Azamgarh News: खरीफ 2026 में किसानों को मिलेगा मुफ्त मिलेट्स मिनीकिट, आजमगढ़ में शुरू हुई प्रक्रिया

Azamgarh News: आजमगढ़ में खरीफ 2026 के लिए किसानों को मिलेट्स (मोटे अनाज) के उन्नत बीजों की निःशुल्क मिनीकिट देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और पोषणयुक्त फसलों को बढ़ावा देना है।

Update:2026-05-07 18:42 IST

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Azamgarh News: आजमगढ़ जनपद में खरीफ 2026 के लिए किसानों को मोटे अनाज यानी मिलेट्स फसलों के उन्नत बीजों के निःशुल्क मिनीकिट देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम के तहत चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को पोषणयुक्त और जलवायु के अनुकूल फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है।

6062 मिनीकिट बांटने का लक्ष्य

उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश से मिले आवंटन के अनुसार आजमगढ़ जनपद को कुल 6062 मिनीकिट वितरित करने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें अलग-अलग मिलेट्स फसलों के लिए अलग संख्या तय की गई है।ज्वार के लिए 1400 मिनीकिट, बाजरा के लिए 3150 मिनीकिट, सांवा के लिए 462 मिनीकिट, कोदो के लिए 280 मिनीकिट और रागी के लिए 770 मिनीकिट निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक मिनीकिट 0.2 हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए तय किया गया है।कृषि विभाग की ओर से प्रत्येक मिनीकिट में बीज की मात्रा भी निर्धारित कर दी गई है। ज्वार के लिए प्रति मिनीकिट 2 किलोग्राम बीज दिया जाएगा। बाजरा के लिए 1 किलोग्राम बीज निर्धारित है। वहीं सांवा के लिए 2 किलोग्राम, कोदो के लिए 3 किलोग्राम और रागी के लिए 3 किलोग्राम बीज दिया जाएगा।इन सभी मिनीकिटों का वितरण किसानों को पूरी तरह निःशुल्क किया जाएगा।

10 मई तक कर सकते हैं ऑनलाइन बुकिंग

इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर 10 मई 2026 तक ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। बुकिंग के बाद पात्र किसानों का चयन ऑनलाइन और ई-लॉटरी के जरिए पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। चयनित किसानों को राजकीय बीज गोदामों के माध्यम से मिनीकिट उपलब्ध कराए जाएंगे।

अधिकारियों को दिए गए प्रचार-प्रसार के निर्देश

उप कृषि निदेशक ने जनपद के सभी सहायक विकास अधिकारियों कृषि, कृषि कर्मियों और बीज भंडार प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि विकास खंड स्तर पर इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। साथ ही ज्यादा से ज्यादा किसानों की ऑनलाइन बुकिंग कराई जाए ताकि अधिक किसानों को इस योजना का लाभ मिल सके।इसके अलावा किसानों को मिलेट्स फसलों के पोषण और आर्थिक महत्व के बारे में भी जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं मिलेट्स फसलें

आशीष कुमार ने बताया कि मिलेट्स फसलें कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने वाली फसलें हैं। जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में ये फसलें किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही हैं। बाजरा, ज्वार, रागी, सांवा और कोदो जैसे मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिलेट्स फसलों को “श्री अन्न” के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसानों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ लोगों को पौष्टिक आहार भी मिल सके।

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