3 करोड़ की चोरी हुई...राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा कबूलनामा, कोषाध्यक्ष Govind Dev Giri के बयान से सनसनी

Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में पहली बार ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने करीब 3 करोड़ रुपए की चोरी की पुष्टि की। इस्तीफे की खबरों का खंडन किया और 22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक में बड़े बदलाव के संकेत दिए।

Update:2026-07-14 15:14 IST

image source- Ai

Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) से दान चोरी (Donation Theft) के मामले में पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की ओर से चोरी गई रकम को लेकर आधिकारिक बयान सामने आया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष (Treasurer) गोविंददेव गिरी (Govind Dev Giri) ने माना है कि मंदिर से करीब तीन करोड़ रुपए की चोरी हुई है। अब तक चोरी की रकम को लेकर अलग-अलग तरह के दावे और अनुमान लगाए जा रहे थे, लेकिन ट्रस्ट की ओर से पहली बार रकम को लेकर साफ तौर पर जानकारी दी गई है।

गोविंददेव गिरी ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर से 14 करोड़ रुपए का सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान चोरी होने की जो बातें सामने आ रही थीं, वे पूरी तरह गलत हैं। इससे पहले विशेष जांच दल (SIT) अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में करीब 80 लाख रुपए की बरामदगी का जिक्र कर चुका है।

इस्तीफे की खबरों को बताया पूरी तरह गलत

पुणे (Pune) दौरे पर पहुंचे गोविंददेव गिरी ने एक एजेंसी से बातचीत में अपने इस्तीफे की खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है और न ही इस्तीफा देने के बारे में कभी कुछ कहा है। उनके मन में भी ऐसा कोई विचार नहीं आया है।

गोविंददेव गिरी ने कहा कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) के अनुयायी हैं और मैदान छोड़कर भागने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनके इस्तीफे की चर्चा केवल अफवाह है।

चंपत राय ने अपनी मर्जी से छोड़ा पद

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने बताया कि ट्रस्ट के महासचिव (General Secretary) चंपत राय (Champat Rai) ने अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि यह कहना बिल्कुल सही नहीं होगा कि चंपत राय को बलि का बकरा बनाया गया है।

गोविंददेव गिरी के मुताबिक चंपत राय को इस बात का एहसास था कि कहीं न कहीं थोड़ी लापरवाही हुई है। इसी वजह से उन्होंने खुद आगे बढ़कर पद छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं था।

एसआईटी जांच पर जताया पूरा भरोसा

गोविंददेव गिरी ने कहा कि वह एसआईटी जांच से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनके मुताबिक जांच में किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है और न ही किसी पर दबाव बनाया जा रहा है। जांच को प्रभावित करने की कोई कोशिश भी नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि यह अपराध सीधे रामलला (Ramlala) के खिलाफ किया गया है और जिसने भी इस वारदात को अंजाम दिया है, उसे कानून के मुताबिक सजा जरूर मिलनी चाहिए। अपनी सादगी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज वह पुणे में एक ऐसे घर में रहते हैं, जहां केवल एक कमरा और एक रसोई है। उस घर की एक भी ईंट उनके नाम पर नहीं है।

22 जुलाई की बैठक में हो सकते हैं बड़े फैसले

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। तय एजेंडे के मुताबिक यह बैठक दो हिस्सों में होगी। इसमें ट्रस्ट के रिक्त पदों पर नए सदस्यों के चयन, एसआईटी की रिपोर्ट और ट्रस्ट की पांचों समितियों में संभावित बदलाव पर चर्चा की जाएगी।

माना जा रहा है कि ट्रस्ट को अपनी सभी पांच समितियों में बदलाव करने पड़ सकते हैं, क्योंकि इन समितियों से जुड़े कई सदस्यों के पद अब खाली हो चुके हैं। ऐसे में नए सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपे जाने पर फैसला लिया जा सकता है।

ट्रस्ट की पांच समितियों में भी बदलाव की तैयारी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के बायलॉज (Bylaws) के तहत कामकाज के बेहतर संचालन के लिए पांच समितियों का गठन किया गया है। इनमें निर्माण समिति (Construction Committee), वित्त समिति (Finance Committee), ऑडिट समिति (Audit Committee), धार्मिक समिति (Religious Committee) और मैनेजिंग समिति (Managing Committee) शामिल हैं। इन समितियों का गठन 11 नवंबर 2020 को ट्रस्ट डीड (Trust Deed) के अनुसार किया गया था।

बायलॉज के मुताबिक प्रत्येक समिति के चेयरमैन को जरूरत पड़ने पर ट्रस्ट के बाहर के किसी विषय विशेषज्ञ को भी समिति में नामित करने का अधिकार है।

निर्माण समिति में भी खाली हुए कई पद

निर्माण समिति के चेयरमैन सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेंद्र मिश्र (Nripendra Mishra) हैं। उन्होंने निर्माण समिति में ट्रस्ट के सदस्यों के अलावा कई विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया था।

इस समिति में ट्रस्ट के निवर्तमान महासचिव चंपत राय, न्यासी डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और अयोध्या नरेश विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र (Bimlendra Mohan Pratap Mishra) भी सदस्य थे। अब चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि अयोध्या नरेश के निधन के बाद उनका पद भी रिक्त हो गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि 22 जुलाई की बैठक में इन खाली पदों को भरने और निर्माण समिति समेत अन्य समितियों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा जा सकता है।

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