Etah News: युवक के आत्मदाह प्रयास से उठे जांच और न्याय पर सवाल, जानें क्या है पूरा मामला

Etah News: पत्नी की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर युवक ने कलेक्ट्रेट में आत्मदाह का प्रयास किया। पुलिस ने समय रहते रोक लिया, मामले की जांच के निर्देश दिए गए।

Update:2026-07-13 20:27 IST

युवक के आत्मदाह प्रयास से उठे जांच और न्याय पर सवाल, जानें क्या है पूरा मामला (Photo- Newstrack)

Etah News: किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब एक व्यक्ति थाना, पुलिस अधिकारी, जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री पोर्टल, डीजीपी और प्रधानमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाने के बाद भी खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह जैसा कदम उठाने पर मजबूर हो जाए, तो सवाल केवल एक व्यक्ति की पीड़ा का नहीं बल्कि पूरे शिकायत निस्तारण तंत्र का बन जाता है।आज सोमवार को एटा कलेक्ट्रेट परिसर में घटी घटना ने ऐसे ही कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

राहुल ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्महत्या का प्रयास किया

जनपद के मिरहची थाना क्षेत्र के रहने वाले राहुल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। समय रहते सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोक लिया और एक बड़ी घटना टल गई। राहुल का कहना है कि वर्ष 2025 में पत्नी निशा की आत्महत्या के मामले में उसे झूठा जेल भेजा गया, जबकि वह घटना के समय घर पर मौजूद नहीं था। जेल से बाहर आने के बाद उसने पत्नी की मौत की लगातार निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला और न हत्यारों को सजा

इस पूरे क्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राहुल अपने हर शिकायती पत्र और सार्वजनिक बयान में तत्कालीन मिरहची थाना प्रभारी नीतू वर्मा का नाम लेता रहा है। उसका आरोप है कि उसके द्वारा दिए गए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों पर ध्यान नहीं दिया गया तथा वास्तविक आरोपियों के बजाय उसे ही आरोपी बना दिया गया। यही कारण है कि वह लगातार निष्पक्ष जांच और पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारी सीआईडी से जांच कराने की मांग कर रहा है।



यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि राहुल द्वारा लगाए गए आरोप अभी उसके व्यक्तिगत आरोप हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या न्यायिक सत्यापन नहीं हुआ है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति लगातार एक ही अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप लगा रहा है और अनेक स्तरों पर शिकायतें देने के बाद भी संतुष्ट नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या इन शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

न्याय की आस में कलेक्ट्रेट का लगाता रहा चक्कर

कलेक्ट्रेट परिसर में राहुल अपर जिलाधिकारी से मिलने की कोशिश करता रहा। आपको बताते चलें पूरे घटनाक्रम में जब राहुल कलेक्ट्रेट पहुंचता है तो वह अपना मोबाइल ऑन कर अपने पूरे घटनाक्रम को लाइव करता है उसके बाद वह कलेक्टर के ऑफिस के सामने जोर-जोर से चिल्ला चिल्लाकर न्याय की गुहार लगाता है अधिकारियों को बुलाने की मांग करता है ऐसा काफी देर चलने के बाद भी जब कोई अधिकारी बाहर नहीं आता तो अपने बैग से पेट्रोल की बोतल निकलता है उसके बाद भी वह एक बार फिर अधिकारियों को बुलाता है नहीं आने पर वह बोतल खोलकर अपने ऊपर पेट्रोल डाल लेता है आखिर अधिकारियों के मौजूद रहने के बाद भी यह संवेदनहीनता क्यों? आम जनमानस में चर्चा का विषय बनी हुई आखिर इतना सब कुछ होता रहा और अधिकारी एसी में बैठे रहे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अधिकारी बाहर नहीं आए और इसी बीच राहुल ने पैट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास कर दिया। बाद में पुलिस ने उसे समझाकर अपने साथ ले लिया। हालांकि राहुल बार-बार कहता रहा कि वह थाने नहीं जाएगा क्योंकि उसे वहां निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद नहीं है थाने में क्या होता है सब जानते हैं।

कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायतें निराधार हैं तो उनका स्पष्ट निष्कर्ष सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? यदि शिकायतों में दम है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि पीड़ित लगातार एक ही पुलिस अधिकारी पर आरोप लगा रहा है तो उन आरोपों की विभागीय जांच अब तक क्यों नहीं हुई? क्या शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा के लिए किसी दूसरे जनपद या स्वतंत्र अधिकारी को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए?

घटना के बाद अपर पुलिस अधीक्षक श्वेताभ पांडेय ने बताया कि युवक को समझाकर शांत कराया गया है तथा जांच अधिकारी को निष्पक्ष और शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सवाल अब भी वहीं है कि क्या केवल आश्वासन पर्याप्त होगा, या फिर इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराकर यह स्पष्ट किया जाएगा कि आखिर सच क्या है।

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