Hapur News: गंगा नदी से मिली मृत डॉल्फिन, नमामि गंगे और प्रदूषण नियंत्रण पर उठे गंभीर सवाल
Hapur News: हापुड़ के ब्रजघाट में गंगा नदी से मृत डॉल्फिन मिलने पर हड़कंप मच गया। वन विभाग ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा, प्रदूषण और निगरानी पर सवाल उठे।
गंगा नदी से मिली मृत डॉल्फिन, नमामि गंगे और प्रदूषण नियंत्रण पर उठे गंभीर सवाल (Photo- Newstrack)
Hapur News: तीर्थ नगरी ब्रजघाट में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब गंगा नदी में श्मशान स्थल के पास एक डॉल्फिन मृत अवस्था में पाई गई। गंगा की स्वच्छता और जैव विविधता का प्रतीक मानी जाने वाली डॉल्फिन की मौत ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमियों को भी झकझोर दिया है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
डॉल्फिन की मौत के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग गंगा में बढ़ते प्रदूषण, अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
नाविक ने देखा तो उड़ गए होश
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार सुबह एक नाविक श्मशान घाट की ओर नाव लेकर गया था। इसी दौरान उसकी नजर नदी किनारे पड़ी एक बड़ी मछली जैसी आकृति पर गई। पास जाकर देखा तो वह गंगा डॉल्फिन थी, जो मृत अवस्था में पड़ी हुई थी। यह दृश्य देखकर नाविक के होश उड़ गए। उसने तत्काल मुख्य स्नान घाट पर पहुंचकर अन्य लोगों को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
रामसर साइट क्षेत्र में कैसे हो रही वन्य जीवों की मौत?
गौरतलब है कि हस्तिनापुर से नरौरा तक करीब 84 किलोमीटर लंबा गंगा क्षेत्र रामसर साइट के रूप में संरक्षित है। इस संवेदनशील क्षेत्र में मछली पकड़ना, गंगा के दोनों ओर दो किलोमीटर के दायरे में रेत खनन करना, प्रदूषण फैलाना और कई अन्य गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन, प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में संरक्षित क्षेत्र में डॉल्फिन की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गंगा की सेहत का प्रतीक मानी जाती है डॉल्फिन
गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी नदी में डॉल्फिन का मौजूद होना उस नदी के अपेक्षाकृत स्वस्थ और जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत माना जाता है। लेकिन अब उसी डॉल्फिन का मृत मिलना पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा कर रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण और अवैध गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
पहले घड़ियाल, अब डॉल्फिन की मौत
ब्रजघाट क्षेत्र में यह पहला मामला नहीं है। करीब एक वर्ष पहले भी गंगा नदी में एक घड़ियाल का शव उतराता हुआ मिला था। उस समय भी मामला काफी चर्चा में रहा था, लेकिन वन विभाग की टीम शव को बरामद तक नहीं कर सकी थी। अब डॉल्फिन की मौत ने एक बार फिर वन्य जीव संरक्षण की व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, फैक्ट्रियों पर लगाए गंभीर आरोप
गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष विनय मिश्रा ने घटना पर गहरा रोष जताते हुए कहा कि फैक्ट्रियों का जहरीला पानी खुलेआम गंगा में छोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मछलियां मर रही थीं और अब डॉल्फिन की मौत हो रही है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर चलाई जा रही नमामि गंगे योजना और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यदि गंगा को बचाना है तो प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
वन क्षेत्राधिकारी करण सिंह ने बताया कि मृत डॉल्फिन के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। वहीं ब्रजघाट में डॉल्फिन की मौत को लेकर लोगों में चिंता और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।
क्या गंगा में बढ़ रहा है पर्यावरणीय संकट?
ब्रजघाट में राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन का मृत मिलना केवल एक वन्य जीव की मौत नहीं, बल्कि गंगा की बिगड़ती सेहत का गंभीर संकेत माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मौत के पीछे प्रदूषण या मानवीय लापरवाही सामने आती है तो यह मामला पूरे प्रदेश में बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा बन सकता है।