Hapur News: लागत बढ़ी, मुनाफा घटा... संकट में पिलखुवा का 50 करोड़ का पॉलिएस्टर कारोबार

Hapur News: पिलखुवा के पॉलिएस्टर हैंडलूम उद्योग में दो महीने में धागे की कीमत 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई है। तैयार माल के दाम नहीं बढ़ने से कारोबारियों का मुनाफा घट रहा है।

By :  Avnish Pal
Update:2026-08-13 19:51 IST

Hapur News

Hapur News: पिलखुवा के पॉलिएस्टर आधारित हैंडलूम उद्योग पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने दबाव बढ़ा दिया है। पिछले करीब दो महीनों में पॉलिएस्टर धागे के दाम में 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। दूसरी ओर तैयार कपड़े के भाव उसी अनुपात में नहीं बढ़ने से कारोबारियों के सामने लागत और बिक्री मूल्य का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ रहा है और करीब 50 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाले इस उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।कारोबारियों के मुताबिक जून के अंतिम सप्ताह में पॉलिएस्टर धागे के दाम करीब 10 रुपये प्रति किलो बढ़े थे। इसके बाद जुलाई के तीसरे सप्ताह में भी कीमत में लगभग 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। इस तरह दो महीने के भीतर ही धागा करीब 20 रुपये प्रति किलो महंगा हो गया। अचानक बढ़ी लागत ने उत्पादन का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

तैयार माल के दाम नहीं बढ़े, मुनाफे पर सीधा असर

पॉलिएस्टर धागे की कीमत बढ़ने के बावजूद तैयार कपड़े के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं। ऐसे में उत्पादन लागत का अतिरिक्त बोझ कारोबारियों को स्वयं उठाना पड़ रहा है। पहले जिस ऑर्डर में एक निश्चित मार्जिन की उम्मीद होती थी, उसमें अब धागे की बढ़ी कीमत के कारण मुनाफा काफी कम हो गया है।पिलखुवा में पॉलिएस्टर धागे पर आधारित करीब 10 प्रमुख निर्यात इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों में लगभग 750 कर्मचारी काम करते हैं और इनका सालाना कारोबार करीब 50 करोड़ रुपये बताया जाता है। यहां तैयार होने वाला कपड़ा दिल्ली, पंजाब, गुजरात और राजस्थान के निर्यातकों तक पहुंचता है।

पुराने ऑर्डर ने बढ़ाई कारोबारियों की मुश्किल

सबसे बड़ी परेशानी उन कारोबारियों के सामने है, जिन्होंने धागे की कीमत बढ़ने से पहले ही पुराने भाव पर ऑर्डर ले लिए थे। अब उन्हीं ऑर्डरों की आपूर्ति महंगे धागे से करनी पड़ रही है। ग्राहक से पहले तय कीमत ही मिलनी है, जबकि उत्पादन लागत बढ़ चुकी है। ऐसे में कई पुराने सौदे कारोबारियों के लिए बेहद कम मुनाफे या नुकसान का कारण बन रहे हैं।कारोबारियों का कहना है कि लगातार कीमत बढ़ने के कारण नए ऑर्डर लेने में भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। यदि कीमतों का उतार-चढ़ाव जारी रहा तो भविष्य के ऑर्डरों में लागत का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाएगा।

कार्यशील पूंजी पर भी बढ़ा दबाव

धागे की कीमत बढ़ने का असर केवल मुनाफे तक सीमित नहीं है। उत्पादन के लिए पहले की तुलना में अधिक पूंजी लगानी पड़ रही है। यानी कारोबारियों को समान मात्रा में माल तैयार करने के लिए ज्यादा पैसा लगाना पड़ रहा है। इससे छोटी इकाइयों की कार्यशील पूंजी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।कारोबारियों को आशंका है कि यदि धागे के दाम जल्द स्थिर नहीं हुए तो छोटी इकाइयों के सामने उत्पादन घटाने या नए ऑर्डर सीमित करने की स्थिति पैदा हो सकती है।पॉलिएस्टर धागे से तैयार होने वाले उत्पादों की मांग घरेलू बाजार के साथ-साथ दूसरे राज्यों के बाजार में भी है। बेडशीट, तिरपाल, फैंसी फैब्रिक, पर्दे का कपड़ा, सोफे का कपड़ा, गद्दा कवर और अन्य घरेलू वस्त्र इसी तरह के धागे से तैयार किए जाते हैं।कच्चे माल की कीमत बढ़ने से इसका असर धीरे-धीरे उत्पादन से लेकर थोक बाजार और आगे ग्राहकों तक पहुंच सकता है। यदि तैयार कपड़े के दाम बढ़ते हैं तो बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की भी आशंका है।

कारोबारियों ने जताई चिंता

अशोक कुमार, बैग कारोबारी, ने कहा, "धागे की लगातार बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ी है। तैयार माल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं। राहत नहीं मिली तो छोटी इकाइयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।"संजीव कुमार, चादर कारोबारी, ने कहा, "पॉलिएस्टर धागे की महंगाई से उद्योग का लागत संतुलन बिगड़ गया है। पुराने ऑर्डर में भी अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है। कीमतें स्थिर होने पर ही कारोबार को राहत मिल सकेगी।"

एक नजर में पॉलिएस्टर कारोबार

प्रमुख इकाइयां: करीब 10

रोजगार: लगभग 750 कर्मचारी

सालाना कारोबार: करीब 50 करोड़ रुपये

धागे की बढ़ोतरी: दो महीने में करीब 20 रुपये प्रति किलो

प्रमुख बाजार: दिल्ली, पंजाब, गुजरात और राजस्थान

मुख्य चुनौती: बढ़ी लागत के मुकाबले तैयार माल के दाम में कम वृद्धि

पॉलिएस्टर धागे से तैयार होने वाले प्रमुख उत्पाद

बेडशीट

तिरपाल

फैंसी फैब्रिक

पर्दे का कपड़ा

सोफे का कपड़ा

गद्दा कवर

घरेलू वस्त्र

पॉलिएस्टर धागे के भाव में बढ़ोतरी

धागे का प्रकार

पहले भाव

मौजूदा भाव

रिलायंस 10 कोन

140 रुपये/किलो

160 रुपये/किलो

त्रिवेणी 10 कोन

139 रुपये/किलो

159 रुपये/किलो

रिलायंस 2/10 कोन

143 रुपये/किलो

163 रुपये/किलो

रिलायंस 2/15 कोन

150 रुपये/किलो

170 रुपये/किलो

नाहर 10 कोन

138 रुपये/किलो

158 रुपये/किलो

नाहर 2/10 कोन

140 रुपये/किलो

160 रुपये/किलो

सबसे बड़ा सवाल: कच्चे माल की कीमत लगातार बढ़ती रही और तैयार कपड़े के दाम नहीं बढ़े तो पिलखुवा की छोटी हैंडलूम इकाइयों के लिए उत्पादन जारी रखना चुनौती बन सकता है। कारोबारियों की नजर अब धागे की कीमतों में स्थिरता और बाजार में तैयार माल के भाव पर टिकी है।

Tags:    

Similar News