फिर क्यों बदली रामलला के पुजारियों की पोशाक? धार्मिक न्यास समिति के फैसले से सामने आई बड़ी वजह
Ayodhya Ram Mandir Dress Code: अयोध्या राम मंदिर में रामलला के पुजारियों का ड्रेस कोड बदल दिया गया है। 13 अगस्त से पगड़ी और चौबंदी की जगह पीताम्बरी उत्तरीय व धोती अनिवार्य होगी। जानिए संतों की आपत्ति के बाद क्यों हुआ बदलाव।
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Ram Mandir Dress Code: अयोध्या राम मंदिर की धार्मिक न्यास समिति (Ayodhya Ram Mandir Trust Committee) की बैठक में लिए गए फैसले के बाद रामलला (Ramlala) के पुजारियों का ड्रेस कोड (Dress Code) बदल गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की ओर से पहले पुजारियों के लिए पगड़ी के साथ पीत रंग की चौबंदी और सफेद धोती निर्धारित की गई थी। अब इसमें बदलाव करते हुए पुजारियों के लिए पीताम्बरी उत्तरीय और धोती को अनिवार्य कर दिया गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से पहले निर्धारित ड्रेस पुजारियों को गर्मी और सर्दी के मौसम के हिसाब से उपलब्ध कराई गई थी। ट्रस्ट की ओर से दी गई चौबंदी पर तीर्थ क्षेत्र का मोनोग्राम (Monogram) भी प्रिंट किया गया था। हालांकि, पुनर्गठित धार्मिक न्यास समिति की पहली बैठक में संतों ने इस ड्रेस को अयोध्या की वैष्णव परंपरा (Vaishnav Tradition) के विपरीत बताया। संतों ने सुझाव दिया कि रामलला के पुजारियों को बिना सिलाई वाले वस्त्र धारण करने चाहिए।
संतों के सुझाव को ट्रस्ट ने किया स्वीकार
धार्मिक न्यास समिति की बैठक में संतों की ओर से दिए गए सुझाव को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि (Mahant Govind Dev Giri) और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन (Krishna Mohan) ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही बदले हुए ड्रेस कोड को लागू भी कर दिया गया है।
बताया गया है कि यह व्यवस्था सावन शुक्ल प्रतिपदा यानी 13 अगस्त से प्रभावी होगी। इसके पीछे वजह रामलला के पुजारियों का ड्यूटी रोस्टर (Duty Roster) है, जो हर महीने अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदलता है।
13 अगस्त से लागू होगी नई व्यवस्था
रामलला के पुजारियों की ड्यूटी का रोस्टर सावन कृष्ण अमावस्या के बाद बदल रहा है। जिस ग्रुप के पुजारियों की ड्यूटी अभी सुबह की पाली में थी, वह सावन शुक्ल प्रतिपदा यानी 13 अगस्त से शाम की पाली में ड्यूटी करेगा। वहीं जिस ग्रुप के पुजारियों की ड्यूटी शाम की पाली में थी, वह 13 अगस्त से सुबह की पाली में आ जाएगा।
यह रोस्टर सावन शुक्ल पूर्णिमा तक चलेगा। इसके बाद भादौ कृष्ण प्रतिपदा से पुजारियों की ड्यूटी नए रोस्टर के अनुसार शुरू होगी। इसी बदलाव के साथ 13 अगस्त से सभी पुजारी नए ड्रेस कोड में नजर आएंगे।
पीताम्बरी उत्तरीय और धोती होगी अनिवार्य
धार्मिक न्यास समिति के सदस्य और श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास (Swami Rajkumar Das) ने नए ड्रेस कोड के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैष्णव परंपरा में मंदिर के गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में विशेष मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए, क्योंकि वहीं श्रीठाकुरजी के श्रीविग्रह विराजित होते हैं।
स्वामी राजकुमार दास ने बताया कि वैष्णव परंपरा में वस्त्रों को लेकर भी विशेष नियम हैं। उनके मुताबिक, सूती वस्त्रों को वैसे भी अशुद्ध माना जाता है और यदि वे सिले हुए हों तो उन्हें पूरी तरह अशुद्ध माना जाता है।
उन्होंने कहा कि सामान्य व्यवहार में धुले हुए वस्त्रों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन देवी-देवताओं के साथ व्यवहार के लिए पूर्वाचार्यों ने अलग आचार संहिता निर्धारित की है। उन्होंने कहा कि इस आचार संहिता का पालन करना सभी का कर्तव्य है। इसी वजह से रामलला के सभी पुजारियों के लिए पीताम्बरी उत्तरीय (Pitambari Uttariya) और धोती (Dhoti) को अनिवार्य किया गया है।
संतों ने वैष्णव परंपरा का दिया हवाला
पुनर्गठित धार्मिक न्यास समिति की पहली बैठक में संतों ने पुजारियों के पहले से निर्धारित ड्रेस कोड पर सवाल उठाया था। संतों का कहना था कि पगड़ी, पीत रंग की चौबंदी और सफेद धोती वाला सिला हुआ ड्रेस अयोध्या की वैष्णव परंपरा के अनुरूप नहीं है।
इसी के बाद बिना सिलाई वाले वस्त्र धारण करने का सुझाव दिया गया। ट्रस्ट की ओर से इस सुझाव को स्वीकार किए जाने के बाद अब पुजारियों के ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है।
निर्मोही अखाड़े ने भी दी जानकारी
निर्मोही अखाड़ा (Nirmohi Akhara) के महंत दिनेन्द्र दास (Mahant Dinendra Das) ने बताया कि धार्मिक न्यास समिति की बैठक के बाद अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की ओर से पुजारियों के लिए निर्देश जारी कर दिया गया है।
इस तरह राम मंदिर में रामलला के पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 13 अगस्त से पुजारी पीताम्बरी उत्तरीय और धोती में नजर आएंगे। यह बदलाव अयोध्या की वैष्णव परंपरा और मंदिर की आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।