Chandauli News: 'स्मार्ट इंडिया' का शर्मनाक सच: जहाँ 'डाक टिकट' तक नसीब नहीं, वो कहलाता है डाकघर!

Chandauli News: चंदौली के नौगढ़ बाजार स्थित मुख्य डाकघर में कथित तौर पर महीनों से डाक टिकट उपलब्ध नहीं हैं। इससे ग्रामीणों को चिट्ठी और रजिस्ट्री भेजने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

Update:2026-08-10 16:01 IST

Chandauli News

Chandauli News: एक तरफ 'डिजिटल क्रांति' और 'विकसित भारत' के चमकदार विज्ञापनों का शोर है, तो दूसरी तरफ धरातल पर घिसटती बदहाल व्यवस्था। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले स्थित नौगढ़ बाजार का मुख्य डाकघर आज सरकारी सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता सुबूत बन चुका है। जिस संस्थान की पूरी पहचान ही 'डाक टिकट' से होती है, उसी डाकघर से महीनों से 'डाक टिकट' गायब हैं। विडंबना देखिए कि देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के गृह क्षेत्र में आने वाले इस डाकघर में व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है!

नाम का 'डाकघर', काम में 'शून्य'

नौगढ़ बाजार का यह दफ्तर सुदूर ग्रामीण अंचल के दर्जनों गाँवों के लिए डाक सेवाओं की एकमात्र उम्मीद है। लेकिन आज आलम यह है कि कोई बेरोजगार छात्र किसी फॉर्म की उम्मीद लेकर पहुंचे या कोई बुजुर्ग अपनों का हालचाल भेजने—सबको काउंटर से टका-सा जवाब देकर बैरंग लौटा दिया जाता है: ‘टिकट नहीं है!’ जब 1 रुपये के मामूली टिकट के लिए जनता दर-दर भटके, तो समझ जाइए कि'सुशासन' के बड़े-बड़े दावे केवल फाइलों में सांस ले रहे हैं।

आला अफसरों की बेशर्मी और निकम्मापन

किसी डाकघर में साधारण चिट्ठी या रजिस्ट्री का टिकट न होना कोई मामूली तकनीकी खामी नहीं, बल्कि डाक विभाग के आला अधिकारियों की घोर नाकामी और घोर संवेदनहीनता है। जब यह तंत्र अपने सबसे प्राथमिक काम में ही फेल हो चुका है, तो स्पीड पोस्ट और बैंकिंग जैसी बड़ी सेवाओं का जनाज़ा किस कदर निकल रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

कागजों पर 'स्मार्ट' इंडिया, ज़मीन पर जनता 'लाचार'

स्थानीय ग्रामीण चीख-चीखकर थक चुके हैं, शिकायतें अफसरों की मेजों पर धूल फांक रही हैं, लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन टस से मस होने को तैयार नहीं। आश्वासनों का झुनझुना थमाकर हर बार जनता को टरका दिया जाता है।जिस डाकघर में एक 'डाक टिकट' के दर्शन दुर्लभ हों, उसे 'डाकघर' कहना भी इस शब्द का घोर अपमान है। 21वीं सदी के तथाकथित 'स्मार्ट इंडिया' में नौगढ़ की जनता को एक मामूली टिकट के लिए तरसाना, कागजी विकास का ढोल पीटने वाले जनप्रतिनिधियों और लापरवाह अफसरों के मुंह पर एक करारा तमाचा है!

Tags:    

Similar News