राम मंदिर में नया बखेड़ा! गायब हुई 5 करोड़ की रामचरितमानस, क्यों घिरे चंपत राय?
Ram Mandir Ramcharitmanas Row: अयोध्या राम मंदिर में स्वर्ण रामचरितमानस को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व आईएएस अधिकारी ने चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि वीएचपी ने वीडियो जारी कर दावा किया कि ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित है।
Ram Mandir Ramcharitmanas Row: अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में दान के पैसों में हेराफेरी का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि एक और बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने मंदिर प्रशासन पर एक बेहद चौंकाने वाला आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई और पारिवारिक गहनों को पिघलाकर तैयार की गई सोने की बेहद कीमती 'रामचरितमानस' अब अपने स्थान से पूरी तरह गायब हो चुकी है। पूर्व आईएएस अधिकारी के इस सनसनीखेज बयान के बाद राम भक्तों के बीच हड़कंप मच गया है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी ने तुरंत एक वीडियो जारी कर इस दावे को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि पवित्र ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित है।
मां की याद में बनी अनूठी कृति
अपने दिल का दर्द बयां करते हुए पूर्व गृह सचिव ने बताया कि उनका पूरा परिवार पीढ़ियों से प्रभु श्री राम का परम भक्त रहा है। एक दर्दनाक हादसे की वजह से उनकी पूज्य मां पूरी तरह विकलांग हो गई थीं, जिसके बाद वे अपना पूरा समय केवल 'राम-राम' नाम लिखने में बिताती थीं। मां के स्वर्गवास के बाद, उन्होंने और उनकी धर्मपत्नी ने अपनी जीवनभर की बचत और सोने के आभूषणों को इकट्ठा करके इस पावन रामचरितमानस ग्रंथ को तैयार करवाया था। इस बेहद खास ग्रंथ को बनाने में लगभग सवा किलो शुद्ध सोने का इस्तेमाल किया गया था, जबकि तांबे और अन्य धातुओं को मिलाकर इस पूरे धार्मिक ग्रंथ का कुल वजन सवा क्विंटल यानी पूरे 125 किलो के आसपास था।
ट्रस्ट पर बदसलूकी का आरोप
लक्ष्मी नारायण ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर बेहद गंभीर और अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने बताया कि 8 अप्रैल 2024 को जब वे इस भारी-भरकम रामचरितमानस को प्रभु रामलला के चरणों में समर्पित करने अयोध्या पहुंचे, तो चंपत राय ने उन्हें करीब 9 घंटे तक बाहर बिठाकर इंतजार कराया। इतने बड़े और सवा क्विंटल भारी ग्रंथ को अंदर रखवाने के लिए ट्रस्ट की तरफ से किसी भी सेवादार की मदद नहीं दी गई, बल्कि उन्होंने खुद मेहनत करके उसे सही स्थान पर रखवाया। उन्होंने बताया कि शुरुआत के कुछ महीनों तक इस स्वर्ण ग्रंथ को मुख्य प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था, जिसके वीडियो साक्ष्य भी उनके पास मौजूद हैं, लेकिन अब वह वहां दिखाई नहीं दे रहा है।
मोहन भागवत तक पहुंची शिकायत
जब पूर्व अधिकारी ने इस कीमती धरोहर के हटने के बारे में मंदिर के स्टाफ से पूछताछ की, तो लोगों ने उन्हें राय दी कि चंपत राय किसी की बात नहीं सुनते हैं। इसके लिए उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े पदाधिकारियों से पैरवी करानी होगी। इसके बाद साल 2025 में हैदराबाद के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात कर इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। लेकिन जब वे दोबारा चंपत राय से मिलने पहुंचे, तो चंपत राय ने अहंकार भरे लहजे में सीधे कह दिया कि यहां सिर्फ उन्हीं का हुक्म चलेगा।
विहिप ने जारी किया सबूत
इस पूरे विवाद पर राजनीति भी गरमाने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयानों पर जवाब देते हुए लक्ष्मी नारायण ने साफ कहा कि वे इस पवित्र मामले में कोई राजनीतिक रंग नहीं देखना चाहते। वे इस गुमशुदगी की कोई पुलिस एफआईआर भी दर्ज नहीं कराना चाहते हैं, बल्कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि उनकी आस्था के प्रतीक को वापस सही स्थान पर स्थापित कर दिया जाए। दूसरी तरफ, विहिप के वरिष्ठ नेता प्रकाश शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक ताजा वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए इस खबर को पूरी तरह से भ्रामक और गलत बताया है। उन्होंने दावा किया है कि यह अमूल्य रामचरितमानस आज भी ट्रस्ट के पास पूरी तरह सुरक्षित और महफूज रखी हुई है।