राम मंदिर केस में बढ़ी जांच की आंच! अब 2020 से खुलेगी पूरी फाइल, पुराने-नए कर्मचारियों से पूछताछ
Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब 2020-21 से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और पुराने-नए कर्मचारियों के बयान दर्ज कर पुलिस अलग-अलग सवाल पूछ रही है।
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Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम यानी एसआईटी (SIT) की निगरानी में पुलिस टीम जांच को आगे बढ़ा रही है।
पहले प्रदेश सरकार की ओर से लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत (Vijay Vishwas Pant) की अगुवाई में गठित एसआईटी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2024-25 के लेखा-जोखा की ही जांच की थी, लेकिन अब जांच का दायरा राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Temple Trust) के गठन के समय से यानी वित्तीय वर्ष 2020-21 तक पहुंच गया है।
अब 2020-21 से लेकर आगे के सभी वित्तीय वर्षों से जुड़े रिकॉर्ड और अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। इसी क्रम में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद से कार्यरत रहे नए और पुराने कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।
पुलिस अलग-अलग कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है और इसके बाद उनसे अलग-अलग सवाल भी पूछे जा रहे हैं, ताकि बयानों में किसी तरह का विरोधाभास सामने न आए।
पहले सिर्फ आधा दर्जन कर्मचारियों से हुई थी पूछताछ
मामले की शुरुआती जांच के दौरान एसआईटी के सामने राम मंदिर में चढ़ावे की गणना में लगे करीब आधा दर्जन कर्मचारियों को ही पूछताछ के लिए बुलाया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
आईजी किरन एस (IG Kiran S) की अगुवाई में गठित एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद से मंदिर में कार्यरत सभी कर्मचारियों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसी निर्देश के तहत क्षेत्राधिकारी कार्यालय में अलग-अलग कर्मचारियों से दोबारा पूछताछ की जा रही है।
पुलिस कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के साथ ही उनसे अलग-अलग सवाल भी पूछ रही है। जांच टीम का मकसद यह पता लगाना है कि अलग-अलग कर्मचारियों के बयानों में कहीं कोई अंतर या विरोधाभास तो नहीं है।
जांच के दायरे में 2020-21 से 2023-24 तक के रिकॉर्ड
एसआईटी ने अब सिर्फ हाल के वित्तीय वर्षों की जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 से लेकर 2021-22, 2022-23 और 2023-24 से जुड़े अभिलेखों की भी पड़ताल की जा रही है।
इस तरह अब राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद से चढ़ावे से जुड़े पूरे लेखा-जोखा और व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। जांच टीम पुराने रिकॉर्ड और कर्मचारियों से मिली जानकारी को भी मौजूदा जांच से जोड़कर देख रही है।
सीईओ की भर्ती प्रक्रिया भी तेज
इसी बीच राम मंदिर की व्यवस्था के संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ (CEO) की भर्ती प्रक्रिया भी तेज हो गई है। सेवानिवृत्त जस्टिस प्रमोद कोहली (Justice Pramod Kohli) की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने सीईओ पद के लिए मिले 5200 आवेदनों की स्क्रीनिंग पूरी कर ली है।
कमेटी ने साक्षात्कार (Interview) के लिए 11 और 12 अगस्त की तारीख तय की है। इसकी सूचना संबंधित आवेदकों को भेज दी गई है। साक्षात्कार अयोध्या में राम मंदिर परिसर स्थित पीएफसी में आयोजित किया जाएगा।
अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन (Krishna Mohan) ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि साक्षात्कार पूरा होने के बाद तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपा जाएगा। यह पैनल दो सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में रखा जाएगा। ट्रस्टियों की मंजूरी के बाद ही राम मंदिर के सीईओ के नाम का ऐलान किया जाएगा।
गणना में लगाए गए सेना से रिटायर बैंक कर्मी
राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच के बीच चढ़ावे की गणना की व्यवस्था को भी बदला गया है। एसओपी (SOP) के अनुपालन में बैंक प्रबंधन ने चढ़ावे की गणना के लिए नई व्यवस्था तैयार की है।
बैंक प्रबंधन ने इस बार पारदर्शी, ईमानदार और व्यवस्थित तरीके से गणना सुनिश्चित करने के लिए सेना से रिटायर बैंक कर्मियों को चुना है। एसबीआई (SBI) की अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत 10 बैंक कर्मचारियों को गणना के काम के लिए भेजा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार चढ़ावे की गणना के लिए कुल 12 कर्मचारियों की जरूरत है। फिलहाल 10 कर्मचारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा गणना के पूरे काम की निगरानी के लिए एक प्रभारी भी नियुक्त किया गया है। क्लास टू लेवल के एक अधिकारी को सुपरविजन (Supervision) की जिम्मेदारी दी गई है। बताया गया है कि गणना में लगाए गए सभी कर्मचारी बैंक के नियमित स्टाफ हैं।
हटाए गए सिक्योरिटी एजेंसी के ज्यादातर कर्मी
बैंक प्रबंधन ने सिक्योरिटी सर्विस (Security Service) की सेवा समाप्त करने के लिए एक सर्कुलर भी जारी किया है। एजेंसी से जुड़े ज्यादातर कर्मचारियों को राम मंदिर से हटा दिया गया है और एजेंसी के साथ अनुबंध भी समाप्त कर दिया गया है।
हालांकि एजेंसी से जुड़े तीन कर्मचारियों को अभी रोका गया है। इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी दानपात्रों को खाली करने के बाद चढ़ावा जिस पेटियों में रखा जाता है, उन पेटियों को गणना स्थल तक पहुंचाने और गणना पूरी होने के बाद उन्हें सुरक्षित बैंक तक पहुंचाने की है।
इस काम के लिए जरूरी तीन कर्मचारियों को फिलहाल जिम्मेदारी दी गई है, जबकि एजेंसी के बाकी सभी कर्मचारियों को राम मंदिर से हटा दिया गया है।
जांच पूरी होने के बाद पूर्व सदस्य ने सौंपी जिम्मेदारी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की ओर से स्टेट बैंक (State Bank) में जमा की गई धनराशि और धातुओं की जांच भी पूरी कर ली गई है। यह जांच ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने पूरी की है।
सभी लॉकरों की वीडियोग्राफी (Videography) कराई गई और इससे जुड़े लिखित दस्तावेज भी तैयार किए गए हैं। इसके बाद ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ। अनिल मिश्रा (Dr Anil Mishra) ने महत्वपूर्ण कागजात पर हस्ताक्षर किए और लॉकरों की चाबी नवनियुक्त अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को सौंप दी। इससे पहले स्टेट बैंक के जीएम भी तीन दिन पहले अयोध्या पहुंचकर पूरी व्यवस्था का जायजा ले चुके हैं।
जांच और व्यवस्था दोनों पर बढ़ी निगरानी
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच अब पहले की तुलना में काफी व्यापक हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एसआईटी ने जांच को ट्रस्ट के गठन के समय से शुरू करते हुए पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और उस दौरान कार्यरत रहे कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में शामिल किया है।
दूसरी तरफ चढ़ावे की गणना व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं। बैंक के नियमित कर्मचारियों को गणना की जिम्मेदारी देने, निगरानी के लिए अधिकारी तैनात करने और सिक्योरिटी एजेंसी के ज्यादातर कर्मचारियों को हटाने के बाद अब पूरी प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और निगरानी में रखने की कोशिश की जा रही है।