Banda News: जनता के विरोध के बीच बहादुरपुर खदान में लिफ्टर मशीन से हो रहा अवैध खनन

Banda News: बांदा की बहादुरपुर बालू खदान में जनता के विरोध और प्रशासन की चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित लिफ्टर मशीन व पोकलैंड मशीन से अवैध खनन का आरोप लगाया गया है।

By :  Anwar Raza
Update:2026-06-20 17:37 IST

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Banda News: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बालू माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि जनता के विरोध और डीएम सहित खनिज अधिकारी की सख्त चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित लिफ्टर मशीन से अवैध खनन किया जा रहा है। इसके अलावा नदी की जलधारा में पोकलैंड मशीन से खनन कर जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और पर्यावरण को दूषित किया जा रहा है।

विश्व के सबसे गर्म इलाकों में शुमार बांदा जिला, जिसने गर्मी के मामले में दुनिया में तीसरा स्थान हासिल किया है, वहां की जनता भीषण गर्मी से परेशान है। गर्मी का सितम थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके बाद से बांदा के लोग अवैध खनन और पेड़ों की कटाई को लेकर काफी नाराज हैं और इस पर रोक लगाने के लिए डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायतें भेज चुके हैं। इसके बाद बांदा डीएम ने नदी में जलीय जीवों के शिकार पर रोक लगाते हुए अवैध खनन पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।

इसके बावजूद श्योढ़ा बहादुरपुर बालू खदान में सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए लगातार अवैध खनन किया जा रहा है। प्रतिबंधित लिफ्टर मशीन लगाकर केन नदी का सीना छलनी किया जा रहा है, जिससे नदी का पानी गहराई में समाता जा रहा है। इतना ही नहीं, पोकलैंड मशीन से नदी की जलधारा में खनन किया जा रहा है, जिसके चलते मशीन के भारी-भरकम बकेट से जलीय जीवों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे नदी का पानी दूषित हो रहा है और नदी के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।

आपको बता दें कि बीते दिनों भी इस खदान में खनिज अधिकारी ने प्रतिबंधित लिफ्टर मशीन पकड़ी थी, लेकिन चेतावनी देकर कार्रवाई को सीमित कर दिया गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि खदान संचालक उमेश गुप्ता के हौसले और बुलंद हो गए और मनमाने तरीके से अवैध खनन फिर शुरू कर दिया गया।इस पूरे मामले में जब खनिज अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अबकी बार ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि दोबारा अवैध खनन करने की हिम्मत नहीं होगी। जरूरत पड़ी तो खदान संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और फर्म को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा।अब देखने वाली बात यह होगी कि खनिज अधिकारी अपने बयान पर कितने खरे उतरते हैं।

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