"हरदोई गरीब जिला है, इसलिए नहीं रुकेंगी प्रीमियम ट्रेनें?" रेल अधिकारी की कथित टिप्पणी से मचा बवाल

Hardoi News: हरदोई में प्रीमियम ट्रेनों के ठहराव को लेकर विवाद बढ़ गया है। पूर्व डीआरयूसीसी सदस्य गौरव अग्रवाल ने रेल अधिकारी की कथित टिप्पणी का दावा करते हुए सवाल उठाए हैं। रेलवे की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Update:2026-07-14 17:07 IST

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Hardoi News: हरदोई में ट्रेनों के ठहराव का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद की वजह पूर्व डीआरयूसीसी (डिविजनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी) सदस्य गौरव अग्रवाल द्वारा किया गया एक दावा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर एक रेल अधिकारी के साथ हुई बातचीत के दौरान अधिकारी ने हरदोई में प्रमुख ट्रेनों के ठहराव न होने के पीछे जिले की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को कारण बताया।

गौरव अग्रवाल के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने बातचीत में कथित तौर पर लिखा कि हरदोई ऐसा जनपद है जहां रेल से यात्रा करने वाले अधिकांश यात्री मध्यम या निम्न आय वर्ग से आते हैं। इसलिए वंदे भारत, डबल डेकर जैसी प्रीमियम ट्रेनों का यहां ठहराव कराने से रेलवे को विशेष लाभ नहीं होगा। अधिकारी ने साथ ही यह भी लिखा कि वह हरदोई के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और किसी को नाराज नहीं करना चाहते।पूर्व डीआरयूसीसी सदस्य का कहना है कि इस तरह की सोच न केवल हरदोई के लाखों रेल यात्रियों का अपमान है, बल्कि यह रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने इस कथित टिप्पणी का तत्काल विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि किसी भी जिले के विकास और सुविधाओं का निर्धारण वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

रेलवे अधिकारियों की सोच वास्तव में ऐसी है, तो फिर लंबे समय से चली आ रही स्थानीय मांगों को गंभीरता से क्यों लिया जाएगा

इस दावे के सामने आने के बाद हरदोई में ट्रेनों के ठहराव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। लोगों के बीच चर्चा है कि यदि रेलवे अधिकारियों की सोच वास्तव में ऐसी है, तो फिर लंबे समय से चली आ रही स्थानीय मांगों को गंभीरता से क्यों लिया जाएगा। कई लोगों का मानना है कि यही कारण हो सकता है कि सांसद जयप्रकाश रावत द्वारा रेल मंत्री से मुलाकात कर हरदोई में विभिन्न ट्रेनों के ठहराव की मांग उठाने के बावजूद अब तक अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं, जबकि अन्य स्टेशनों पर लगातार नई ट्रेनों के ठहराव स्वीकृत किए जा रहे हैं।

हालांकि, रेल अधिकारी की कथित टिप्पणी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही रेलवे की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो यह मामला केवल हरदोई ही नहीं बल्कि रेलवे की नीतियों और समान अवसर के सिद्धांत पर भी गंभीर बहस का विषय बन सकता है।अब स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की निगाह रेलवे प्रशासन पर टिकी है। लोगों की अपेक्षा है कि हरदोई के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो और यात्री सुविधाओं तथा ट्रेनों के ठहराव से जुड़े निर्णय निष्पक्ष, पारदर्शी और यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाएं।

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