थापना

Ayodhya Ram Temple Flag Ceremony: अयोध्या एक बार फिर इतिहास के ऐसे क्षण की ओर बढ़ रही है, जिसकी भव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रीय महत्व वर्षों तक याद किए जाएंगे।

Update:2025-11-17 17:18 IST

Ayodhya Ram Mandir Dhwaja Rohan Ceremony Full Information

Ayodhya Ram Mandir Dhwaja Rohan: अयोध्या एक बार फिर इतिहास के ऐसे क्षण की ओर बढ़ रही है, जिसकी भव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रीय महत्व वर्षों तक याद किए जाएंगे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर इस बार दोहरे कीर्तिध्वज—एक स्वर्णमंडित ध्वजा और उसके ऊपर रत्नजटित पताका—स्थापित की जाएगी। यह दृश्य केवल आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का भी रूप होगा, जिसका साक्षी देश बनेगा।इसी महीने की पच्चीस तारीख इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनेगा।धर्म ध्वज फहराये जाने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों संघ प्रमुख मोहन भागवत जी, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की उपस्थिति में होगा। इस आयोजन का सीधा मतलब यह संदेश देना है अब राम लला के मंदिर निर्माण का काम पूरा हो गया है। दुनिया भर के श्रद्धालुओं की श्रद्धा को देखते हुए गर्भ गृह में राम लला की मूर्ति की स्थापना के बाद मंदिर को दर्शन के लिए खोल दिया गया था।

इस आयोजन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी की उपस्थिति सुनिश्चित हो चुकी है। उनकी मौजूदगी इस अनुष्ठान को केवल एक धार्मिक घटना नहीं रहने देती, बल्कि इसे एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक घोषणा में बदल देती है, जो करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व और भावनात्मक उछाल का क्षण है।

दोहरी ध्वजा—शिखर पर दिव्य वैभव का उत्सव

मंदिर पर दो कीर्तिध्वजाएँ उतारी जाएँगी।

पहली ध्वजा सोने की परत से मढ़ी होगी

दूसरी विशेष रत्नों और पारंपरिक ‘सूत्रम’ तकनीक से बुनी पताका

दोनों का संयुक्त आकार लगभग 25–27 फीट का होगा।

ध्वजों पर अंकित प्रतीक—हनुमान चिह्न, सूर्य चक्र, और वज्र

ध्वजा-स्थापना का यह अनुष्ठान 17 आचार्यों की वैदिक मंडली द्वारा किया जाएगा। मंदिर का शिखर आज के आधुनिक युग में भी शुद्ध वैदिक परंपरा का पालन करते हुए सजाया जा रहा है।

ध्वज केवल सौभाग्य का प्रतीक नहीं—भारतीय वास्तुशास्त्र में इसे देव-ऊर्जा का सर्वोच्च आह्वान माना गया है।

मंदिर निर्माण—करीब 44 महीने की तपस्या, 3000 से अधिक कारीगर

मंदिर निर्माण की लंबी यात्रा में—मुख्य निर्माण-कार्य को 44 महीनों की निरंतर प्रक्रिया के बाद रूप मिला। भूमिपूजन से प्राण-प्रतिष्ठा तक का सफर लगभग 3.5 वर्ष का रहा।

कहाँ-कहाँ के पत्थर लगे?

राजस्थान के बाँसी पहरपुर से आया गुलाबी बलुआ-पत्थर

कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना का ग्रेनाइट

गर्भगृह में नेपाल की शिलाओं का स्पर्श

बाहरी दीवारों में उत्तर भारतीय बलुआ-पत्थर

कोई भी लोहे का उपयोग नहीं — स्टील-फ्री मंदिर

कितने कारीगर?

2000+ शिल्पकार (राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, यूपी के), 300 मूर्ति-शिल्प विशेषज्ञ, 1200 सामान्य मजदूर, 70 इंजीनियर और वास्तु विशेषज्ञ, 30 संरचनात्मक इंजीनियर, मंदिर का गर्भगृह और परकोटा भारतीय शिल्पकला का जीवंत उदाहरण है—जहाँ नक्काशी, अलंकरण, स्तंभ, मेहराब और गुंबद प्रत्येक अपनी कथा कहता है।

इस बार के आयोजन की विशेषता—संख्या सीमित, स्तर भव्य

इस बार 6000 लोग बुलाए जा रहे हैं। इनमें से 2000 लोग अयोध्या और आसपास के जिलों से। पिछली बार 8000 निमंत्रण भेजे गए थे। इस बार आयोजन अधिक नियंत्रित, अधिक सुरक्षित, अधिक व्यवस्थित रखा गया है। इन सभी तथ्यों को रखते हुए विस्तार जोड़ते हैं—

निमंत्रितों की श्रेणियाँ

संत-समाज, विभिन्न अखाड़ों के महंत, देशभर के मंदिरों के प्रतिनिधि, शिल्पकार और दानदाता, सैन्य अधिकारी व पद्म सम्मानित, विदेशों से आए राम-कथाकार व शोधकर्ता, प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख की उपस्थिति को देखते हुए सीटिंग प्लान तीन स्तरों में बनाया गया है।

सुरक्षा—अब तक की सबसे कठोर व्यवस्था

अयोध्या नगरी और उसके आसपास के 40 किमी क्षेत्र में—

400+ CCTV, 50 से अधिक एचडी डोम कैमरे, एंटी-ड्रोन स्क्वाड, 12 हाई-कैपेसिटी ड्रोन, 32 स्नाइपर टीमें, NDRF की 2 बैटल-रेडी यूनिट, 300 बम-डिटेक्शन टीमें, तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा (इनर, मिड, आउटर), रिवर पुलिस की तैनाती, लखनऊ–अयोध्या मार्ग पर विशेष कमांड सेंटर बनाए गए हैं।

अयोध्या—अब ‘ग्लोबल राम सिटी’ का स्वरूप ले रही है

नगरी की सड़कों, प्रकाश-व्यवस्था और सांस्कृतिक सजावट में—

22 किमी लंबा थीम LED कॉरिडोर

रामपथ, भक्तिपथ और जन्मभूमि पथ की शालिग्राम-सजावट , 5000 दीप-स्तंभ, 2000 म्यूरल पेंटिंग, 9 थीम-आधारित फोटो-पॉइंट, 6 मंचों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, नेपाल, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मॉरीशस, श्रीलंका से रामकथा दल कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं।

ध्वज-स्थापना का दार्शनिक महत्व

भारतीय परंपरा में ध्वज—

विजय, संरक्षण, देव ऊर्जा, दिशा (Guidance) और चेतना के उत्थान का प्रतीक माना गया है।

जब राम मंदिर पर दोहरे ध्वज चढ़ेंगे—तो यह केवल शिखर को नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की चेतना को ऊँचा करने वाला क्षण होगा।

प्रधानमंत्री व संघ प्रमुख—दो केंद्र, एक ऊर्जा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व देती है, जबकि संघ प्रमुख की उपस्थिति इसे आध्यात्मिक आधार से जोड़ती है। दोनों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि—“राम केवल श्रद्धा का नहीं, भारतीयता का भी केंद्र हैं।” यह आयोजन राज्य, केंद्र, समाज, धर्म, संस्कृति—सभी को एक सूत्र में पिरोता है।

अयोध्या का यह क्षण—आज, एक युग का समापन और आरंभ

राम मंदिर की स्थापना, ध्वज-धारणा और भव्य आयोजन केवल एक धार्मिक घटना नहीं—यह भारत की आत्मा का उत्सव है।

इस बार की दोहरी ध्वजा, निर्माण की महारथ, कला की शक्ति और प्रधानमंत्री-संघ प्रमुख की उपस्थिति—सब मिलकर यह संदेश देती है:”अयोध्या अब केवल एक शहर नहीं—विश्व की राम नगरी है।”

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