Chandauli News भरदूंआ लाठीचार्ज मामले में AIPF की एंट्री, गांव पहुंची टीम; पीड़ितों के लिए उठाई आवाज
Chandauli News: चंदौली के भरदूंआ गांव में लाठीचार्ज मामले के बाद AIPF की पांच सदस्यीय टीम पहुंची, पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर न्याय की मांग उठाई।
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Chandauli News: नौगढ़ के भरदूंआ गांव में वनाधिकार कानून को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन और वन विभाग ने वनाधिकार कानून के तहत उनके दावों का निस्तारण किए बिना ही दलितों और मांझियों को बेदखल कर दिया। इस दौरान महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज और उनकी गिरफ्तारी के विरोध में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) की पांच सदस्यीय टीम गांव पहुंची। टीम ने घटना की पूरी जानकारी ली और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग उठाई।
AIPF टीम का गांव दौरा और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
AIPF के राष्ट्रीय समिति सदस्य अजय राय और रहीमुद्दीन के नेतृत्व में प्रतिनिधियों की टीम ने पीड़ितों से मुलाकात की। टीम का कहना है कि वर्ष 1973 में भेड़ा फार्म के लिए जिन विस्थापित किसानों से जमीन ली गई थी, प्रशासन ने उनका नामांतरण नहीं किया, जो जिला प्रशासन की गंभीर लापरवाही है। AIPF ने आरोप लगाया कि कुछ लोग आज भी विजयपुर और बिजौरा में काबिज हैं और अब विस्थापितों के नाम पर यहां भी जमीन हथियाना चाहते हैं।
दमनकारी कार्रवाई और राजनीतिक इशारे का आरोप
पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन की यह पूरी कार्रवाई और दमन सत्ताधारी दल के नेताओं के इशारे पर हुआ है। वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों और दलितों के दावों का निष्पक्ष निस्तारण करने के बजाय उनके साथ मारपीट और उत्पीड़न किया जा रहा है।
प्रमुख मांगें और आगे की कार्रवाई
AIPF टीम और पीड़ित ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
निगरानी समिति में अधिकार: यदि ग्रामीणों के वनाधिकार दावे खारिज किए गए हैं, तो उन्हें नियम अनुसार निगरानी समिति के समक्ष अपील करने का अवसर दिया जाए।
निर्दोषों की रिहाई: गिरफ्तार की गई सभी महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को तुरंत रिहा किया जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: महिलाओं पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज करने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।