Ghazipur News: सूख गई नहरें कैसे हो धान की रोपाई
Ghazipur News: किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है। यदि बारिश कम हुई तो किसानों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। किसानों की इन्हीं समस्याओं को समझने के लिए न्यूज़ ट्रैक की टीम ने उनसे बातचीत की।
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Ghazipur News: धान की रोपाई के लिए किसानों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अब कुछ ही दिनों में किसान अपने-अपने खेतों में धान की रोपाई करते नजर आएंगे। जैसे ही बारिश शुरू होगी, किसान खेतों में सक्रिय हो जाएंगे। लेकिन इन सबके बीच किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है। यदि बारिश कम हुई तो किसानों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
किसानों की इन्हीं समस्याओं को समझने के लिए न्यूज़ ट्रैक की टीम ने उनसे बातचीत की। किसानों ने बताया कि उन्होंने धान की नर्सरी (बीज) डाल दी है। जैसे ही अच्छी बारिश शुरू होगी, धान की रोपाई का काम भी शुरू हो जाएगा।
बारिश के भरोसे रोपाई
न्यूज़ ट्रैक की टीम अपने सवालों के साथ गाजीपुर जनपद के बाराचवर क्षेत्र के खेतों में पहुंची। वहां मौजूद किसान संजय पांडेय ने बताया कि कुछ ही दिनों में धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या पर्याप्त बिजली मिल रही है, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल बिजली मिल रही है, लेकिन जुलाई आते-आते बिजली की समस्या बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि सप्लाई आने के कुछ ही समय बाद कभी ओवरलोड तो कभी लोकल फॉल्ट की समस्या शुरू हो जाती है और यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। उनका कहना था कि यदि बारिश अच्छी हुई तो धान की पैदावार ठीक हो जाएगी, लेकिन यदि बारिश नहीं हुई तो खेती बिजली के भरोसे ही रह जाएगी।
वहीं किसान राजाराम पांडेय ने कहा कि यदि बारिश अच्छी हुई तो सभी किसानों की धान की रोपाई हो जाएगी, लेकिन यदि बारिश नहीं हुई तो केवल उन्हीं किसानों की खेती बच पाएगी जिनके पास अपने निजी ट्यूबवेल हैं।
महंगी खाद से किसान परेशान
किसानों की समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या खाद की उपलब्धता और उसकी बढ़ती कीमतें हैं। किसानों का कहना है कि किसी तरह खेती तो कर ली जाती है, लेकिन खाद की व्यवस्था करना मुश्किल होता जा रहा है। एक ओर खाद के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं सरकारी गोदामों में इसकी उपलब्धता भी बेहद कम है।
सहजतपुर ग्राम सभा के किसान बिजेंद्र यादव ने बताया कि खेती करने वालों के लिए सबसे बड़ी समस्या खाद की है। गोदामों में पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं रहती, जिसके कारण किसानों को बाजार से ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि जो गरीब किसान बैंक से कर्ज लेकर खेती करते हैं, उनके लिए खेती करना अब पहाड़ तोड़ने जैसा हो गया है। किसानों ने सरकार से खाद की कीमतों को नियंत्रित करने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसान कर्ज के बोझ तले दबने से बच सकें।
सूखी पड़ी हैं नहरें
केंद्र और प्रदेश सरकारों ने किसानों के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि उनकी मूल समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कई किसानों ने नहरों के भरोसे धान की नर्सरी तैयार कर ली है। कुछ ही दिनों में रोपाई शुरू हो जाएगी, लेकिन नहरों में पानी नहीं है। ऐसे में खेती कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है। किसानों का कहना है कि केवल योजनाएं शुरू करने से नहरों में पानी नहीं आ जाएगा और न ही खाद के दाम कम हो जाएंगे।
टोडरपुर निवासी किसान दयाशंकर चौबे ने कहा कि नहरों के भरोसे खेती करना अब मुश्किल हो गया है। यदि बारिश हो गई तो फसल बच जाएगी, अन्यथा खेती भगवान भरोसे ही रहेगी।
वहीं बाराचवर गांव के किसान विनोद सिंह ने कहा कि धान और गेहूं की खेती के बाद सबसे बड़ी समस्या फसल बेचने की होती है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में कोई नजदीकी सरकारी क्रय केंद्र नहीं है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित क्रय केंद्र तक जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि नजदीकी क्रय केंद्र न होने के कारण कई किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें उचित लाभ नहीं मिल पाता।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार सिंचाई, खाद की उपलब्धता और फसल खरीद की समस्याओं का समाधान कर दे, तो खेती-किसानी काफी हद तक आसान हो सकती है।